सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   Timli's picture became colorless in search of the colors of life

Almora News: जीवन के रंगों की तलाश में बेरंग हो गई तिमली की तस्वीर

संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा Updated Sun, 15 Mar 2026 11:34 PM IST
विज्ञापन
Timli's picture became colorless in search of the colors of life
विज्ञापन
स्याल्दे (अल्मोड़ा)। तिमली गांव की पगडंडियों पर अब पहले जैसी चहल-पहल नहीं रहती। कई घरों के दरवाजों पर ताले लटके हैं और कुछ मकान धीरे-धीरे खंडहर में बदल रहे हैं। अपने जीवन और सपनों में रंग भरने के लिए लोगों के शहरों की ओर पलायन किया तो तिमली की तस्वीर बेरंग हो गई।
Trending Videos

स्याल्दे विकासखंड मुख्यालय की ग्राम सभा तिमली का हाल एक दशक में पूरी तरह बदल चुका है। ग्राम सभा तिमली चार तोकों तिमली, पिपोड़ा, छियाणी और भौडलेख से मिलकर बनी है। इनमें तिमली तोक सबसे बड़ा है और स्याल्दे बाजार का एक हिस्सा भी यहीं पड़ता है। ग्राम प्रधान भगवती बिष्ट के अनुसार, एक समय यहां करीब 1400 लोग थे जो अब घटकर लगभग 700 के आसपास बचे हैं। मुख्य तिमली गांव में जहां पहले करीब 200 परिवार थे, अब केवल 45 रह गए हैं। इसी तरह पिपोड़ा तोक में 27 में से 13, छियाणी में 50 में से 22 और भौडलेख में 12 में से केवल 6 परिवार बचे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

शिक्षा व्यवस्था पर भी इसका असर साफ दिखाई देता है। ग्राम सभा में एक प्राथमिक विद्यालय है। करीब दस वर्ष पहले जहां 40 से 50 बच्चे यहां पढ़ते थे, वहीं अब छात्रों की संख्या घटकर मात्र 5 से 8 रह गई है। बच्चों की कमी से विद्यालय की चहल-पहल भी लगभग खत्म हो गई है।

नाम बड़े और दर्शन छोटे
तिमली पूर्व सांसद जंग बहादुर सिंह बिष्ट और पूर्व विधायक जसवंत सिंह बिष्ट का पैतृक गांव रहा है। ब्लॉक मुख्यालय की ग्राम सभा होने के बावजूद यहां स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो सकी। तहसील, विकासखंड और अन्य सरकारी कार्यालयों की मौजूदगी के बावजूद गांव तक विकास की गति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी। परिणामस्वरूप ग्रामीणों का भरोसा धीरे-धीरे कम होता गया और पलायन की रफ्तार बढ़ती चली गई। आज गांव में अधिकतर मध्यम और निम्न वर्ग के परिवार ही रह गए हैं।

बंजर में बदल रही उपजाऊ जमीन

तिमली में लगभग आधे घर अब खाली पड़े हैं। खेतों में काम करने वाले हाथ भी कम होते जा रहे हैं और उपजाऊ जमीन धीरे-धीरे बंजर में बदलती जा रही है। भौगोलिक दृष्टि से लगभग 150 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली इस ग्राम सभा में करीब 30 हेक्टेयर भूमि उपजाऊ है। कभी इन खेतों में गेहूं, धान, झंगोरा, चौलाई, सोयाबीन, हल्दी और अदरक जैसी फसलें लहलहाती थीं। ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य आधार खेती ही थी।











----------
बोले लोग
गांव अब पहले जैसे नहीं रहे। पहले लोग मिलजुलकर रहते थे और खेती में एक-दूसरे का हाथ बंटाते थे, लेकिन अब आधे से अधिक परिवार गांव छोड़कर जा चुके हैं और सुविधाओं का भी अभाव है। - प्रेमा देवी, पिपोड़ा
-----------
क्षेत्र का विकास नहीं हो रहा है। समय पर पानी नहीं मिलता, खेती बंजर होती जा रही है और रोजगार का कोई साधन नहीं है। यदि यही स्थिति रही तो आने वाले पांच वर्षों में गांव खाली हो सकते हैं। -तारा रावत, तिमली गांव
--------------

रोजगार के लिए बाहर जाना मजबूरी हो सकती है, लेकिन लोगों को अपनी पैतृक भूमि और गांव को नहीं भूलना चाहिए। पहाड़ की स्वच्छता और अपने पूर्वजों की धरोहर को संजोने के लिए समय-समय पर गांव लौटना चाहिए। - वीरेंद्र सिंह, तिमली
------------------
पलायन क्षेत्र के लिए दुर्भाग्य है। मैं सेना से सेवानिवृत्त होकर अपने गांव में ही रह रहा हूं। जो लोग घरों में ताला लगाकर चले गए हैं, एक दिन उन्हें अपनी जड़ों की ओर लौटना ही पड़ेगा। -गोविंद भाकुनी, छियाणी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed