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इस वर्ष गणेश चतुर्थी पर बप्पा के घर में आगमन से होंगी ये राशियां धनवान
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उत्तराखंड में कोरोना: मंगलवार को मिले 12 नए संक्रमित, एक मरीज की हुई मौत 

उत्तराखंड में बीते 24 घंटे में 12 नए कोरोना संक्रमित मिले हैं। वहीं, एक मरीज की मौत हुई है। जबकि 28 मरीजों को ठीक होने के बाद घर भेजा गया। सक्रिय मामलों की संख्या घटकर  249 पहुंच गई है। जबकि सोमवार को प्रदेश में 267 सक्रिय मरीज थे। 

उपलब्धि: उत्तराखंड में कोविड टीका लगवाने वालों का आंकड़ा एक करोड़ पार, 94 फीसदी को लगी पहली डोज

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार, मंगलवार को 17277 सैंपलों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। सात जिलों चमोली, चंपावत, पौड़ी, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, टिहरी और उत्तरकाशी में एक भी संक्रमित मरीज नहीं मिला है। वहीं, अल्मोड़ा, बागेश्वर और नैनीताल में एक-एक, देहरादून में चार, हरिद्वार में दो और ऊधमसिंह नगर में तीन संक्रमित मरीज मिले हैं। 

प्रदेश में अब तक कोरोना के कुल संक्रमितों की संख्या 343405 हो गई है। इनमें से 329679 लोग ठीक हो चुके हैं। प्रदेश में कोरोना के चलते अब तक कुल 7391 लोगों की जान जा चुकी है। प्रदेश की रिकवरी दर 96 प्रतिशत और संक्रमण दर 0.07 प्रतिशत दर्ज की गई है। 
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कोरोना वायरस की जांच कोरोना वायरस की जांच

उत्तराखंड में खुले स्कूल: डेढ़ साल बाद प्राइमरी स्कूलों में बजी घंटी, छात्र-छात्राओं में दिखा उत्साह, तस्वीरें...

उत्तराखंड में मंगलवार को करीब डेढ़ साल बाद प्राइमरी स्कूलों में घंटी बजी तो छात्र -छात्राएं उत्साहित नजर आए। कोरोना के कारण लंबे समय से बंद कक्षा एक से पांचवीं तक के 14007 सरकारी और निजी स्कूलों में आज से ऑफलाइन पढ़ाई शुरू हो गई है। स्कूल खुलने पर कई जगह शिक्षकों ने बच्चों का गेट पर ही स्वागत किया।  अधिकतर सरकारी स्कूलों की कक्षाएं तीन घंटे चलेंगी।

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प्रदेश में कोविड संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए मार्च 2020 में प्राथमिक स्कूलों को बंद कर दिया गया था। अब स्थिति कुछ सामान्य होने के बाद शासन की ओर से मंगलवार से स्कूलों को खोलने का आदेश जारी किया गया था। शिक्षा निदेशक के मुताबिक स्कूल बंद होने की वजह से बच्चों की पढ़ाई पर इसका असर पड़ा है।

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पढ़ाई के नुकसान को कम किया जा सके इसके लिए डायट और एससीईआरटी के सहयोग से बच्चों के लिए ब्रिजकोर्स चलाया जाएगा। शिक्षा निदेशक ने कहा कि स्कूलों में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पढ़ाई जारी रहेगी। अभिभावकों पर बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर किसी तरह का दबाव नहीं होगा।  
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उत्तराखंड: पूरे हफ्ते मसूरी घूमने आ सकते हैं पर्यटक, शाम पांच बजे के बाद माल रोड पर वाहनों की एंट्री बैन, तस्वीरें...

कोरोना महमारी से प्रभावित पर्यटन उद्योग को पटरी पर लाने के लिए मसूरी में कोविड प्रोटोकाल पर केंद्रित पर्यटन गतिविधियों का सप्ताह भर संचालन किया जा रहा है। सिर्फ वीकेंड पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 15 हजार पर्यटकों को ही मसूरी में प्रवेश दिया जा रहा है। जिससे पर्यटन स्थलों पर कोविड नियमों का पालन कराया जा सके।

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पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने बताया कि कोरोना मरीजों के तेजी से कम होते मामले और टीकाकरण अभियान को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पर्यटन गतिविधियों का संचालन करने की अनुमति दे दी है। मसूरी आने के लिए पर्यटकों को 72 घंटे पूर्व की कोविड जांच निगेटिव रिपोर्ट या वैक्सीन की दो डोज का प्रमाणपत्र दिखाना अनिवार्य है।

साथ ही स्मार्ट सिटी के पोर्टल पर पंजीकरण और होटल की बुकिंग का प्रमाण दिखाना होगा। उन्होंने बताया कि वीकेंड पर 15 हजार पर्यटकों को आने की अनुमति की व्यवस्था शनिवार सुबह से सोमवार सुबह आठ बजे तक लागू है। अन्य दिनों में पर्यटक मसूरी में आसानी से प्रवेश कर सकते हैं। पर्यटकों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए ही यह व्यवस्था की गई है।
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नरेंद्र गिरि: ...जब कुंभ को सांकेतिक कराने पर झेली थी संतों की नाराजगी, संक्रमित होने के बाद नहीं कर पाए थे शाही स्नान

हरिद्वार कुंभ को सकुशल कराने में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे श्रीमहंत नरेंद्र गिरि की अहम भूमिका रही। कुंभ का आयोजन कोविड की दूसरी लहर के बीच हुआ था। खुद श्रीमहंत नरेंद्र गिरि 11 अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव आने के बाद ऋषिकेश एम्स में भर्ती रहे। संक्रमण के फैलाव को देखते हुए जनहित में कुंभ को सांकेतिक कराने के फैसले में श्रीमहंत का योगदान रहा।

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अखाड़ा परिषद के मुखिया होने के नाते उन्होंने मेष संक्रांति (वैशाखी) के शाही स्नान के बाद कुंभ को सांकेतिक कराया था। इस फैसले से बैरागी संतों की नाराजगी भी झेलनी पड़ी थी। 27 अप्रैल का आखिरी चैत्र पूर्णिमा का बैरागियों का स्नान सांकेतिक हुआ था।

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वहीं, वे कोरोना संक्रमित आने के बाद सोमवती अमावस्या और मेष संक्रांति का शाही स्नान नहीं कर पाए थे। जब महंत नरेंद्र गिरि की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी उसी दिन वे सपा प्रमुख अखिलेश यादव से भी मिले थे। 
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श्राद्ध 2021: दशकों बाद बना संयोग, इस बार 16 नहीं 17 दिन के होंगे पितृपक्ष, ऐसे करें पूजन 

कुंभ में हरकी पैड़ी पर गंगा पूजन करते महंत नरेंद्र गिरि
श्रद्धापूर्वक अपने पितरों को प्रसन्न करने का पर्व श्राद्ध पक्ष इस बार 16 के बजाए 17 दिनों का होगा। ऐसा संयोग दशकों बाद पंचमी तिथि दो दिन आने के कारण बन रहा है। श्राद्ध पक्ष 20 सितंबर से शुरू हो गए हैं जो छह अक्तूबर तक चलेंगे। इन दिनों सभी तरह के मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे। 

सनातन मान्यता के अनुसार जो परिजन अपना देह त्याग कर चले गए हैं। उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए सच्ची श्रद्धा के साथ जो तर्पण किया जाता है, उसे श्राद्ध कहा जाता है। श्राद्ध हमारे सनातन धर्म में महत्वपूर्ण धार्मिक कृत्य है। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार जब सूर्य नारायण कन्या राशि में विचरण करते हैं, तब पितृ पृथ्वी लोक के सबसे नजदीक आ जाते हैं। जो मनुष्य अपने पितरों के प्रति उनकी तिथि पर अपने सामर्थ्य अनुसार ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं, उन पर पितरों का आशीर्वाद बना रहता है। 

धर्म ग्रंथों के अनुसार श्राद्ध के 16 दिनों में लोग अपने पितरों को पिंडदान देकर तृप्त करते हैं। इस बार पितृपक्ष कई दशकों के बाद 16 के बजाए 17 दिनों का पड़ रहा है। श्राद्ध पक्ष में पंचमी तिथि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 25 सितंबर की सुबह 10 बजकर 36 मिनट से शुरू होकर 26 सितंबर को दोपहर एक बजे तक रहेगी, लेकिन शास्त्रानुसार पंचमी तिथि का श्राद्ध 25 सितंबर को ही किया जाएगा।

जिस कारण छठवां श्राद्ध 27 को होगा। उत्तराखंड विद्धत सभा के पूर्व अध्यक्ष पं. उदय शंकर भट्ट ने बताया कि सनातन धर्म के अनुसार श्राद्ध करने से पितरों को आत्मिक शांति मिलती है। श्राद्ध पक्ष में पिंडदान और तर्पण के साथ ही गाय, कुत्ता और कौआ को भी भोजन कराना अनिवार्य है।
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नरेंद्र गिरि: सबको भगवन कहकर करते थे संबोधित, किसी से भी मिलने के लिए नहीं मानते थे कोई प्रोटोकॉल

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत जितने बड़े संत थे उतने ही उदार और सौम्य भी। विवादों से भले उनका नाता जुड़ा रहा, लेकिन नरेंद्र गिरि सबके लिए समान व्यवहार रखते थे। अधिकतर समय प्रयागराज में रहते थे, लेकिन हरिद्वार आने पर सभी संतों से चर्चा करते थे।

स्वयं श्री निरंजनी अखाड़े से जुड़े थे, लेकिन अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के नाते सभी अखाड़ों और संप्रदाय के संतों से उनकी बेहद नजदीकियां रही। केंद्र से प्रदेश की सत्ता में कोई भी पार्टी रहे, उनका आशीर्वाद लेने सभी नेता आते थे।

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भक्तों से मुलाकात करने के लिए किसी तरह का प्रोटोकॉल फॉलो नहीं करते थे। हर किसी को भगवन से संबोधन करते थे। उनका सौम्य स्वभाव ही था कि उनके शिष्य आनंद गिरि पर को उन्होंने विवाद के बाद भी माफ कर दिया था। 

नरेंद्र गिरि: ...जब कुंभ को सांकेतिक कराने पर झेली थी संतों की नाराजगी, संक्रमित होने के बाद नहीं कर पाए थे शाही स्नान

संत आनंद गिरि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ब्रह्मलीन श्रीमहंत नरेंद्र गिरि के सबसे प्रिय शिष्य रहे। मई 2021 में गुरु-शिष्य के बीच तल्खियां बढ़ीं। इसकी वजह शिष्य पर संत परंपरा का उल्लंघन कर परिवार से मिलने और गद्दी का चढ़ावा निजी हितों पर लगाने का आरोप था। कई दिनों तक गुरु-शिष्य के विवाद एवं आरोप प्रत्यारोपों के बीच गुरु पूर्णिमा पर नरेंद्र गिरि ने संत आनंद गिरि को माफ करते हुए आशीर्वाद दिया।
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उपलब्धि: उत्तराखंड में कोविड टीका लगवाने वालों का आंकड़ा एक करोड़ पार, 94 फीसदी को लगी पहली डोज 

कोविड टीकाकरण में उत्तराखंड ने एक करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। प्रदेश में अब तक 94 प्रतिशत लोगों ने वैक्सीन की पहली डोज और 35 प्रतिशत को दोनों डोज लगाई जा चुकी है। टीकाकरण में बागेश्वर, रुद्रप्रयाग और चमोली जिले सबसे आगे हैं। इन जिलों में 100 प्रतिशत वैक्सीनेशन हो चुका है। 

उत्तराखंड में कोरोना: सोमवार को मिले 11 नए संक्रमित, एक भी मरीज की मौत नहीं

प्रदेश में 31 दिसंबर 2021 तक शत प्रतिशत कोविड टीकाकरण का सरकार ने लक्ष्य रखा है। सोमवार को प्रदेश भर में 1077 केंद्रों पर 74 हजार से अधिक लोगों को वैक्सीन की पहली या दूसरी डोज लगाई गई। इन्हें मिलाकर टीके लगवाने वालों का आंकड़ा एक करोड़ पार कर गया है। जिसमें 94 प्रतिशत को पहली और 35 प्रतिशत को दोनों डोज लग चुकी है। 

चिंताजनक: उत्तराखंड में पांच साल तक के 60 फीसदी बच्चे एनीमिया से ग्रसित

राज्य प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. कुलदीप सिंह मर्तोलिया ने बताया कि प्रदेश की कुल आबादी में से 18 से अधिक आयु वर्ग के 77.29 लाख लोगों को कोविड वैक्सीन लगाई जानी है। 16 जनवरी 2021 से प्रदेश में कोविड टीकाकरण अभियान शुरू हुआ है। अब तक एक करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। डॉ. मर्तोलिया ने बताया कि बागेश्वर, रुद्रप्रयाग और चमोली जिले में 100 प्रतिशत टीकाकरण हो चुका है। 
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