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संस्कृत का अध्ययन किया छात्र नहीं होता निराश: बालकृष्ण
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
Updated Mon, 13 Apr 2026 07:58 PM IST
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- श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में मनाया स्थापना दिवस
हरिद्वार। पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि संस्कृत का अध्ययन किया हुआ छात्र कभी जीवन में निराश नहीं होता है। भारतीय संस्कृति और सभ्यता के संरक्षण का दायित्व संस्कृत के विद्यार्थियों का है। हमें संकल्प लेना है कि हम निरंतर संस्कृत के शास्त्रों की रक्षा के लिए कार्य करेंगे।
उन्होंने श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय के स्थापना दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि आचार्य बालकृष्ण ने यह बातें बोलीं। कहा कि हमें अपनी वेशभूषा और शिखा पर गर्व होना चाहिए। कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि राष्ट्र निर्माण और संस्कृत के विकास में महाविद्यालय का बहुत बड़ा योगदान है। भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण व संवर्धन में महाविद्यालय निरंतर अग्रणी है।उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय ने कहा कि महाविद्यालय के इतिहास का लेखन किया जाना चाहिए। छात्र संकल्प लें कि जिस उद्देश्य से महाविद्यालय की स्थापना की गयी थी, वह उद्देश्य पूर्ण हो। महाविद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष प्रो. यशवीर सिंह ने कहा कि आज महाविद्यालय को वेद और धर्मशास्त्र विभाग की मान्यता सरकार की ओर से प्रदान की गई, जो महाविद्यालय परिवार के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। इस मौके पर पूर्व प्राचार्य डॉ. भोला झा, धर्मशास्त्राचार्य प्रो. भगवानसहाय शर्मा, प्रभारी प्राचार्य डॉ. रवींद्र कुमार, डॉ. अंकुर कुमार आर्य आदि मौजूद रहे।
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हरिद्वार। पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि संस्कृत का अध्ययन किया हुआ छात्र कभी जीवन में निराश नहीं होता है। भारतीय संस्कृति और सभ्यता के संरक्षण का दायित्व संस्कृत के विद्यार्थियों का है। हमें संकल्प लेना है कि हम निरंतर संस्कृत के शास्त्रों की रक्षा के लिए कार्य करेंगे।
उन्होंने श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय के स्थापना दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि आचार्य बालकृष्ण ने यह बातें बोलीं। कहा कि हमें अपनी वेशभूषा और शिखा पर गर्व होना चाहिए। कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि राष्ट्र निर्माण और संस्कृत के विकास में महाविद्यालय का बहुत बड़ा योगदान है। भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण व संवर्धन में महाविद्यालय निरंतर अग्रणी है।उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय ने कहा कि महाविद्यालय के इतिहास का लेखन किया जाना चाहिए। छात्र संकल्प लें कि जिस उद्देश्य से महाविद्यालय की स्थापना की गयी थी, वह उद्देश्य पूर्ण हो। महाविद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष प्रो. यशवीर सिंह ने कहा कि आज महाविद्यालय को वेद और धर्मशास्त्र विभाग की मान्यता सरकार की ओर से प्रदान की गई, जो महाविद्यालय परिवार के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। इस मौके पर पूर्व प्राचार्य डॉ. भोला झा, धर्मशास्त्राचार्य प्रो. भगवानसहाय शर्मा, प्रभारी प्राचार्य डॉ. रवींद्र कुमार, डॉ. अंकुर कुमार आर्य आदि मौजूद रहे।
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