नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की वॉटरलॉगिंग में डूबने से हुई दर्दनाक मौत के मामले में अब राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। मीडिया रिपोर्टों के आधार पर एनजीटी ने नोएडा अथॉरिटी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB), सिंचाई विभाग, पर्यावरण विभाग और गौतम बुद्ध नगर के जिला मजिस्ट्रेट समेत कुल पांच विभागों और अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। एनजीटी ने सभी संबंधित पक्षों से अगली सुनवाई से पहले हलफनामे के जरिए जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल 2026 को होगी।
एनजीटी की पीठ, जिसमें अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल शामिल हैं, ने सुनवाई के दौरान माना कि यह मामला पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के संभावित उल्लंघन की ओर इशारा करता है। पीठ ने यह भी कहा कि सेक्टर-150 में बनी ट्रेंच का स्थायी तालाब में तब्दील हो जाना प्रशासनिक लापरवाही और स्टॉर्म वाटर मैनेजमेंट सिस्टम की विफलता को उजागर करता है।
मामले में सामने आया है कि नोएडा के सेक्टर-150 में स्थित एक गहरी खाई पिछले कई वर्षों से स्थायी जलाशय में बदल चुकी है। वर्ष 2015 में बनाई गई स्टॉर्म वाटर मैनेजमेंट योजना को आज तक प्रभावी रूप से लागू नहीं किया गया, जिससे इलाके में लगातार जलभराव की स्थिति बनी रही। जांच में यह भी सामने आया है कि सिंचाई विभाग द्वारा हिंडन नदी में तूफानी पानी छोड़ने के लिए एक हेड रेगुलेटर बनाने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए वर्ष 2016 में नोएडा अथॉरिटी से 13.05 लाख रुपये की राशि भी जारी की गई थी, लेकिन इसके बावजूद रेगुलेटर का निर्माण नहीं हो सका।
रेगुलेटर न बनने के कारण बारिश का पानी बाहर नहीं निकल पाया और धीरे-धीरे यह क्षेत्र एक बड़े तालाब में तब्दील हो गया। आसपास की कई हाउसिंग सोसाइटियों के बेसमेंट तक पानी भर गया, जिससे स्थानीय निवासियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने बार-बार प्रशासन को शिकायतें दीं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण स्थिति जस की तस बनी रही।
युवराज मेहता की मौत 20 जनवरी 2026 को उस वक्त हुई, जब कोहरे के कारण उनका रास्ता भटक गया और उनकी कार पानी से भरी गहरी खाई में गिर गई। यह जमीन पहले एक निजी मॉल परियोजना के लिए आवंटित की गई थी, लेकिन पिछले करीब दस वर्षों से वहां बारिश का पानी और आसपास की सोसाइटियों का गंदा पानी जमा होता रहा। समय के साथ यह इलाका एक खतरनाक जलाशय में बदल गया, जहां किसी भी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था या चेतावनी संकेत नहीं लगाए गए थे।
हादसे के बाद एनडीआरएफ की टीम ने लगभग तीन दिन की मशक्कत के बाद पानी में डूबी युवराज की कार को बाहर निकाला। कार के शीशे और सनरूफ टूटे हुए पाए गए, जो अत्यधिक पानी के दबाव की ओर इशारा करते हैं। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में प्रशासनिक लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए नोएडा अथॉरिटी के सीईओ को हटा दिया गया है, जिसे जांच की दिशा में एक बड़ा और अहम कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही विशेष जांच दल (SIT) पहले ही नोएडा पहुंच चुका है और नोएडा अथॉरिटी सहित विभिन्न विभागों में रिकॉर्ड खंगालने का काम शुरू कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, SIT यह भी जांच कर रही है कि रेगुलेटर परियोजना में देरी के लिए कौन-कौन से अधिकारी जिम्मेदार थे और फंड मिलने के बावजूद काम क्यों नहीं हुआ।
इसी बीच, नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने इस मामले से जुड़ी कार्रवाई करते हुए दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रवि बंसल और सचिन करनवाल के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों को पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया है और उनसे मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि आगे की जांच के आधार पर और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
एनजीटी की सख्ती, SIT की जांच और प्रशासनिक स्तर पर हो रही कार्रवाई से यह मामला अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही और जवाबदेही तय करने की बड़ी कानूनी लड़ाई में बदलता नजर आ रहा है।
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