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UP Vidhansabha Election 2027: Why did Mayawati's mega plan increase the tension of Chandrashekhar and Akhilesh
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UP Vidhansabha Election 2027: मायावती के मेगा प्लान से चंद्रशेखर और अखिलेश की क्यों बढ़ी टेंशन?
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Fri, 23 Jan 2026 09:21 PM IST
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क्या बहुजन समाज पार्टी एक बार फिर यूपी की सियासत में बड़ा दांव खेलने जा रही है? क्या मायावती ने 2027 के चुनाव से पहले आकाश आनंद को फ्रंट पर उतारने का मन बना लिया है? 75 जिलों में रोड-शो, क्या इससे बसपा का खोया जनाधार वापस आएगा? और क्या आकाश आनंद, चंद्रशेखर आजाद की बढ़ती लोकप्रियता को रोक पाएंगे? सबसे बड़ा सवाल क्या 2027 में यूपी में बसपा का चेहरा बदलने वाला है या फिर मायावती ही रहेंगी सबसे आगे?
यह सिर्फ एक राजनीतिक दौरा नहीं बल्कि बहुजन समाज पार्टी की 2027 की सियासी बिसात पर बड़ी चाल की शुरुआत है। मायावती अब उत्तर प्रदेश में पार्टी को दोबारा खड़ा करने के लिए मैदान में पूरी ताकत झोंकने जा रही हैं। और इस मिशन के फ्रंट पर होंगे उनके भतीजे और पार्टी के मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद। बसपा ने तय किया है कि आने वाले महीनों में उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में रोड-शो और जनसभाओं के जरिए संगठन को फिर से जमीनी स्तर पर मजबूत किया जाएगा।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, आकाश आनंद फरवरी के अंतिम सप्ताह या मार्च के पहले हफ्ते से पूरे यूपी के दौरे पर निकल सकते हैं। इसकी तैयारियां संगठन स्तर पर चुपचाप शुरू कर दी गई हैं। मकसद साफ है 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बसपा के लिए माहौल बनाना, कैडर में नई ऊर्जा भरना और उन वोटरों को दोबारा जोड़ना, जो हाल के वर्षों में पार्टी से दूर होते चले गए हैं।
आकाश आनंद हर जिले में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे, बूथ स्तर तक संगठन की समीक्षा करेंगे और आम लोगों से सीधे संवाद करेंगे। रोड-शो और छोटी-छोटी जनसभाओं के जरिए बसपा यह संदेश देना चाहती है कि पार्टी फिर से मैदान में है और पूरी ताकत के साथ सत्ता की लड़ाई में उतरने को तैयार है। इस दौरान दूसरी पार्टियों के प्रभावशाली नेताओं को भी बसपा से जोड़ने की रणनीति पर काम होगा, ताकि संगठन का विस्तार हो और सामाजिक समीकरणों को फिर से साधा जा सके।
दरअसल, यह पूरा अभियान सिर्फ संगठन मजबूत करने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी छिपा है। मायावती आकाश आनंद को आगे लाकर यह संकेत देना चाहती हैं कि बसपा में नेतृत्व की नई पीढ़ी तैयार हो रही है। खासतौर पर युवा मतदाताओं पर पार्टी का फोकस है, जिनका एक बड़ा हिस्सा बीते कुछ वर्षों में आजाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर आजाद की ओर झुक गया है।
आकाश आनंद ने साल 2017 में सहारनपुर की एक जनसभा से सक्रिय राजनीति में कदम रखा था, जहां वे पहली बार मायावती के साथ मंच पर नजर आए थे। इसके बाद वे लगातार संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाते रहे। 2019 में सपा-बसपा गठबंधन टूटने के बाद उन्हें राष्ट्रीय समन्वयक बनाया गया। 2022 के हिमाचल विधानसभा चुनाव में वे पहली बार स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल हुए।
आकाश की प्रोफाइल पार्टी के लिए अहम मानी जाती है। उन्होंने लंदन से एमबीए किया है और उनकी छवि एक पढ़े-लिखे, आधुनिक और युवा नेता की है। 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी में उनकी सभाओं में अच्छी भीड़ देखने को मिली थी। इससे यह संकेत मिला कि युवाओं के बीच उनकी अपील बन रही है।
लेकिन 2024 के चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक विवादित बयान के बाद मायावती ने आकाश की भूमिका सीमित कर दी थी। इस फैसले का असर पार्टी के भीतर और वोट बैंक पर भी पड़ा। पार्टी के कई कोर समर्थकों को यह संदेश गया कि फैसले दबाव में लिए जा रहे हैं। नतीजा यह हुआ कि दलित वोटों का एक बड़ा हिस्सा सपा-कांग्रेस गठबंधन की ओर चला गया। बसपा 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी से एक भी सीट नहीं जीत सकी, जबकि 2019 में पार्टी के 10 सांसद थे।
इसी दौरान पश्चिमी यूपी में चंद्रशेखर आजाद के उभार ने बसपा की मुश्किलें और बढ़ा दीं। नगीना सीट से जीत दर्ज कर चंद्रशेखर ने खुद को दलित राजनीति के एक मजबूत नए चेहरे के तौर पर स्थापित किया। इससे बसपा नेतृत्व को यह एहसास हुआ कि अगर पार्टी को दोबारा खड़ा करना है, तो युवाओं और जमीनी कार्यकर्ताओं से फिर से जुड़ना बेहद जरूरी है।
यहीं से आकाश आनंद की वापसी का रास्ता साफ हुआ। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मायावती ने आकाश को दोबारा सक्रिय भूमिका देकर उन्हें संगठन में अनौपचारिक रूप से “नंबर दो” की हैसियत दी है। इसके पीछे रणनीति साफ है चंद्रशेखर आजाद की बढ़ती लोकप्रियता को काउंटर करना और बसपा के भीतर आकाश की स्वीकार्यता को मजबूत करना। ताकि भविष्य में अगर आकाश को उत्तराधिकारी के तौर पर आगे बढ़ाया जाए, तो संगठन के भीतर किसी तरह का विरोध न हो।
हालांकि, बड़ा सवाल यही है कि क्या 2027 में आकाश आनंद ही बसपा का चेहरा होंगे? जानकारों की मानें तो आकाश पार्टी के प्रचार और संगठन की कमान जरूर संभालेंगे, लेकिन चुनावी चेहरे के तौर पर मायावती ही आगे रहेंगी। खुद मायावती कई बार यह संकेत दे चुकी हैं कि पार्टी कार्यकर्ता उन्हें पांचवीं बार मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प ले चुके हैं। बसपा में आज भी सबसे बड़ा चेहरा और सबसे बड़ी ताकत मायावती ही हैं।
यूपी की जातीय राजनीति के समीकरण भी इस रणनीति में अहम भूमिका निभाते हैं। राज्य में ओबीसी करीब 40 प्रतिशत, दलित 20 प्रतिशत, सवर्ण 19 प्रतिशत और मुस्लिम करीब 19 प्रतिशत हैं। अगर इन समीकरणों को साध लिया जाए, तो बसपा के लिए सत्ता की राह आसान हो सकती है। लेकिन बदलती राजनीति में यह काम पहले जितना आसान नहीं रहा। यही वजह है कि मायावती अब सिर्फ सोशल इंजीनियरिंग नहीं, बल्कि जमीनी संगठन और युवा चेहरे के सहारे पार्टी को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रही हैं।
कुल मिलाकर, आकाश आनंद का 75 जिलों का दौरा सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि बसपा की 2027 की सियासी रणनीति की रीढ़ बनने जा रहा है। यह दौरा तय करेगा कि बसपा दोबारा अपने पुराने जनाधार को वापस ला पाती है या नहीं और यह भी कि यूपी की राजनीति में आकाश आनंद कितनी बड़ी भूमिका निभाने जा रहे हैं।
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