Hindi News
›
Video
›
Delhi
›
bravery story and last letter before Martyrdom of freedom fighter bhagat singh
{"_id":"59cba0334f1c1bc8538b4b82","slug":"bravery-story-and-last-letter-before-martyrdom-of-freedom-fighter-bhagat-singh","type":"video","status":"publish","title_hn":"कहानी उस वीर की जिसने 23 साल की उम्र में मौत को माना ‘महबूबा’","category":{"title":"Specials","title_hn":"स्पेशल","slug":"specials"}}
कहानी उस वीर की जिसने 23 साल की उम्र में मौत को माना ‘महबूबा’
वीडियो डेस्क, अमर उजाला टीवी/ नई दिल्ली Updated Thu, 28 Sep 2017 09:32 AM IST
आज आजादी के उस हीरो का जन्मदिन है जिसने मौत को 'महबूबा' और आजादी को 'दुल्हन' माना था, जिसने 'कफन' का सेहरा बांधकर अपनी मां से कहा था 'मेरा रंग दे बंसती चोला'। जी हां हम बात कर रहे हैं भारत मां के सच्चे सपूत भगत सिंह की। भगत सिंह के जन्मदिन के इस मौके पर हम आपको बताएंगे भगत सिंह के उस आखिरी खत के बारे में जो उन्होंने फांसी के ठीक एक दिन पहले लिखा था।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।