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West Bengal Election: Humayun Kabir-AIMIM alliance increases Mamata Banerjee's tension!
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West Bengal Election: हुमायूं कबीर-AIMIM के गठबंधन ने बढ़ा दी ममता बनर्जी की टेंशन!
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Tue, 24 Mar 2026 06:24 PM IST
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पश्चिम बंगाल की सियासत में चुनाव से पहले बड़ा उलटफेर हो गया है। हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी के साथ गठबंधन का ऐलान कर दिया है। जैसे ही इस बात की घोषणा हुई ये सवाल सियासी गलियारों में उठने लगा की क्या यह गठबंधन मुस्लिम वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाएगा? क्या ममता बनर्जी की TMC के लिए मुश्किलें बढ़ने वाली हैं? 182 सीटों पर लड़ने का दावा करने वाले हुमायूं कबीर क्या बंगाल की राजनीति में नया समीकरण बना पाएंगे? और मुर्शिदाबाद से उठी यह सियासी लहर क्या पूरे राज्य में असर दिखाएगी? चलिए आपको इस वीडियो में इस तमाम सवालों के जवाब देते हैं और जानने की कोशिश करते हैं की इस एलान के बाद अब बंगाल की सियासत का समीकरण क्या कहता है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने हुमायूं कबीर की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के साथ गठबंधन का ऐलान कर दिया है। इस गठबंधन को राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर मुस्लिम बहुल इलाकों में।
हुमायूं कबीर, जो कभी ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक रह चुके हैं, पिछले साल पार्टी से निष्कासित कर दिए गए थे। इसके बाद उन्होंने अपनी नई पार्टी AJUP बनाई और अब AIMIM के साथ हाथ मिलाकर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर ली है।
कबीर ने आगामी विधानसभा चुनाव में 182 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। उन्होंने 15 सीटों पर उम्मीदवारों की पहली सूची भी जारी कर दी है। खुद हुमायूं कबीर रेजीनगर सीट से चुनाव लड़ेंगे, साथ ही वह मुर्शिदाबाद जिले की नौवाला सीट से भी मैदान में उतरने की योजना बना रहे हैं।
आपको बात दें सबसे ज्यादा चर्चा भवानीपुर सीट को लेकर है, जहां हुमायूं कबीर ने अपनी पार्टी से पूनम बेगम को उम्मीदवार बनाया गया है। यह सीट मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का गढ़ मानी जाती है। ऐसे में इस सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प होने की उम्मीद है, क्योंकि बीजेपी की ओर से भी यहां मजबूत चुनौती देखने को मिल सकती है।
मुर्शिदाबाद में उनका प्रभाव लगातार बढ़ता हुआ माना जा रहा है। खासकर बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मस्जिद निर्माण के प्रस्ताव और उससे जुड़े अभियान ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया है। इस मुद्दे पर उन्हें बड़े पैमाने पर आर्थिक और जनसमर्थन मिलने का दावा किया जा रहा है, जिसने उनकी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, AIMIM और AJUP का यह गठबंधन राज्य के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगा सकता है। पश्चिम बंगाल की करीब 85 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। ये सीटें मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर, बीरभूम और दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों में फैली हुई हैं।
2021 के विधानसभा चुनाव में TMC ने इन 85 में से 75 सीटों पर जीत हासिल की थी, जिससे यह साफ है कि इन इलाकों में पार्टी की मजबूत पकड़ रही है। लेकिन इस बार AIMIM और AJUP का गठबंधन इस समीकरण को चुनौती दे सकता है। खासकर मुर्शिदाबाद, जहां 22 विधानसभा सीटें हैं और कबीर का अच्छा-खासा प्रभाव माना जाता है।
अगर यह गठबंधन मुस्लिम वोटों का कुछ प्रतिशत भी अपनी ओर खींचने में सफल रहता है, तो इसका सीधा असर TMC के प्रदर्शन पर पड़ सकता है। यही वजह है कि इस गठबंधन को लेकर TMC नेतृत्व की चिंता बढ़ती हुई नजर आ रही है।
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और वाम दल भी मुस्लिम बहुल सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटे हुए हैं, जिससे मुकाबला और त्रिकोणीय या बहुकोणीय होने की संभावना है।
पश्चिम बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं, जिन पर दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा। चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। ऐसे में AIMIM और AJUP का यह नया गठबंधन चुनावी नतीजों पर कितना असर डालता है, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।
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