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Hindi News ›   World ›   163 Days of War: Israel Rejects Trump’s Gaza Plan, Iran Sets Conditions for Reopening Strait of Hormuz

Explainer: 163 दिन से झुलस रहा पश्चिम एशिया, इस्राइल ने ठुकराई ट्रंप की गाजा योजना; होर्मुज में कैसे हालात?

Mon, 10 Aug 2026 02:13 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान/वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान/वॉशिंगटन Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 10 Aug 2026 02:13 AM IST
सार

West Asia Crisis: ईरान और अमेरिका-इस्राइल के बीच संघर्ष को 163 दिन हो चुके हैं, लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बजाय नए मोर्चे खुलते दिख रहे हैं। गाजा में इस्राइल ने ट्रंप की 15 सूत्री योजना को खारिज कर दिया है। होर्मुज को खोलने पर ईरान ने अमेरिका के सामने नई शर्तें रखी हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या युद्ध थमेगा या संकट अब और फैलने वाला है। आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
 

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163 Days of War: Israel Rejects Trump’s Gaza Plan, Iran Sets Conditions for Reopening Strait of Hormuz
पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इस्राइल के बीच शुरू हुआ संघर्ष 163वें दिन में पहुंच गया है, लेकिन हालात सामान्य होने के बजाय और पेचीदा होते जा रहे हैं। गाजा में हमास और इस्राइल के बीच अक्तूबर 2023 से जारी युद्ध भी अब तक पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इस बीच इस्राइल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा योजना को खारिज कर दिया है। वहीं, होर्मुज खोलने को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत अंतिम दौर में पहुंचने का दावा किया जा रहा है। यमन में हूती विद्रोहियों के हमले और ईरान की अमेरिका को जमीन पर सैनिक भेजने के खिलाफ चेतावनी ने तनाव को और बढ़ा दिया है।

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ट्रंप की गाजा योजना को इस्राइल ने क्यों ठुकराया?

इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप की ओर से घोषित गाजा की 15 सूत्री योजना को खारिज कर दिया है। नेतन्याहू ने कैबिनेट की बैठक में साफ कहा कि इस्राइली सेना तब तक गाजा से पीछे नहीं हटेगी, जब तक हमास को वास्तव में पूरी तरह निरस्त्र नहीं किया जाता। ट्रंप की योजना में हमास के निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के साथ इस्राइली सेना की वापसी की बात कही गई थी। नेतन्याहू ने कहा कि इस्राइल दस्तावेज को स्वीकार नहीं करता, हालांकि गाजा को लेकर अमेरिका के साथ बातचीत जारी है। दूसरी तरफ हमास के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य बासेम नईम ने कहा कि संगठन मध्यस्थों और अमेरिका से नेतन्याहू पर दबाव बनाने की उम्मीद कर रहा है। गाजा में करीब 20 लाख फलस्तीनी रहते हैं और इस्राइली सेना इस इलाके के आधे से अधिक हिस्से पर नियंत्रण रखती है।

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गाजा में युद्ध खत्म होने की राह कहां अटक रही है?

गाजा में मौजूदा संकट की जड़ 7 अक्तूबर 2023 को हमास के इस्राइल पर हमले से जुड़ी है। इसके बाद इस्राइल ने गाजा में सैन्य अभियान शुरू किया। युद्ध के बीच संघर्षविराम की स्थिति बनी है, लेकिन स्थायी शांति का रास्ता अभी साफ नहीं हुआ है। इस्राइल की सबसे बड़ी शर्त हमास का निरस्त्रीकरण है, जबकि हमास अमेरिकी और मध्यस्थ देशों से इस्राइल पर दबाव बनाने की उम्मीद कर रहा है। ट्रंप की योजना के बावजूद दोनों पक्षों की प्रमुख शर्तों में अंतर बना हुआ है। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती यही है कि गाजा में युद्ध को स्थायी रूप से रोकने के लिए ऐसा समझौता कैसे हो, जिसे इस्राइल और हमास दोनों स्वीकार कर सकें।


ये भी पढ़ें- ईरान को घेरने की तैयारी इन तीन देशों की तिकड़ी: पाकिस्तान भी शामिल, समझौते पर तेहरान ने क्यों जताई आपत्ति?

होर्मुज को लेकर ईरान और ओमान क्या समझौता कर रहे?

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और ओमान के बीच अस्थायी समझौते पर बातचीत चल रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जहाज ईरान की तरफ से होर्मुज में प्रवेश कर ओमान की तरफ से बाहर निकल सकते हैं। अंतरिम व्यवस्था में जहाजों से शुल्क या टोल नहीं लेने की बात सामने आई है। हालांकि, ईरान ने साफ किया है कि बातचीत आगे बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि होर्मुज तुरंत पूरी तरह खोल दिया जाएगा। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अनुसार, समुद्री रास्ते और कानूनी व्यवस्था को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है, लेकिन जलडमरूमध्य खोलने के लिए कुछ दूसरी शर्तें भी पूरी करनी होंगी। ईरान का कहना है कि अमेरिका को युद्ध से हुए नुकसान और समझौते से जुड़े विवादों पर कार्रवाई करनी होगी।

होर्मुज पर ईरान ने किन देशों के जहाजों पर रोक की बात कही?

ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने होर्मुज के प्रबंधन से जुड़ी योजना के सामान्य खाके को मंजूरी दी है। इसके तहत ईरान से कथित तौर पर नुकसान पहुंचाने वाले देशों के जहाजों को तब तक रास्ता नहीं देने की बात कही गई है, जब तक वे नुकसान की भरपाई नहीं करते। ईरानी अर्ध-सरकारी माध्यमों के हवाले से अमेरिका और इस्राइल को ऐसे ‘शत्रु देशों’ में शामिल बताया गया है। हालांकि, योजना अभी विशेषज्ञों की समीक्षा के दौर में है और इसकी अंतिम शर्तें बदल सकती हैं। ईरान का कहना है कि पहले इस्तेमाल किया जाने वाला समुद्री यातायात मार्ग अब उसे मंजूर नहीं है और नया रास्ता तय करने के लिए तकनीकी और कानूनी स्तर पर काफी काम करना होगा।
 

ईरान ने अमेरिकी सैनिकों को लेकर क्या चेतावनी दी?

  • ईरानी सेना की ग्राउंड फोर्स के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल अली जहांशाही ने अमेरिका को सीधी चेतावनी दी।
  • उन्होंने कहा कि अगर कोई अमेरिकी सैन्यकर्मी ईरान की जमीन पर कदम रखता है तो ईरान उसका मुकाबला करेगा।
  • उन्होंने कहा कि ईरानी सेना की जमीनी इकाइयां पूरी युद्ध तैयारी में हैं और देश की सीमाओं पर लगातार गतिविधियों और संभावित खतरों पर नजर रख रही हैं।
  • यह बयान ऐसे समय आया है जब तेहरान और वाशिंगटन के बीच सीधे बातचीत नहीं हो रही है।
  • ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि दोनों देशों के बीच संदेश मध्यस्थों के जरिए भेजे जा रहे हैं।
  • ईरान का कहना है कि अमेरिका के साथ सीधी बातचीत तभी शुरू होगी, जब वह पिछले समझौते के उल्लंघन से जुड़े मुद्दों को दूर करेगा और नुकसान की भरपाई करेगा।

यमन और सऊदी अरब में हूती हमलों से क्या नया संकट खड़ा हुआ?

ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने यमन के लाल सागर तट पर सरकार के नियंत्रण वाले मोखा बंदरगाह पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। यमन सरकार से जुड़े बलों के अनुसार हमले में चार सैनिकों और तीन नागरिकों समेत कम से कम सात लोगों की मौत हुई, जबकि 15 नागरिक घायल हुए। हमले में बंदरगाह की इमारतों, पियर, व्यावसायिक सामान और खाद्य सामग्री को नुकसान पहुंचा। हूतियों ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उनका निशाना सैन्य बल और गोदाम थे। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने सऊदी अरब के जिजान में अरामको रिफाइनरी को भी ड्रोन से निशाना बनाने का दावा किया। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने रिफाइनरी से जुड़ी एक सुविधा में आग लगने की पुष्टि की, लेकिन किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं दी। इन घटनाओं से यमन में 2022 के संघर्षविराम के बाद फिर गृहयुद्ध भड़कने की आशंका बढ़ गई है।

अमेरिका के हथियार भंडार पर युद्ध का क्या असर पड़ रहा है?

ईरान के साथ लंबे संघर्ष का असर अमेरिकी सैन्य हथियार भंडार पर भी पड़ रहा है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने हथियारों और गोला-बारूद की खरीद और उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, उद्देश्य युद्ध में तैनात सैनिकों को जरूरत के मुताबिक हथियार उपलब्ध कराना है। ईरान के साथ संघर्ष में उन्नत मिसाइल रोधी हथियारों के अमेरिकी भंडार पर दबाव बढ़ने की बात सामने आई है। इसका असर यूक्रेन और ताइवान जैसे अमेरिकी सहयोगियों पर भी पड़ सकता है, जो अमेरिका से सैन्य सहायता की उम्मीद रखते हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग ने हथियार उत्पादन बढ़ाने की प्रक्रिया को व्यापक सैन्य आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा बताया है, लेकिन मौजूदा युद्ध ने इसकी जरूरत को और ज्यादा महत्वपूर्ण बना दिया है।

क्या होर्मुज जल्द खुल सकता है और तेल आपूर्ति सामान्य होगी?

होर्मुज को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत से समुद्री यातायात बहाल होने की उम्मीद जरूर बनी है, लेकिन अभी इसे अंतिम समझौता नहीं माना जा सकता। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा है कि नए समुद्री रास्ते और कानूनी व्यवस्था पर सहमति के करीब पहुंच गए हैं। दूसरी तरफ अमेरिका की ओर से भी ईरान और ओमान के बीच बातचीत में प्रगति होने की बात कही गई है।



प्रस्तावित समझौते के तहत व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही बहाल होने पर ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी हटाने की संभावना बताई गई है। लेकिन ईरान ने होर्मुज खोलने के लिए अमेरिका से मुआवजे समेत कई शर्तें रखी हैं। इसलिए बातचीत में प्रगति के बावजूद सामान्य समुद्री आवाजाही कब पूरी तरह शुरू होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। होर्मुज तेल और प्राकृतिक गैस की वैश्विक आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है।

163 दिन की जंग के बाद सबसे बड़ा सवाल क्या?

पश्चिम एशिया में इस समय कई मोर्चे एक-दूसरे से जुड़ते जा रहे हैं। गाजा में इस्राइल और हमास के बीच स्थायी शांति का रास्ता नहीं निकला है। इस्राइल ने ट्रंप की 15 सूत्री योजना को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि हमास को पहले पूरी तरह निरस्त्र करना होगा। ईरान और अमेरिका के बीच सीधी बातचीत बंद है और तेहरान होर्मुज खोलने से पहले अमेरिकी कदमों और नुकसान की भरपाई की मांग कर रहा है। यमन में हूती हमलों ने लाल सागर और सऊदी अरब को भी संकट के दायरे में ला दिया है। दूसरी तरफ अमेरिका हथियार उत्पादन बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। यानी 163 दिन बाद भी युद्ध के खत्म होने का स्पष्ट रास्ता सामने नहीं आया है। हजारों मौतों और भारी तबाही के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कूटनीति इन सभी मोर्चों को शांत कर पाएगी या पश्चिम एशिया एक और लंबे और बड़े संघर्ष की ओर बढ़ेगा।

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