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ईरानी विदेश मंत्री की चेतावनी: पश्चिम एशिया में अब कुछ भी पहले जैसा नहीं रहेगा, इस्राइल को बताया युद्ध की वजह

Sun, 25 Oct 2026 03:47 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sun, 25 Oct 2026 03:47 PM IST
सार

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि पिछले डेढ़ साल के संघर्ष के बाद पश्चिम एशिया में कुछ भी पहले जैसा नहीं रहेगा। उन्होंने इस्राइल को युद्ध के लिए जिम्मेदार ठहराया और अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मौजूदगी पर सवाल उठाए। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी उन्होंने बड़ा बयान दिया। आखिर ईरान की इस चेतावनी के क्या मायने हैं? क्या विदेशी ताकतों की वापसी से क्षेत्र में शांति आ सकती है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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Abbas Araghchi Iranian Foreign Minister Warns West Asia Will Never Be the Same Again, Blames Israel for War
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्राइल पर क्या आरोप लगाए...? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

तेहरान में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि पिछले डेढ़ साल के संघर्ष के बाद पश्चिम एशिया के हालात पहले जैसे नहीं रहेंगे। उन्होंने इसके लिए इस्राइल को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि युद्ध दोबारा शुरू हो या नहीं, ईरान की नीतियों में बदलाव नहीं होगा। अराघची ने यह भी कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए विदेशी ताकतों की मौजूदगी खत्म होनी चाहिए।

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पश्चिम एशिया में अब क्या बदलने वाला है?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को तेहरान में आयोजित एक विशेष बैठक में पश्चिम एशिया के भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने पिछले डेढ़ साल के संघर्ष, खासकर अमेरिका और इस्राइल के सैन्य हमलों को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मोड़ बताया। अराघची के मुताबिक, इन घटनाओं के बाद क्षेत्र की सुरक्षा और राजनीतिक परिस्थितियां पहले जैसी नहीं रहेंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस्राइल बार-बार युद्ध को बढ़ावा देता है और क्षेत्रीय शांति स्थापित करने की कोशिशों में बाधा डालता है। उन्होंने साफ कहा कि युद्ध फिर शुरू हो या नहीं, ईरान अपनी नीतियों पर कायम रहेगा।
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अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर ईरान ने क्या कहा?
अराघची ने पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन ठिकानों से न तो उन देशों को सुरक्षा मिली है, जहां वे बनाए गए हैं और न ही दूसरे देशों को शांति मिली है। इसके उलट, ये ठिकाने असुरक्षा की वजह बन गए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान ऐसी पहल का समर्थन करता है, जिससे क्षेत्र के देश अपनी सुरक्षा के लिए अपनी क्षमताओं पर भरोसा कर सकें। विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए विदेशी ताकतों को पूरी तरह वापस जाना होगा। उनके अनुसार, ये ताकतें इस्राइल की रक्षा के लिए यहां मौजूद हैं और इनकी मौजूदगी से तनाव बढ़ता है।
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इस्राइल पर अराघची ने कौन से गंभीर आरोप लगाए?
अराघची ने दावा किया कि इस्राइल की भूमिका अब दुनिया के सामने आ चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस्राइल क्षेत्र में युद्ध भड़काने और पड़ोसी देशों को कमजोर करने की कोशिश करता है। उनके मुताबिक, इस्राइल बार-बार क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता कायम होने से रोकता है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के संघर्षों को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता। यदि किसी एक हिस्से में शांति हो, लेकिन दूसरे हिस्से में युद्ध जारी रहे, तो पूरे क्षेत्र में स्थिरता कायम नहीं हो सकती। उन्होंने अमेरिका के साथ बातचीत का जिक्र करते हुए बताया कि पाकिस्तान, कतर और अन्य पक्षों की मध्यस्थता में हुई बातचीत के दौरान ईरान ने सभी मोर्चों पर शत्रुता खत्म करने पर जोर दिया। उन्होंने चेताया कि ऐसा नहीं होने पर क्षेत्र में स्थायी शांति हासिल करना मुश्किल होगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य और समुद्री रास्ते पर क्या बोले?
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी अराघची ने अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह समुद्री रास्ता दशकों से खुला रहा है। उनके अनुसार, इसके तटीय देशों ईरान और ओमान ने समुद्री यातायात पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया, बल्कि सुरक्षा सुनिश्चित करने और समुद्री पर्यावरण की रक्षा करने के लिए काम किया है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यहां भी अब सब कुछ पहले जैसा नहीं रहेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री व्यापार और तेल की आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।


कमाल खराज्जी कौन थे और उनकी मौत कैसे हुई?
यह बैठक ईरान के दिवंगत राजनयिक कमाल खराज्जी के योगदान को याद करने के लिए भी आयोजित की गई थी। खराज्जी 1997 से 2005 तक ईरान के विदेश मंत्री रहे। इससे पहले उन्होंने 1989 से 1997 तक संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि के रूप में काम किया। वह विश्वविद्यालय के प्रोफेसर भी थे और अंतरराष्ट्रीय कानून, कई देशों के बीच सहयोग तथा विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के समर्थक थे। दी गई जानकारी के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 को तेहरान स्थित उनके आवास पर अमेरिका और इस्राइल ने संयुक्त हवाई हमला किया था। इस हमले में वह गंभीर रूप से घायल हुए और उनकी पत्नी की मौत हो गई। बाद में 9 अप्रैल को खराज्जी की भी मौत हो गई। बैठक में उनके राजनयिक योगदान को श्रद्धांजलि दी गई।

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