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मानवता के लिए बढ़ा खतरा: एआई बनाने वाली कंपनियां चेता रहीं, पर सरकारें बेफिक्र
Mon, 14 Sep 2026 05:40 AM IST
राकेश कुमार
द न्यूयॉर्क टाइम्स, सैन फ्रांसिस्को/वॉशिंगटन।
द न्यूयॉर्क टाइम्स, सैन फ्रांसिस्को/वॉशिंगटन।
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 14 Sep 2026 05:40 AM IST
सार
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच इसके संभावित खतरों को लेकर टेक कंपनियों में गंभीर बहस छिड़ गई है। एंथ्रोपिक, ओपनएआई समेत कई कंपनियां सुरक्षा उपायों की जरूरत पर जोर दे रही हैं। सैम ऑल्टमैन ने विकास की रफ्तार धीमी करने की संभावना जताई है। दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रंप एआई की दौड़ में चीन से अमेरिकी बढ़त बनाए रखने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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एआई का खतरा!
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
एंथ्रोपिक के शोधकर्ता जैकब कॉक्सन ने इसी हफ्ते एआई के लगातार बढ़ते खतरों का हवाला देते हुए कंपनी से इस्तीफा दे दिया। कॉक्सन का कहना है कि एआई एक बेहद घातक तकनीक है जो पूरी मानवता को खत्म कर सकती है। इसके साथ ही, शीर्ष टेक कंपनियों के भीतर एक बड़ी बहस छिड़ गई है। एंथ्रोपिक, ओपनएआई, मेटा और गूगल जैसी कंपनियां एआई के खतरों को लेकर आगाह भी करने लगी हैं। हालांकि, सरकारें ज्यादा गंभीर नजर नहीं आ रही।
दुनियाभर में एआई के सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा जोखिमों को घटाने के लिए नियम तो बनाए जा रहे हैं। लेकिन सरकारें इसके आर्थिक लाभों को भुनाने में पीछे नहीं रहना चाहतीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तो रविवार को यहां तक कह दिया कि उनका देश एआई के क्षेत्र में चीन से आगे है और वह इस बढ़त को बनाए रखना चाहते हैं। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और सरकारी एजेंसियों की ओर से सख्त नियम-कायदे बनाने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने हाल में अपने कर्मचारियों की एक बैठक में कहा कि वह अन्य प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के साथ मिलकर एआई के विकास की गति धीमी करने को तैयार है। जब तक सुरक्षा मानक तय नहीं हो जाते, तब तक खुद रफ्तार धीमी करने को एलन मस्क का भी का समर्थन मिला है।
एआई ताकतवर है या हमारा सोचने का तरीका गलत
क्या वाकई एआई ताकतवर होता जा रहा है या फिर इंसान के दिमाग की बनावट और सोचने का तरीका इसकी वजह है। इसे विशेषज्ञों की अलग-अलग राय से समझे...
इंसान को अनजान और नई चीजों का ज्यादा डर
हमारा दिमाग खतरों का अंदाजा आंकड़ों से नहीं, नियंत्रण के अहसास से लगाता है। लोग यह नहीं समझते कि एआई अंदर से कैसे काम करता है। नियंत्रण खोने के अहसास की वजह से लोगों में एआई का खौफ ज्यादा है। सड़क हादसों में रोज हजारों लोग मरते हैं, फिर भी हम कार चलाने से नहीं डरते। लेकिन हवाई जहाज के क्रैश होने का डर ज्यादा लगता है क्योंकि वहां हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता।
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अदृश्य खतरे तो पहले से ही मौजूद
वैज्ञानिकों का कहना है, दुनिया खत्म होने के वास्तविक गणित में एआई का डर अभी काफी पीछे है। लैब से किसी खतरनाक वायरस का लीक होना या प्राकृतिक महामारी फैलना (3% संभावना) एआई के बेकाबू होने से कहीं अधिक बड़ा और तात्कालिक खतरा है।
क्या बढ़ा-चढ़ाकर खतरा बता रहीं टेक कंपनियां
एआई से दुनिया खत्म होने के डर को टेक कंपनियों और कुछ लोगों की तरफ से बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की संभावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। जब लोग साइंस-फिक्शन फिल्मों की तरह एआई को एक खलनायक मान लेते हैं, तो एआई की असरदार और वास्तविक समस्याओं (जैसे साइबर फ्रॉड, डीपफेक, फर्जी जानकारी और नौकरियों पर असर) से ध्यान भटक जाता है।
जेम्स के. हैमिट (निदेशक, हार्वर्ड सेंटर फॉर रिस्क एनालिसिस) कहते हैं कि इंसानी दिमाग जोखिम का आकलन गणितीय संभावनाओं से नहीं, बल्कि नियंत्रण के अहसास से करता है। काम करने का तरीका समझ न आने पर नियंत्रण खोने का सामूहिक डर उत्पन्न होता है। जेम्स के. हैमिट यह भी कहते हैं इंसानी दिमाग जोखिम का आकलन गणितीय संभावनाओं से नहीं, बल्कि नियंत्रण के अहसास से करता है। काम करने का तरीका समझ न आने पर नियंत्रण खोने का सामूहिक डर उत्पन्न होता है।
एआई के कारण इंसानियत खत्म हो जाने के खतरे को कैसे समझें
टेक कंपनियां जिस तरह के खतरे को लेकर आगाह कर रही हैं, आखिर उसका मतलब क्या है? इसे ऐसे समझ सकते हैं कि अगर एआई बेकाबू हो जाए तो ऐसे महाविनाश का कारण बन सकता है जिससे संपूर्ण मानव जाति का अस्तित्व ही मिट जाए, या फिर हमारी सभ्यता इस हद तक तबाह हो जाए कि उसका उबरना असंभव हो।
मशीनों के आगे कैसे बेबस हो सकता है इंसान: परमाणु मिसाइल के ट्रिगर, ड्रोन और भोजन-दवाओं जैसे जीवनरक्षक संसाधनों का अंतिम नियंत्रण अचानक मशीनों के हाथ में चला जाए, तो इंसान बेबस हो सकता है। यह स्थिति बिना किसी युद्ध के भी इंसानियत को मिटा सकती है।
कैसे बड़ा खतरा बन सकता है बेकाबू एल्गोरिदम
यदि कोई एआई मॉडल सुरक्षा दायरों को तोड़ दे, तो ऐसा नया सिंथेटिक वायरस या पैथोजन डिजाइन कर सकता है जिसका कोई इलाज न हो। यह कोरोना या एंथ्रैक्स से कई गुना ज्यादा घातक हो सकता है।
एआई किसी गंभीर बग में चपेट में आकर खुद ही परमाणु मिसाइलें लॉन्च कर सकता है। इससे कई देशों में तबाही मच सकती है। nसुपर-इंटेलिजेंट एआई पूरे वैश्विक ग्रिड, सैटेलाइट नेटवर्क, जल आपूर्ति प्रणालियों और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को हैक करके एक साथ बंद कर सकता है। nहाइपर-रियलिस्टिक डीपफेक, फेक न्यूज और स्वचलित बॉट्स के जरिए एआई देशों के बीच तनाव पैदा कर सकता है।
विकास धीमा करना मुश्किल
कंपनियों के लिए एआई के विकास को धीमा करना काफी मुश्किल काम है। अब जब शीर्ष टेक कंपनियां अगले एक साल के भीतर इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ लाने की योजना बना रही हैं। उन पर विकास गति और मुनाफे को प्राथमिकता देने का दबाव है। उन्हें यह आशंका भी है कि यदि मिलकर विकास को धीमा करती हैं, तो प्रतिस्पर्धा-विरोधी नियमों के उल्लंघन के आरोप लग सकते हैं। यही नहीं, नए मॉडल्स इतने जटिल हैं कि इंसानों के लिए सीधे उनकी निगरानी करना संभव नहीं है। एआई खुद आपस में मिलीभगत करके अपने चैट लॉग्स छिपाने लगते हैं।
ट्रंप व ओबामा की राय जुदा
मानव विलुप्ति का खतरा नहीं : ट्रंप से जब पूछा गया कि क्या एआई से मानव जाति के विलुप्त होने का खतरा है, तो उन्होंने इसे नकार दिया। उन्होंने कहा, मेरी चिंता ये हे कि अगर हम एआई की दौड़ में नहीं जीते, तो बहुत पीछे रह जाएंगे।
डेमोक्रेट्स निगरानी एजेंडा बनाएं : पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक कार्यक्रम में एआई के खतरों के प्रति आगाह करते हुए डेमोक्रेटिक पार्टी से आने वाले वर्षों में इस मुद्दे को प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने इस पर तत्काल राजनीतिक और प्रशासनिक एजेंडा बनाने का आग्रह किया।
सुरक्षा उपाय ही समाधान: एआई बेकाबू हो, तो उसे तुरंत बंद करने का तंत्र होना चाहिए। सुनामी या मिसाइल हमलों के लिए पहले से चेतावनी देने वाले सिस्टम की तरह खतरनाक एआई मॉडल्स और जैविक वायरस की टेस्टिंग के लिए कड़े अंतरराष्ट्रीय नियम होने चाहिए।
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दुनियाभर में एआई के सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा जोखिमों को घटाने के लिए नियम तो बनाए जा रहे हैं। लेकिन सरकारें इसके आर्थिक लाभों को भुनाने में पीछे नहीं रहना चाहतीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तो रविवार को यहां तक कह दिया कि उनका देश एआई के क्षेत्र में चीन से आगे है और वह इस बढ़त को बनाए रखना चाहते हैं। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और सरकारी एजेंसियों की ओर से सख्त नियम-कायदे बनाने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने हाल में अपने कर्मचारियों की एक बैठक में कहा कि वह अन्य प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के साथ मिलकर एआई के विकास की गति धीमी करने को तैयार है। जब तक सुरक्षा मानक तय नहीं हो जाते, तब तक खुद रफ्तार धीमी करने को एलन मस्क का भी का समर्थन मिला है।
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एआई ताकतवर है या हमारा सोचने का तरीका गलत
क्या वाकई एआई ताकतवर होता जा रहा है या फिर इंसान के दिमाग की बनावट और सोचने का तरीका इसकी वजह है। इसे विशेषज्ञों की अलग-अलग राय से समझे...
इंसान को अनजान और नई चीजों का ज्यादा डर
हमारा दिमाग खतरों का अंदाजा आंकड़ों से नहीं, नियंत्रण के अहसास से लगाता है। लोग यह नहीं समझते कि एआई अंदर से कैसे काम करता है। नियंत्रण खोने के अहसास की वजह से लोगों में एआई का खौफ ज्यादा है। सड़क हादसों में रोज हजारों लोग मरते हैं, फिर भी हम कार चलाने से नहीं डरते। लेकिन हवाई जहाज के क्रैश होने का डर ज्यादा लगता है क्योंकि वहां हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता।
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अदृश्य खतरे तो पहले से ही मौजूद
वैज्ञानिकों का कहना है, दुनिया खत्म होने के वास्तविक गणित में एआई का डर अभी काफी पीछे है। लैब से किसी खतरनाक वायरस का लीक होना या प्राकृतिक महामारी फैलना (3% संभावना) एआई के बेकाबू होने से कहीं अधिक बड़ा और तात्कालिक खतरा है।
क्या बढ़ा-चढ़ाकर खतरा बता रहीं टेक कंपनियां
एआई से दुनिया खत्म होने के डर को टेक कंपनियों और कुछ लोगों की तरफ से बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की संभावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। जब लोग साइंस-फिक्शन फिल्मों की तरह एआई को एक खलनायक मान लेते हैं, तो एआई की असरदार और वास्तविक समस्याओं (जैसे साइबर फ्रॉड, डीपफेक, फर्जी जानकारी और नौकरियों पर असर) से ध्यान भटक जाता है।
जेम्स के. हैमिट (निदेशक, हार्वर्ड सेंटर फॉर रिस्क एनालिसिस) कहते हैं कि इंसानी दिमाग जोखिम का आकलन गणितीय संभावनाओं से नहीं, बल्कि नियंत्रण के अहसास से करता है। काम करने का तरीका समझ न आने पर नियंत्रण खोने का सामूहिक डर उत्पन्न होता है। जेम्स के. हैमिट यह भी कहते हैं इंसानी दिमाग जोखिम का आकलन गणितीय संभावनाओं से नहीं, बल्कि नियंत्रण के अहसास से करता है। काम करने का तरीका समझ न आने पर नियंत्रण खोने का सामूहिक डर उत्पन्न होता है।
एआई के कारण इंसानियत खत्म हो जाने के खतरे को कैसे समझें
टेक कंपनियां जिस तरह के खतरे को लेकर आगाह कर रही हैं, आखिर उसका मतलब क्या है? इसे ऐसे समझ सकते हैं कि अगर एआई बेकाबू हो जाए तो ऐसे महाविनाश का कारण बन सकता है जिससे संपूर्ण मानव जाति का अस्तित्व ही मिट जाए, या फिर हमारी सभ्यता इस हद तक तबाह हो जाए कि उसका उबरना असंभव हो।
मशीनों के आगे कैसे बेबस हो सकता है इंसान: परमाणु मिसाइल के ट्रिगर, ड्रोन और भोजन-दवाओं जैसे जीवनरक्षक संसाधनों का अंतिम नियंत्रण अचानक मशीनों के हाथ में चला जाए, तो इंसान बेबस हो सकता है। यह स्थिति बिना किसी युद्ध के भी इंसानियत को मिटा सकती है।
कैसे बड़ा खतरा बन सकता है बेकाबू एल्गोरिदम
यदि कोई एआई मॉडल सुरक्षा दायरों को तोड़ दे, तो ऐसा नया सिंथेटिक वायरस या पैथोजन डिजाइन कर सकता है जिसका कोई इलाज न हो। यह कोरोना या एंथ्रैक्स से कई गुना ज्यादा घातक हो सकता है।
एआई किसी गंभीर बग में चपेट में आकर खुद ही परमाणु मिसाइलें लॉन्च कर सकता है। इससे कई देशों में तबाही मच सकती है। nसुपर-इंटेलिजेंट एआई पूरे वैश्विक ग्रिड, सैटेलाइट नेटवर्क, जल आपूर्ति प्रणालियों और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को हैक करके एक साथ बंद कर सकता है। nहाइपर-रियलिस्टिक डीपफेक, फेक न्यूज और स्वचलित बॉट्स के जरिए एआई देशों के बीच तनाव पैदा कर सकता है।
विकास धीमा करना मुश्किल
कंपनियों के लिए एआई के विकास को धीमा करना काफी मुश्किल काम है। अब जब शीर्ष टेक कंपनियां अगले एक साल के भीतर इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ लाने की योजना बना रही हैं। उन पर विकास गति और मुनाफे को प्राथमिकता देने का दबाव है। उन्हें यह आशंका भी है कि यदि मिलकर विकास को धीमा करती हैं, तो प्रतिस्पर्धा-विरोधी नियमों के उल्लंघन के आरोप लग सकते हैं। यही नहीं, नए मॉडल्स इतने जटिल हैं कि इंसानों के लिए सीधे उनकी निगरानी करना संभव नहीं है। एआई खुद आपस में मिलीभगत करके अपने चैट लॉग्स छिपाने लगते हैं।
ट्रंप व ओबामा की राय जुदा
मानव विलुप्ति का खतरा नहीं : ट्रंप से जब पूछा गया कि क्या एआई से मानव जाति के विलुप्त होने का खतरा है, तो उन्होंने इसे नकार दिया। उन्होंने कहा, मेरी चिंता ये हे कि अगर हम एआई की दौड़ में नहीं जीते, तो बहुत पीछे रह जाएंगे।
डेमोक्रेट्स निगरानी एजेंडा बनाएं : पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक कार्यक्रम में एआई के खतरों के प्रति आगाह करते हुए डेमोक्रेटिक पार्टी से आने वाले वर्षों में इस मुद्दे को प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने इस पर तत्काल राजनीतिक और प्रशासनिक एजेंडा बनाने का आग्रह किया।
सुरक्षा उपाय ही समाधान: एआई बेकाबू हो, तो उसे तुरंत बंद करने का तंत्र होना चाहिए। सुनामी या मिसाइल हमलों के लिए पहले से चेतावनी देने वाले सिस्टम की तरह खतरनाक एआई मॉडल्स और जैविक वायरस की टेस्टिंग के लिए कड़े अंतरराष्ट्रीय नियम होने चाहिए।