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अमेरिका का कर्ज 40 खरब डॉलर के पार: ट्रंप की नीतियों से कितना बढ़ा, ईरान युद्ध और टैक्स कटौती कितनी जिम्मेदार?

Fri, 21 Aug 2026 05:45 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 21 Aug 2026 05:45 AM IST
सार

अमेरिका का कुल राष्ट्रीय कर्ज 40 खरब डॉलर के पार पहुंच गया है। बढ़ते सैन्य खर्च, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, टैक्स कटौतियों और ईरान युद्ध के खर्च ने वित्तीय दबाव बढ़ाया है। ट्रंप प्रशासन खर्च घटाने का दावा भी कर चुका है, लेकिन कर्ज पर खास असर नहीं पड़ा। अब सवाल है कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बढ़ते कर्ज को कैसे संभालेगी और क्या इसका असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था की साख पर पड़ेगा? आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं...

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America Debt Crosses 40 Trillion dollar How Much Are Trump’s Policies, Iran War and Tax Cuts Responsible?
क्या ब्याज का बढ़ता बोझ अमेरिका को कर्ज के जाल में फंसा रहा है? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका का कुल राष्ट्रीय कर्ज बुधवार को 40 खरब डॉलर के पार पहुंच गया। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल अमेरिका के लिए यह सिर्फ आर्थिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि बढ़ते वित्तीय दबाव का संकेत भी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय कर्ज खत्म करने का वादा किया था, लेकिन कर्ज लगातार बढ़ता गया। अब उनके दूसरे कार्यकाल में यह उस समय के मुकाबले करीब दोगुना हो चुका है। बढ़ते कर्ज ने अमेरिकी सरकार के सामने खर्च और आय के बीच संतुलन बनाने की चुनौती बढ़ा दी है।
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क्या ईरान युद्ध ने अमेरिका की वित्तीय मुश्किल बढ़ाई?
अमेरिकी कर्ज बढ़ने के पीछे कई पुराने और नए कारण हैं। इनमें लंबे समय से जारी भारी सैन्य खर्च, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर बढ़ता खर्च शामिल है। इसके अलावा 2025 में लागू टैक्स कटौतियों से सरकारी राजस्व पर भी दबाव पड़ा। ईरान युद्ध और उससे जुड़े सैन्य अभियानों ने इस बोझ को और बढ़ाया है। दी गई जानकारी के अनुसार, अकेले इस साल अमेरिका को अपनी देनदारियां पूरी करने के लिए दो खरब डॉलर से ज्यादा का कर्ज लेना पड़ रहा है। चिंता की बात यह है कि कुल घाटे का करीब आधा हिस्सा निवेशकों को दिए जाने वाले ब्याज में जा रहा है।
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क्या ब्याज का बढ़ता बोझ अमेरिका को कर्ज के जाल में फंसा रहा?
बढ़ते कर्ज के साथ उसका ब्याज भी सरकार के लिए बड़ी समस्या बनता जा रहा है। पुराने कर्ज पर निवेशकों को ब्याज देना पड़ता है और कर्ज बढ़ने के साथ यह खर्च भी बढ़ता जाता है। इससे सरकार के पास दूसरे जरूरी कामों के लिए उपलब्ध पैसा सीमित हो सकता है। दी गई जानकारी के मुताबिक, कमेटी फॉर ए रिस्पांसिबल फेडरल बजट के वरिष्ठ नीति निदेशक मार्क गोल्डवेन ने चेतावनी दी कि अमेरिका कर्ज के जाल में फंसता नजर आ रहा है। उनके अनुसार, कर्ज कम करने में नीति निर्माताओं की असमर्थता लंबे समय का जोखिम बढ़ा रही है।
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ट्रंप का दक्षता विभाग कर्ज कम करने में क्यों नाकाम रहा?
ट्रंप ने सत्ता में लौटने के बाद सरकारी खर्च कम करने के लिए एलन मस्क के नेतृत्व में सरकारी दक्षता विभाग बनाया था। इसका लक्ष्य सरकारी खर्च में एक खरब डॉलर तक की कटौती करना था। हालांकि, दिए गए विवरण के अनुसार यह विभाग बचत के मामले में अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं कर सका। स्थिति इसलिए भी कठिन है क्योंकि चुनाव नजदीक आने के कारण सरकार के लिए बड़े और कड़े फैसले लेना राजनीतिक रूप से मुश्किल हो सकता है। ऐसे में खर्च घटाने और कर्ज नियंत्रित करने की चुनौती बनी हुई है।

अमेरिका आखिर इतना बड़ा कर्ज लेता कहां से?
अमेरिकी सरकार अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकारी बॉन्ड और नोट्स जैसे वित्तीय साधन बेचती है। जब सरकार का खर्च टैक्स से मिलने वाले राजस्व से ज्यादा हो जाता है, तब वह निवेशकों से कर्ज लेती है। अमेरिकी वित्त विभाग इन प्रतिभूतियों के जरिये पैसा जुटाता है। यानी अमेरिका का कर्ज मुख्य रूप से उन निवेशकों और संस्थानों से आता है जो उसके सरकारी बॉन्ड खरीदते हैं। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का तर्क है कि अभी लिया जा रहा कर्ज भविष्य में उत्पादक साबित होगा। हालांकि, बाजार में इस रणनीति को लेकर चिंता बनी हुई है।

कर्ज बढ़ने में टैक्स कटौती की कितनी भूमिका?
अमेरिकी सरकार के राजस्व में टैक्स एक बड़ा स्रोत है। लेकिन 2025 में लागू टैक्स कटौतियों से सरकार को मिलने वाला राजस्व घटा है। दूसरी तरफ सरकारी खर्च लगातार बढ़ रहा है। इस अंतर को पूरा करने के लिए सरकार को ज्यादा कर्ज लेना पड़ रहा है। इसके अलावा स्वास्थ्य कार्यक्रमों और सामाजिक सुरक्षा पर बढ़ता खर्च भी वित्तीय दबाव बढ़ा रहा है। ऐसे में सरकार के सामने एक तरफ आम लोगों और कारोबारियों पर टैक्स का बोझ कम रखने की चुनौती है तो दूसरी तरफ बढ़ते घाटे और कर्ज को नियंत्रित करने का दबाव है।

टैरिफ से राजस्व जुटाने की योजना पर क्या हुआ?
ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ के जरिये भी सरकार के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाने की योजना बनाई थी। लेकिन दिए गए विवरण के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने इन टैरिफ को अवैध करार दिया। इसके बाद अमेरिका को कंपनियों को करीब 160 अरब डॉलर वापस करने पड़े। इससे सरकार की राजस्व बढ़ाने की योजना को झटका लगा। वहीं सैन्य अभियानों, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य योजनाओं और पुराने कर्ज के ब्याज का खर्च बना हुआ है। यानी सरकार के सामने खर्च बढ़ने और आय पर दबाव दोनों समस्याएं एक साथ खड़ी हैं।


क्या बढ़ता कर्ज अमेरिका की आर्थिक साख के लिए खतरा?
अमेरिका अभी भी दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और उसके सरकारी बॉन्ड को वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन कर्ज लगातार बढ़ता रहा तो ब्याज भुगतान का बोझ सरकार की वित्तीय क्षमता को प्रभावित कर सकता है। इससे लंबे समय में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की साख पर भी सवाल उठ सकते हैं। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अमेरिका सैन्य और सामाजिक खर्च जारी रखते हुए राजस्व बढ़ाए और कर्ज की रफ्तार को नियंत्रित करे। अगर ऐसा नहीं हुआ तो बढ़ता कर्ज आने वाले वर्षों में अमेरिका के लिए बड़ा आर्थिक और राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
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