Explainer: टेक दिग्गज अपने बच्चों को सोशल मीडिया से क्यों रखते हैं दूर, दूसरों पर क्या हो रहा असर?
टेक दिग्गज खुद अपने बच्चों का सोशल मीडिया और स्क्रीन इस्तेमाल सीमित रखते हैं, जबकि दुनियाभर में बच्चों पर इसके मानसिक स्वास्थ्य, नींद, ध्यान और साइबर बुलिंग जैसे असर सामने आ रहे हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार समस्याग्रस्त सोशल मीडिया इस्तेमाल बढ़ रहा है। इसी चिंता के चलते कई देश बच्चों के लिए उम्र सीमा तय कर रहे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सोशल मीडिया और डिजिटल तकनीक ने हमारी जिंदगी को आसान और तेज बनाया है। लेकिन इस तकनीक की दुनिया के बड़े नाम अपने बच्चों के मामले में इसके इस्तेमाल को सीमित रखने की कोशिश करते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जिन लोगों ने डिजिटल दुनिया को इतना बड़ा बनाया, वे अपने बच्चों को इससे क्यों दूर रखना चाहते हैं? क्या सोशल मीडिया बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार को प्रभावित कर रहा है? विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े क्या कहते हैं? दुनिया के कई देश बच्चों के लिए सोशल मीडिया की उम्र सीमा तय करने की ओर क्यों बढ़ रहे हैं? इन प्लेटफॉर्मस पर कब-कब ऐसे मामले देखने को मिले हैं? भारत इस दिशा में क्या कर रहा है?
टेक दिग्गज अपने बच्चों को स्क्रीन से क्यों रखते हैं दूर?
मेटा के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग ने कहा था कि वह नहीं चाहते कि उनके बच्चे लंबे समय तक टीवी या कंप्यूटर के सामने बैठे रहें। उनके अनुसार लोगों के साथ बातचीत करना अच्छी बात है, लेकिन लगातार एक वीडियो से दूसरे वीडियो पर जाना उतना सकारात्मक नहीं है।
फेसबुक के शुरुआती निवेशक पीटर थील ने 2024 में बताया था कि उनके साढ़े तीन और पांच साल के बच्चों का स्क्रीन समय सप्ताह में केवल डेढ़ घंटे यानी 90 मिनट था।
माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने अपने बच्चों को 14 साल की उम्र तक मोबाइल फोन नहीं दिया। गूगल के प्रमुख सुंदर पिचाई ने बताया था कि उनका 11 साल का बेटा भी फोन इस्तेमाल नहीं करता था। एप्पल के प्रमुख टिम कुक ने कहा था कि वह अपने भतीजे को सोशल नेटवर्क से दूर रखते हैं।
स्नैप के प्रमुख इवान स्पीगल ने भी अपने बच्चों के स्क्रीन इस्तेमाल को सीमित रखने की बात कही थी। 2018 में उन्होंने अपने सात साल के बच्चे के लिए सप्ताह में केवल 90 मिनट स्क्रीन समय की बात कही थी। बाद में उन्होंने बताया कि उनके दो साल के बच्चे का स्क्रीन समय लगभग शून्य था और छह-सात साल के बच्चे कभी-कभार फिल्म देखते थे, लेकिन फोन इस्तेमाल नहीं करते थे।
क्या समस्या सिर्फ स्क्रीन टाइम की है?
बच्चों के लिए चिंता केवल इस बात की नहीं है कि वे कितने घंटे स्क्रीन देखते हैं, बल्कि यह भी है कि वे स्क्रीन पर क्या देख रहे हैं और उसका उनके व्यवहार पर क्या असर पड़ रहा है।
यूट्यूब के सह-संस्थापक स्टीव चेन ने छोटे वीडियो को लेकर चिंता जताई थी। उनका डर था कि लगातार छोटे-छोटे वीडियो देखने से बच्चों की लंबी सामग्री पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
ब्रिटिश विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं की मई में जारी रिपोर्ट में भी छोटे बच्चों के लिए डिजिटल स्क्रीन को लेकर चिंता जताई गई। रिपोर्ट के अनुसार शिशुओं के लिए डिजिटल स्क्रीन के लाभ सीमित हैं, जबकि शारीरिक, संज्ञानात्मक, सामाजिक और भावनात्मक विकास पर संभावित जोखिम ज्यादा हो सकते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े क्या कहते हैं?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के यूरोप क्षेत्रीय कार्यालय के अध्ययन में 2022 में 44 देशों और क्षेत्रों के करीब 2 लाख 80 हजार बच्चों को शामिल किया गया। इनमें 11, 13 और 15 साल के बच्चे थे। अध्ययन के मुताबिक किशोरों में समस्याग्रस्त सोशल मीडिया इस्तेमाल की दर 2018 के 7 प्रतिशत से बढ़कर 2022 में 11 प्रतिशत हो गई।
- लड़कियां: 13 प्रतिशत
- लड़के: 9 प्रतिशत
यानी लड़कियों में समस्याग्रस्त सोशल मीडिया इस्तेमाल की दर लड़कों से चार प्रतिशत अंक अधिक रही।
समस्याग्रस्त सोशल मीडिया इस्तेमाल क्या होता है?
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, समस्या केवल ज्यादा समय तक सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की नहीं है। समस्या तब मानी जाती है जब बच्चे का अपने इस्तेमाल पर नियंत्रण कम होने लगे। इसके संकेत हैं:
- सोशल मीडिया इस्तेमाल करने का समय नियंत्रित न कर पाना।
- इस्तेमाल नहीं करने पर बेचैनी महसूस होना।
- दूसरी गतिविधियों की जगह सोशल मीडिया को प्राथमिकता देना।
- अत्यधिक इस्तेमाल के कारण रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होना।
बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर?
राष्ट्रीय चिकित्सा पुस्तकालय में प्रकाशित समीक्षा के मुताबिक ज्यादा सोशल मीडिया इस्तेमाल को बच्चों में चिंता, अवसाद और खराब नींद जैसी समस्याओं से जोड़ा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 8 से 12 साल के करीब 70 प्रतिशत बच्चे सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। वहीं 9 से 12 साल के बच्चे रोज औसतन 1.5 घंटे सोशल प्लेटफॉर्म पर बिताते हैं।
एक अन्य विश्लेषण में पाया गया कि सोशल मीडिया पर रोज दो घंटे से ज्यादा समय बिताने वाले बच्चों में कम इस्तेमाल करने वाले बच्चों की तुलना में चिंता और अवसाद के लक्षणों का जोखिम अधिक पाया गया। सोने से पहले सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से नींद में परेशानी हो सकती है और नींद की गड़बड़ी आगे चलकर चिंता के लक्षणों से जुड़ सकती है। हालांकि शोधों में सोशल मीडिया इस्तेमाल और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के बीच संबंध पाया गया है, लेकिन हर मामले में सोशल मीडिया को सीधे कारण के रूप में स्थापित नहीं किया गया है।
किशोरों में साइबर बुलिंग का खतरा कितना बढ़ा?
- डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक, 15 प्रतिशत किशोर साइबर बुलिंग का शिकार हुए।
- लड़कियों में यह आंकड़ा 16 प्रतिशत और लड़कों में 15 प्रतिशत रहा।
- 2018 से 2022 के बीच लड़कियों में साइबर बुलिंग 13 प्रतिशत से बढ़कर 16 प्रतिशत, जबकि लड़कों में 12 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत हो गई।
- वहीं, 12 प्रतिशत किशोरों ने माना कि उन्होंने किसी दूसरे व्यक्ति को साइबर बुली किया। इनमें लड़के 14 प्रतिशत और लड़कियां 9 प्रतिशत थीं।
सोशल मीडिया कंपनियों पर कब-कब और किस मामले में केस हुए?
- दिसंबर 2023 में न्यू मैक्सिको ने मेटा पर मामला दर्ज किया। आरोप था कि फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप पर बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए और मंचों की सुरक्षा को लेकर लोगों को गुमराह किया गया।
- मार्च 2026 में न्यू मैक्सिको मामले में मेटा पर 37.5 करोड़ डॉलर का नागरिक जुर्माना लगाया गया।
- मार्च 2026 में लॉस एंजिलिस के एक मामले में जूरी ने मेटा को 42 लाख डॉलर और गूगल को 18 लाख डॉलर का हर्जाना देने का आदेश दिया। मामले में कम उम्र से सोशल मीडिया इस्तेमाल के कारण मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का आरोप लगाया गया था।
- जुलाई 2026 में फ्लोरिडा के एक 15 वर्षीय किशोर ने मेटा, यूट्यूब, स्नैपचैट और टिकटॉक पर सोशल मीडिया इस्तेमाल से अवसाद और चिंता जैसी परेशानियां होने का आरोप लगाया। बाद में यूट्यूब, टिकटॉक और स्नैपचैट से समझौता होने के बाद उसने मेटा के खिलाफ भी दावा वापस ले लिया।
- अगस्त 2026 में न्यू मैक्सिको की अदालत ने मेटा को 56.7 करोड़ डॉलर और देने का आदेश दिया। इससे इस मामले में मेटा की कुल वित्तीय देनदारी 94.2 करोड़ डॉलर से ज्यादा हो गई।
- अगस्त 2026 में अमेरिका के 29 राज्यों ने मेटा के खिलाफ मामला शुरू किया। आरोप है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम को बच्चों और किशोरों को ज्यादा समय तक जोड़े रखने के लिए डिजाइन किया गया और इससे मानसिक स्वास्थ्य पर नुकसान हुआ। यह मामला अभी चल रहा है।
- अगस्त 2026 में टिकटॉक ने तीन किशोरों के मामलों में गोपनीय समझौता किया। ये मामले करीब 3,300 मुकदमों के समूह का हिस्सा थे।
दुनिया के कई देश बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर क्या कर रहे?
बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर कई देशों ने उम्र आधारित प्रतिबंध लागू किए हैं या कानून बनाने की प्रक्रिया में हैं।
- ऑस्ट्रेलिया: दिसंबर 2025 से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध है।
- ब्राजील: 16 साल से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं के खातों को माता-पिता के खातों से जोड़ने और उम्र की पुष्टि करने की व्यवस्था की गई है।
- चीन: 2019 से नाबालिगों के डिजिटल इस्तेमाल पर प्रतिबंध बढ़ाए गए हैं।
- इंडोनेशिया: 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध है।
- मलेशिया: 16 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रमुख मंचों से दूर रखने की व्यवस्था लागू हुई है।
- तुर्की: 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने वाला कानून पारित किया गया है।
- संयुक्त अरब अमीरात: 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंध की घोषणा की गई है।
यूरोप में भी कई देश इसी दिशा में बढ़ रहे हैं। ग्रीस ने 1 जनवरी 2027 से 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने की योजना बनाई है। ऑस्ट्रिया 14 साल से कम और स्लोवेनिया 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंध पर काम कर रहे हैं।
ब्रिटेन 2027 की शुरुआत तक 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने की दिशा में काम कर रहा है। कनाडा भी न्यूनतम उम्र 16 साल करने पर विचार कर रहा है। फ्रांस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने का प्रस्ताव संसद में है। पुर्तगाल 16 साल की उम्र तक सोशल मीडिया मंचों तक स्वतंत्र पहुंच रोकने पर विचार कर रहा है। स्पेन ने सोशल मीडिया पर पंजीकरण की न्यूनतम उम्र 14 से बढ़ाकर 16 साल करने का प्रस्ताव रखा है। इटली में भी 15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक संबंधी कानून पर विचार चल रहा है।
भारत में क्या स्थिति है?
भारत में अभी बच्चों के लिए सोशल मीडिया की कोई अलग राष्ट्रीय उम्र सीमा लागू नहीं है। हालांकि, सरकार ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए हैं।
- आईटी नियम, 2021 के तहत बच्चों के लिए हानिकारक और गैरकानूनी सामग्री पर कार्रवाई की व्यवस्था है।
- डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 में बच्चों के डेटा के इस्तेमाल के लिए अभिभावक की सहमति जरूरी है।
- सरकार ने ऑनलाइन बाल यौन शोषण और साइबर अपराधों से निपटने के लिए भी व्यवस्था मजबूत की है।
- सीबीएसई और एनसीईआरटी के माध्यम से स्कूलों में साइबर सुरक्षा और डिजिटल जागरूकता पर जोर दिया जा रहा है।
- सरकार दूसरे देशों में लागू उम्र सीमा और नियमों का अध्ययन कर भारत के मौजूदा ढांचे की समीक्षा कर रही है।