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बांग्लादेश: हिरासत में एक और आवामी लीग नेता की मौत, अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में तोड़ा दम
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: लव गौर
Updated Mon, 16 Feb 2026 03:29 PM IST
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सार
Bangladesh News: बांग्लादेश में शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग के नेताओं की न्यायिक हिरासत में मौत के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। 60 वर्षीय शमीकुल इस्लाम की गाइबांधा जिला जेल में हिरासत में मौत हो गई।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बांग्लादेश में आम चुनाव के परिणाम आ चुके है। एक दिन बाद यानी 17 फरवरी को प्रधानमंत्री के रूप में तारिक रहमान शपथ लेने जा रहे हैं। इस बीच बांग्लादेश में अवामी लीग के सदस्यों की हिरासत में मौत के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हालिया घटना में आवामी लीग के एक 60 वर्षीय नेता की मौत हो गई।
ताजा मामले में अवामी लीग के एक नेता की गाइबांधा जिला जेल में हिरासत में मौत हो गई। 60 साल के अवामी लीग के नेता का नाम शमीकुल इस्लाम है, जो कि पलाशबाड़ी उपजिला के अवामी लीग के अध्यक्ष थे। बताया जा रहा है कि वे गंभीर रूप से बीमार पड़ गए और रविवार को रंगपुर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल ले जाते वक्त उनकी मौत हो गई।
रास्ते में ही नेता ने तोड़ा दम
वहीं घटना की पुष्टि करते हुए गाइबांधा जिला जेल के प्रमुख मोहम्मद अतीकुर रहमान ने बताया कि अवामी लीग नेता को पहले सदर अस्पताल ले जाया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए रंगपुर रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। गाइबांधा जेल के सूत्रों के हवाले से बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार ने बताया कि 5 अगस्त, 2024 को अवामी लीग की सरकार के सत्ता से हटने के बाद शमीकुल के खिलाफ कई केस दर्ज किए गए थे।
उन्हें उसी साल 8 दिसंबर को ढाका में एक केस में गिरफ्तार किया गया था और वे लंबे समय तक जेल में रहे।हालांकि बाद में जमानत मिलने के बावजूद उन्हें कथित तौर पर एक अन्य केस में फिर गिरफ्तार किया गया और पिछले साल जेल भेज दिया गया।
आवामी लीग के नेताओं की लगातार मौत
इस घटना ने बांग्लादेश की जेलों में अवामी लीग के नेताओं और समर्थकों की हिरासत में मौतों की बढ़ती संख्या में इजाफा कर दिया है, जिससे मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के समय में राजनीतिक दमन और लक्षित कार्रवाई के आरोप तेज हो गए हैं।
इससे पहले स्थानीय मीडिया ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से जानकारी दी थी कि सात फरवरी को बांग्लादेश के पूर्व मंत्री और अवामी लीग के वरिष्ठ नेता रमेश चंद्र सेन की दिनाजपुर जिला जेल में पुलिस हिरासत में बीमार पड़ने के बाद मौत हो गई थी। वह पहले जल संसाधन मंत्री रह चुके थे और ठाकुरगांव-1 (सदर उपजिला) सीट से सांसद थे। उन्हें दिनाजपुर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के इमरजेंसी में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया था।
ये भी पढ़ें: तारिक रहमान के भव्य शपथ ग्रहण की तैयारी: भारत से ओम बिरला जाएंगे, दुनियाभर से जुटेंगे 1200 मेहमान; जानिए सबकुछ
वहीं अवामी लीग लगातार आरोप लगा रही है कि बांग्लादेशी अधिकारी राजनीतिक विरोधियों को खत्म करने के लिए जेलों को मूक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। पार्टी ने कहा था कि जेल अधिकारियों ने इसे 'प्राकृतिक मृत्यु' कहा है, लेकिन सच्चाई बिल्कुल अलग है।
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रास्ते में ही नेता ने तोड़ा दम
वहीं घटना की पुष्टि करते हुए गाइबांधा जिला जेल के प्रमुख मोहम्मद अतीकुर रहमान ने बताया कि अवामी लीग नेता को पहले सदर अस्पताल ले जाया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए रंगपुर रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। गाइबांधा जेल के सूत्रों के हवाले से बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार ने बताया कि 5 अगस्त, 2024 को अवामी लीग की सरकार के सत्ता से हटने के बाद शमीकुल के खिलाफ कई केस दर्ज किए गए थे।
उन्हें उसी साल 8 दिसंबर को ढाका में एक केस में गिरफ्तार किया गया था और वे लंबे समय तक जेल में रहे।हालांकि बाद में जमानत मिलने के बावजूद उन्हें कथित तौर पर एक अन्य केस में फिर गिरफ्तार किया गया और पिछले साल जेल भेज दिया गया।
आवामी लीग के नेताओं की लगातार मौत
इस घटना ने बांग्लादेश की जेलों में अवामी लीग के नेताओं और समर्थकों की हिरासत में मौतों की बढ़ती संख्या में इजाफा कर दिया है, जिससे मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के समय में राजनीतिक दमन और लक्षित कार्रवाई के आरोप तेज हो गए हैं।
इससे पहले स्थानीय मीडिया ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से जानकारी दी थी कि सात फरवरी को बांग्लादेश के पूर्व मंत्री और अवामी लीग के वरिष्ठ नेता रमेश चंद्र सेन की दिनाजपुर जिला जेल में पुलिस हिरासत में बीमार पड़ने के बाद मौत हो गई थी। वह पहले जल संसाधन मंत्री रह चुके थे और ठाकुरगांव-1 (सदर उपजिला) सीट से सांसद थे। उन्हें दिनाजपुर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के इमरजेंसी में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया था।
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वहीं अवामी लीग लगातार आरोप लगा रही है कि बांग्लादेशी अधिकारी राजनीतिक विरोधियों को खत्म करने के लिए जेलों को मूक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। पार्टी ने कहा था कि जेल अधिकारियों ने इसे 'प्राकृतिक मृत्यु' कहा है, लेकिन सच्चाई बिल्कुल अलग है।
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