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Gwadar Port: ग्वादर में आर्थिक गतिविधियां दूर की कौड़ी, एक मीडिया संस्थान ने बताई सीपीईसी की हकीकत

एजेंसी, इस्लामाबाद। Published by: देव कश्यप Updated Thu, 11 Aug 2022 01:12 AM IST
सार

मीडिया संस्थान निक्केई एशिया ने जमीनी हकीकत परखने के लिए ग्वादर पोर्ट की यात्रा की। मकरान तटीय हाईवे से कराची होकर इसका रास्ता साढ़े सात घंटे का है। पता चला कि परियोजना के ज्यादातर हिस्सों पर अभी काम नहीं हो पाया है। नए वैश्विक प्रतिमान की शुरुआत की कोई तैयारी ग्वादर में कहीं नहीं दिखती।

ग्वादर बंदरगाह (सांकेतिक तस्वीर)।
ग्वादर बंदरगाह (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

पाकिस्तान का आर्थिक ढांचा चीन की मदद से सुधारने के चाहे जितने दावे करे, लेकिन चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) की हकीकत एक मीडिया संस्थान ने अपने रिपोर्ताज से दुनिया के सामने ला दी है। ग्वादर बंदरगाह की बातें खूब होती हैं, लेकिन यहां आर्थिक गतिविधियां शुरू होना दूर की कौड़ी है।



मीडिया संस्थान निक्केई एशिया ने जमीनी हकीकत परखने के लिए ग्वादर पोर्ट की यात्रा की। मकरान तटीय हाईवे से कराची होकर इसका रास्ता साढ़े सात घंटे का है। पता चला कि परियोजना के ज्यादातर हिस्सों पर अभी काम नहीं हो पाया है।


इस आंख खोलने वाली रिपोर्ट में बताया गया है कि 600 किलोमीटर के रूट पर न तो कोई रेस्तरां है और न ही कोई जनसुविधा केंद्र। यहां तक कि चलते समय गाड़ी का टैंक फुल कराना भूल गए हैं तो रास्ते में कोई पेट्रोल पंप भी नहीं है। टीम को रास्ते में 200 से भी कम गाड़ियां दिखीं। भारतीय महासागर तट के करीब पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह शहर में हर ओर चीन व पाकिस्तान के झंडे दिखाई देते हैं।

इससे लगता है, यह चीन-पाकिस्तान संबंधों की महानता की नुमाइश है। इसके पीछे चीनी वित्त पोषित निर्माण परियोजनाओं और आर्थिक गतिविधियों की हकीकत चालाकी से छिपाई गई है। समुद्र किनारे वाहन नहीं दिखते। शहर के भीतर जाएं तो संकरी सड़कों पर भीड़भाड़ है। हर ओर गंदे पानी की दुर्गंध उठ रही है। चीन के बनाए बंदरगाह परिसर में कुछ बहुमंजिला इमारतें भी हैं। नए वैश्विक प्रतिमान की शुरुआत की कोई तैयारी ग्वादर में कहीं नहीं दिखती, लेकिन चीन चाहता है कि दुनिया हकीकत देखने के बजाय केवल उसके कहे पर यकीन कर ले।

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