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China-Taiwan Tension: ताइवान सीमा के पास चीनी जहाज और लड़ाकू विमान की हलचल, MND अलर्ट; क्षेत्र में बढ़ा तनाव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ताइपे
Published by: अमन तिवारी
Updated Sun, 12 Apr 2026 09:35 AM IST
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सार
ताइवान के आसपास चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, कई युद्धपोत और सैन्य विमान उसके समुद्री और हवाई क्षेत्र के पास देखे गए। दोनों के बीच यह विवाद 1949 के गृहयुद्ध के समय से जारी है।
चीन-ताइवान फ्लैग
- फोटो : Freepik
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विस्तार
ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को अपने समुद्री और हवाई क्षेत्र के पास चीन की बड़ी सैन्य गतिविधियों का पता लगाया है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि आज सुबह छह बजे तक ताइवान के आसपास चीन के 8 पीएलएएन जहाजे, 2 पीएलए एयरक्राफ्ट और 4 सरकारी जहाज मौजूद थे। इन 2 विमानों में से एक विमान ने ताइवान के दक्षिण-पूर्वी हवाई सुरक्षा क्षेत्र (ADIZ) में प्रवेश किया। ताइवान की सेना (MND) ने इस पूरी स्थिति पर कड़ी नजर रखी और उचित जवाब दिया।
इससे पहले शनिवार को भी चीन ने ताइवान की सीमाओं के पास भारी सैन्य दबाव बनाया था। शनिवार सुबह छह बजे तक चीन के 17 सैन्य विमान, 7 नेवी जहाज और 1 सरकारी जहाज ताइवान के पास देखे गए थे। खास बात यह है कि इन 17 विमानों में से 15 विमानों ने ताइवान की मध्य रेखा को पार किया और उत्तरी व दक्षिण-पश्चिमी हवाई क्षेत्र में घुसपैठ की।
ये भी पढ़ें: Israel: 'पीढ़ियों तक चलने वाला शांति समझौता चाहता है इस्राइल', PM नेतन्याहू ने लेबनान संग डील पर और क्या कहा?
क्या है मामला?
ताइवान पर चीन का दावा एक बहुत ही जटिल और पुराना मुद्दा है। बीजिंग का मानना है कि ताइवान चीन का एक अटूट हिस्सा है और यह उसकी राष्ट्रीय नीति का हिस्सा है। इसके उलट, ताइवान एक स्वतंत्र पहचान रखता है। वहां की अपनी सरकार, अपनी सेना और अपनी अलग अर्थव्यवस्था है। ताइवान की स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय है।
क्या है ताइवन का इतिहास?
इतिहास की बात करें तो ताइवान पर चीन का दावा 1683 के किंग राजवंश के समय से शुरू होता है। साल 1895 में पहले चीन-जापान युद्ध के बाद किंग राजवंश ने ताइवान को जापान को दे दिया था। इसके बाद 50 वर्षों तक ताइवान जापान के कब्जे में रहा। दूसरे विश्व युद्ध में जापान की हार के बाद ताइवान वापस चीन के नियंत्रण में आया, लेकिन संप्रभुता का कानूनी हस्तांतरण कभी औपचारिक रूप से पूरा नहीं हुआ।
साल 1949 में चीन के गृहयुद्ध के कारण मुख्य भूमि पर 'पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना' (PRC) की स्थापना हुई। वहीं, हारने वाली 'रिपब्लिक ऑफ चाइना' (ROC) की सरकार ताइवान भाग गई। तब से दोनों ही पक्ष पूरे चीन पर शासन करने का दावा करते हैं। वर्तमान में ताइवान एक स्वतंत्र देश की तरह काम करता है, लेकिन उसने कभी भी औपचारिक रूप से अपनी आजादी की घोषणा नहीं की है। ताइवान ऐसा इसलिए करता है ताकि चीन के साथ किसी भी तरह के सीधे सैन्य संघर्ष से बचा जा सके।
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2 sorties of PLA aircraft, 8 PLAN vessels and 4 official ships operating around Taiwan detected up until 6 a.m. (UTC+8) today. 1 out of 2 sorties entered Taiwan’s southeastern part ADIZ. #ROCArmedForces have monitored the situation and responded. pic.twitter.com/JffgofytjO
— 國防部 Ministry of National Defense, ROC(Taiwan) 🇹🇼 (@MoNDefense) April 12, 2026
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इससे पहले शनिवार को भी चीन ने ताइवान की सीमाओं के पास भारी सैन्य दबाव बनाया था। शनिवार सुबह छह बजे तक चीन के 17 सैन्य विमान, 7 नेवी जहाज और 1 सरकारी जहाज ताइवान के पास देखे गए थे। खास बात यह है कि इन 17 विमानों में से 15 विमानों ने ताइवान की मध्य रेखा को पार किया और उत्तरी व दक्षिण-पश्चिमी हवाई क्षेत्र में घुसपैठ की।
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क्या है मामला?
ताइवान पर चीन का दावा एक बहुत ही जटिल और पुराना मुद्दा है। बीजिंग का मानना है कि ताइवान चीन का एक अटूट हिस्सा है और यह उसकी राष्ट्रीय नीति का हिस्सा है। इसके उलट, ताइवान एक स्वतंत्र पहचान रखता है। वहां की अपनी सरकार, अपनी सेना और अपनी अलग अर्थव्यवस्था है। ताइवान की स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय है।
क्या है ताइवन का इतिहास?
इतिहास की बात करें तो ताइवान पर चीन का दावा 1683 के किंग राजवंश के समय से शुरू होता है। साल 1895 में पहले चीन-जापान युद्ध के बाद किंग राजवंश ने ताइवान को जापान को दे दिया था। इसके बाद 50 वर्षों तक ताइवान जापान के कब्जे में रहा। दूसरे विश्व युद्ध में जापान की हार के बाद ताइवान वापस चीन के नियंत्रण में आया, लेकिन संप्रभुता का कानूनी हस्तांतरण कभी औपचारिक रूप से पूरा नहीं हुआ।
साल 1949 में चीन के गृहयुद्ध के कारण मुख्य भूमि पर 'पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना' (PRC) की स्थापना हुई। वहीं, हारने वाली 'रिपब्लिक ऑफ चाइना' (ROC) की सरकार ताइवान भाग गई। तब से दोनों ही पक्ष पूरे चीन पर शासन करने का दावा करते हैं। वर्तमान में ताइवान एक स्वतंत्र देश की तरह काम करता है, लेकिन उसने कभी भी औपचारिक रूप से अपनी आजादी की घोषणा नहीं की है। ताइवान ऐसा इसलिए करता है ताकि चीन के साथ किसी भी तरह के सीधे सैन्य संघर्ष से बचा जा सके।
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