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किताब में 2004 भारत-PAK क्रिकेट दौरे को लेकर खुलासा: मुशर्रफ चाहते थे कराची में टेस्ट, आडवाणी ने किया था इनकार
Tue, 18 Aug 2026 06:12 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Tue, 18 Aug 2026 06:12 PM IST
सार
पूर्व खुफिया एवं सुरक्षा अधिकारी यशोवर्धन आजाद ने अपनी किताब में 2004 के भारत-पाकिस्तान क्रिकेट दौरे से जुड़ा एक अहम घटनाक्रम साझा किया है। उनके अनुसार, तत्कालीन पाकिस्तान राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ कराची में टेस्ट मैच चाहते थे और यह अनुरोध भारत तक पहुंचा था। सुरक्षा दल ने कराची और पेशावर में टेस्ट कराने के खिलाफ सलाह दी थी।
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पूर्व आईपीएस यशोवर्धन आजाद
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
फरवरी 2004 की बात है। एक दशक से अधिक समय बाद भारत के पहले पूर्ण क्रिकेट दौरे से ठीक पहले तत्कालीन पाकिस्तान राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ कराची में एक टेस्ट मैच आयोजित करना चाहते थे। उन्होंने इसके लिए भारत की मंजूरी मांगी थी, लेकिन उन्हें मंजूरी नहीं मिली। पूर्व खुफिया और सुरक्षा अधिकारी यशोवर्धन आजाद ने अपनी नई किताब में इसका जिक्र किया है।
आजाद की हाल ही में प्रकाशित किताब "पुलिसिंग द रिपब्लिक: भारत भ्रष्टाचार और अपराध से कैसे लड़ता है और अधिकारों की रक्षा कैसे करता है, इसका एक अंदरूनी नजरिया" में बताया गया है कि तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने इस पूरे घटनाक्रम में अहम भूमिका निभाई थी।
मुशर्रफ ने कराची में टेस्ट कराने की मंजूरी क्यों मांगी थी?
यशोवर्धन आजाद तीन सदस्यीय अग्रिम सुरक्षा दल के प्रमुख थे। इस दल ने पाकिस्तान के सभी क्रिकेट स्थलों का सुरक्षा जायजा लिया था। उसकी रिपोर्ट में भारत के पाकिस्तान दौरे की सिफारिश की गई थी, लेकिन कराची और पेशावर में टेस्ट मैच नहीं कराने की सलाह दी गई थी। मुल्तान, रावलपिंडी और लाहौर को टेस्ट मैचों के लिए सुरक्षित माना गया था।
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इसके कुछ समय बाद आजाद को आडवाणी का फोन पर कॉल आया। आजाद ने किताब में पाकिस्तान दौरे से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों का जिक्र करते हुए इस बातचीत को याद किया है। आडवाणी ने उनसे कहा, ''यशोवर्धन जी, कराची में क्या हम टेस्ट मैच नहीं करा सकते हैं?'' आजाद ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि कराची और पेशावर को टेस्ट मैचों के लिए इसलिए नहीं चुना गया था क्योंकि इन इलाकों में खतरे की आशंका अधिक थी। वहां लंबे समय तक टीम की मौजूदगी जोखिम भरी हो सकती थी।
आडवाणी ने सुरक्षा टीम से कराची टेस्ट पर दोबारा विचार करने को क्यों कहा?
आजाद के मुताबिक, आडवाणी ने उनसे कहा कि क्या वह इस फैसले पर दोबारा विचार कर सकते हैं और इसे आईबी निदेशक के सामने रख सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह खुद आईबी निदेशक से इस बारे में बात करेंगे। भारत का पाकिस्तान दौरा मार्च में कराची में एकदिवसीय मैच के साथ शुरू हुआ और अप्रैल तक चला।
कराची में टेस्ट मैच की सुरक्षा संभालने की संभावना से आजाद "बेचैन" हो गए थे। उन्होंने तुरंत अपने स्कूल के मित्र अरुण सिंह को फोन किया। उस समय सिंह विदेश मंत्रालय में पाकिस्तान से जुड़े मामलों के संयुक्त सचिव थे। उन्होंने आजाद को बताया कि यह अनुरोध मुशर्रफ की ओर से आया था। आजाद ने पूछा कि यह सवाल सीधे उपप्रधानमंत्री की ओर से क्यों आया। इस पर अरुण ने बताया कि यह पाकिस्तान के राष्ट्रपति मुशर्रफ का अनुरोध था, जिसे भारत के विदेश मंत्री के जरिए भेजा गया था।
आजाद लिखते हैं, "आडवाणी आसानी से हमें खारिज कर सकते थे, लेकिन उन्होंने सुरक्षा सलाह को माना और सुरक्षा टीम द्वारा मंजूर कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया।" यह मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। आजाद, जिन्होंने आगे चलकर इस दौरे पर भारतीय टीम की सुरक्षा इकाई का नेतृत्व किया, ने कराची में होने वाले एकदिवसीय मैच को लेकर मिली धमकियों और सुरक्षा चिंताओं को भी याद किया है।
धमकियों के बावजूद भारतीय टीम की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की गई?
उन्होंने बताया कि भारतीय टीम को एक "आतंकी संगठन" से धमकी मिली थी। इसी दौरान 11 मार्च 2004 को अल-कायदा के आतंकवादियों ने मैड्रिड में ट्रेन बम धमाके किए थे। इन हमलों में 193 लोगों की मौत हुई थी और करीब 2,000 लोग घायल हुए थे। उस समय भारतीय टीम कराची में अपने एकदिवसीय मैच से पहले अभ्यास कर रही थी।
आजाद के अनुसार, अल-कायदा ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए कहा था कि यह कार्रवाई इराक में लड़ रही स्पेन की सेना के विरोध में की गई थी। उन्होंने कहा कि उनकी खुफिया जानकारी के मुताबिक अल-कायदा के शीर्ष आतंकी पाकिस्तान के आदिवासी और शहरी इलाकों में मौजूद थे। उन्होंने टीम मैनेजर आरएस शेट्टी और कोच जॉन राइट को इसकी जानकारी दी। आजाद के मुताबिक, उन्हें अगले दिन कराची में पहला एकदिवसीय मैच खेलने के लिए रवाना होना था, इसलिए मामले को लेकर चुप रहने का फैसला किया गया।
इसके बाद इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग से भी आजाद को फोन आया। उन्हें रॉ से मिले एक इनपुट के आधार पर भारतीय टीम को आतंकी खतरे की जानकारी दी गई। किताब के मुताबिक, हालांकि इस इनपुट की "जानकारी उपलब्ध नहीं थी", लेकिन यह एक विश्वसनीय स्रोत से मिला था और इसमें खास तौर पर "कराची और भारतीय टीम" का जिक्र था।
सचिन तेंडुलकर ने सुरक्षा इंतजाम देखकर क्या सवाल पूछा था?
आजाद लिखते हैं कि टीम को निर्देश दिया गया था कि सामान सुबह ही तैयार कर लिया जाए, ताकि मैच के बाद टीम सीधे हवाई अड्डे के लिए रवाना हो सके। किताब में क्रिकेट दिग्गज सचिन तेंडुलकर से जुड़ा एक हल्का-फुल्का प्रसंग भी है। आजाद के मुताबिक, इस दौरे के दौरान सुरक्षा के लिए बड़े स्तर पर इंतजाम किए गए थे।
इस्लामाबाद हवाई अड्डे पर टीम के साथ रहते समय तेंडुलकर आजाद के बगल में बैठे थे। उन्होंने लंबे कद वाले काले सूट पहने सुरक्षाकर्मियों को काले ब्रीफकेस के साथ देखा और मासूमियत से पूछा, "क्या यह परमाणु बटन है?" आजाद ने जब उन्हें जैमर के बारे में बताया तो तेंडुलकर ने कई सवाल पूछे और पूरी तरह संतुष्ट होने तक जानकारी लेते रहे।
‘मैत्री दौरे’ में भारतीय टीम का प्रदर्शन कैसा रहा?
आजाद ने कहा, "ऐसे महान क्रिकेटरों के साथ बातचीत करना शानदार था, जिनकी अपने पेशे से इतर चीजों को जानने में भी दिलचस्पी थी।" ऐतिहासिक माने जाने वाले इस दौरे में भारतीय टीम की कप्तानी सौरव गांगुली ने की थी। इसे "मैत्री दौरा" कहा गया था। भारत ने एकदिवसीय सीरीज 3-2 से जीती थी, जबकि टेस्ट सीरीज पर 2-1 से कब्जा किया था।
"पुलिसिंग द रिपब्लिक" की कीमत 699 रुपये है और इसे ब्लूम्सबरी इंडिया ने प्रकाशित किया है। किताब में दावा किया गया है कि इसमें "ऐसे कठिन विषयों को शामिल किया गया है, जिन पर बहुत कम अंदरूनी लोगों ने लिखने की इच्छा दिखाई है।"
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आजाद की हाल ही में प्रकाशित किताब "पुलिसिंग द रिपब्लिक: भारत भ्रष्टाचार और अपराध से कैसे लड़ता है और अधिकारों की रक्षा कैसे करता है, इसका एक अंदरूनी नजरिया" में बताया गया है कि तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने इस पूरे घटनाक्रम में अहम भूमिका निभाई थी।
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मुशर्रफ ने कराची में टेस्ट कराने की मंजूरी क्यों मांगी थी?
यशोवर्धन आजाद तीन सदस्यीय अग्रिम सुरक्षा दल के प्रमुख थे। इस दल ने पाकिस्तान के सभी क्रिकेट स्थलों का सुरक्षा जायजा लिया था। उसकी रिपोर्ट में भारत के पाकिस्तान दौरे की सिफारिश की गई थी, लेकिन कराची और पेशावर में टेस्ट मैच नहीं कराने की सलाह दी गई थी। मुल्तान, रावलपिंडी और लाहौर को टेस्ट मैचों के लिए सुरक्षित माना गया था।
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इसके कुछ समय बाद आजाद को आडवाणी का फोन पर कॉल आया। आजाद ने किताब में पाकिस्तान दौरे से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों का जिक्र करते हुए इस बातचीत को याद किया है। आडवाणी ने उनसे कहा, ''यशोवर्धन जी, कराची में क्या हम टेस्ट मैच नहीं करा सकते हैं?'' आजाद ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि कराची और पेशावर को टेस्ट मैचों के लिए इसलिए नहीं चुना गया था क्योंकि इन इलाकों में खतरे की आशंका अधिक थी। वहां लंबे समय तक टीम की मौजूदगी जोखिम भरी हो सकती थी।
आडवाणी ने सुरक्षा टीम से कराची टेस्ट पर दोबारा विचार करने को क्यों कहा?
आजाद के मुताबिक, आडवाणी ने उनसे कहा कि क्या वह इस फैसले पर दोबारा विचार कर सकते हैं और इसे आईबी निदेशक के सामने रख सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह खुद आईबी निदेशक से इस बारे में बात करेंगे। भारत का पाकिस्तान दौरा मार्च में कराची में एकदिवसीय मैच के साथ शुरू हुआ और अप्रैल तक चला।
कराची में टेस्ट मैच की सुरक्षा संभालने की संभावना से आजाद "बेचैन" हो गए थे। उन्होंने तुरंत अपने स्कूल के मित्र अरुण सिंह को फोन किया। उस समय सिंह विदेश मंत्रालय में पाकिस्तान से जुड़े मामलों के संयुक्त सचिव थे। उन्होंने आजाद को बताया कि यह अनुरोध मुशर्रफ की ओर से आया था। आजाद ने पूछा कि यह सवाल सीधे उपप्रधानमंत्री की ओर से क्यों आया। इस पर अरुण ने बताया कि यह पाकिस्तान के राष्ट्रपति मुशर्रफ का अनुरोध था, जिसे भारत के विदेश मंत्री के जरिए भेजा गया था।
आजाद लिखते हैं, "आडवाणी आसानी से हमें खारिज कर सकते थे, लेकिन उन्होंने सुरक्षा सलाह को माना और सुरक्षा टीम द्वारा मंजूर कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया।" यह मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। आजाद, जिन्होंने आगे चलकर इस दौरे पर भारतीय टीम की सुरक्षा इकाई का नेतृत्व किया, ने कराची में होने वाले एकदिवसीय मैच को लेकर मिली धमकियों और सुरक्षा चिंताओं को भी याद किया है।
धमकियों के बावजूद भारतीय टीम की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की गई?
उन्होंने बताया कि भारतीय टीम को एक "आतंकी संगठन" से धमकी मिली थी। इसी दौरान 11 मार्च 2004 को अल-कायदा के आतंकवादियों ने मैड्रिड में ट्रेन बम धमाके किए थे। इन हमलों में 193 लोगों की मौत हुई थी और करीब 2,000 लोग घायल हुए थे। उस समय भारतीय टीम कराची में अपने एकदिवसीय मैच से पहले अभ्यास कर रही थी।
आजाद के अनुसार, अल-कायदा ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए कहा था कि यह कार्रवाई इराक में लड़ रही स्पेन की सेना के विरोध में की गई थी। उन्होंने कहा कि उनकी खुफिया जानकारी के मुताबिक अल-कायदा के शीर्ष आतंकी पाकिस्तान के आदिवासी और शहरी इलाकों में मौजूद थे। उन्होंने टीम मैनेजर आरएस शेट्टी और कोच जॉन राइट को इसकी जानकारी दी। आजाद के मुताबिक, उन्हें अगले दिन कराची में पहला एकदिवसीय मैच खेलने के लिए रवाना होना था, इसलिए मामले को लेकर चुप रहने का फैसला किया गया।
इसके बाद इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग से भी आजाद को फोन आया। उन्हें रॉ से मिले एक इनपुट के आधार पर भारतीय टीम को आतंकी खतरे की जानकारी दी गई। किताब के मुताबिक, हालांकि इस इनपुट की "जानकारी उपलब्ध नहीं थी", लेकिन यह एक विश्वसनीय स्रोत से मिला था और इसमें खास तौर पर "कराची और भारतीय टीम" का जिक्र था।
सचिन तेंडुलकर ने सुरक्षा इंतजाम देखकर क्या सवाल पूछा था?
आजाद लिखते हैं कि टीम को निर्देश दिया गया था कि सामान सुबह ही तैयार कर लिया जाए, ताकि मैच के बाद टीम सीधे हवाई अड्डे के लिए रवाना हो सके। किताब में क्रिकेट दिग्गज सचिन तेंडुलकर से जुड़ा एक हल्का-फुल्का प्रसंग भी है। आजाद के मुताबिक, इस दौरे के दौरान सुरक्षा के लिए बड़े स्तर पर इंतजाम किए गए थे।
इस्लामाबाद हवाई अड्डे पर टीम के साथ रहते समय तेंडुलकर आजाद के बगल में बैठे थे। उन्होंने लंबे कद वाले काले सूट पहने सुरक्षाकर्मियों को काले ब्रीफकेस के साथ देखा और मासूमियत से पूछा, "क्या यह परमाणु बटन है?" आजाद ने जब उन्हें जैमर के बारे में बताया तो तेंडुलकर ने कई सवाल पूछे और पूरी तरह संतुष्ट होने तक जानकारी लेते रहे।
‘मैत्री दौरे’ में भारतीय टीम का प्रदर्शन कैसा रहा?
आजाद ने कहा, "ऐसे महान क्रिकेटरों के साथ बातचीत करना शानदार था, जिनकी अपने पेशे से इतर चीजों को जानने में भी दिलचस्पी थी।" ऐतिहासिक माने जाने वाले इस दौरे में भारतीय टीम की कप्तानी सौरव गांगुली ने की थी। इसे "मैत्री दौरा" कहा गया था। भारत ने एकदिवसीय सीरीज 3-2 से जीती थी, जबकि टेस्ट सीरीज पर 2-1 से कब्जा किया था।
"पुलिसिंग द रिपब्लिक" की कीमत 699 रुपये है और इसे ब्लूम्सबरी इंडिया ने प्रकाशित किया है। किताब में दावा किया गया है कि इसमें "ऐसे कठिन विषयों को शामिल किया गया है, जिन पर बहुत कम अंदरूनी लोगों ने लिखने की इच्छा दिखाई है।"