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China-Russia: ट्रंप की नीतियों के खिलाफ चीन-रूस मुखर, कहा- दुनिया बहुध्रुवीय हो रही है; गोल्डन डोम की भी निंदा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: शिवम गर्ग
Updated Thu, 21 May 2026 04:32 AM IST
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सार
चीन और रूस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की कड़ी आलोचना की है। शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन ने बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का समर्थन करते हुए पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती दी और गोल्डन डोम योजना की भी निंदा की।
अब नहीं चलेगी एकतरफा दुनिया!
- फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
चीन-रूस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वर्चस्ववादी नीतियों की कड़ी निंदा की है। बुधवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन व चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की शिखर वार्ता के बाद जारी साझा बयान में दोनों देशों ने खुद को बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था यानी ऐसी दुनिया के समर्थक के रूप में पेश किया, जहां किसी एक देश का दबदबा न हो।
चिनपिंग ने बिना अमेरिका का नाम लिए कहा कि दुनिया में एकाधिकार और वर्चस्ववादी प्रवृत्तियां बढ़ रही हैं। दोनों देशों को मिलकर एकतरफा दादागिरी का विरोध करना चाहिए और अधिक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की रक्षा करनी चाहिए। चीनी समकक्ष की इस बात को पुतिन ने रूस-चीन संबंधों के लिए अभूतपूर्व बताया। साथ ही कहा कि एक बहुकेंद्रित दुनिया बनाने की जटिल प्रक्रिया आकार ले रही है और रूस-चीन साझेदारी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में स्थिरता का बड़ा आधार है। पुतिन-जिनपिंग ने बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था बनाने पर एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।
एकतरफा संघर्षों को रोकना जरूरी
बीजिंग में पुतिन के ग्रेट हाल ऑफ द पीपल में औपचारिक स्वागत के बाद उन्होंने कहा कि एकतरफा सैन्य कार्रवाई और लंबे समय तक चलने वाला युद्ध दुनिया को ऐसे दौर में ले जा सकता है, जहां अंतरराष्ट्रीय नियम कमजोर पड़ जाएं। ऐसे में लड़ाई रोकना बेहद जरूरी है। वहीं, पुतिन ने कहा, रूस और चीन संप्रभुता और राष्ट्रीय एकता जैसे मुख्य हितों की रक्षा के लिए साथ काम करेंगे। मॉस्को और बीजिंग के बीच करीबी रणनीतिक संबंध वैश्विक स्थिरता में अहम भूमिका निभा रहे हैं। दोनों देशों ने रणनीतिक सहयोग मजबूत करने और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के समर्थन में संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए।
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वैश्विक शासन को नया आकार देने का लिया संकल्प
दोनों देशों ने संयुक्त घोषणापत्र में आधिकारिक तौर पर एकतरफा राजनीतिक प्रभुत्व का विरोध करने का संकल्प लिया और पश्चिमी रणनीतिक, रक्षा और सुरक्षा रियोजनाओं की कड़ी आलोचना की। नेताओं ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार का समर्थन किया। इसमें कहा गया है कि सभी द्विपक्षीय निर्यात-आयात अब अपनी अर्थव्यवस्थाओं को पश्चिमी वित्तीय प्रतिबंधों से बचाने के लिए सीधे रूबल और युआन में किए जाएं।
अंतरराष्ट्रीय कानूनों के संशोधन पर दिया जोर
पुतिन-जिनपिंग ने बहुध्रुवीय दुनिया की वास्तविकताओं को दिखाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के संशोधन करने पर जोर दिया है। संयुक्त घोषणापत्र ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन जैसे गैर-पश्चिमी मंचों के जरिए वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देता है। रूस ने चीन को बिना रुकावट ऊर्जा आपूर्ति का वादा किया है, जबकि दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग में एकतरफा हस्तक्षेप की निंदा की और समुद्री बुनियादी ढांचे को राजनीतिकरण से मुक्त रखने की अपील की।
रूस-चीन गठबंधन अभी सबसे ज्यादा अहम
पुतिन ने कहा कि मॉस्को और बीजिंग सांस्कृतिक और सभ्यतागत विविधता और राष्ट्रों के संप्रभु विकास के सम्मान की रक्षा करते हुए एक अधिक न्यायपूर्ण और लोकतांत्रिक विश्व व्यवस्था बनाने के लिए प्रयास कर रहे हैं।
चिनपिंग ने बिना अमेरिका का नाम लिए कहा कि दुनिया में एकाधिकार और वर्चस्ववादी प्रवृत्तियां बढ़ रही हैं। दोनों देशों को मिलकर एकतरफा दादागिरी का विरोध करना चाहिए और अधिक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की रक्षा करनी चाहिए। चीनी समकक्ष की इस बात को पुतिन ने रूस-चीन संबंधों के लिए अभूतपूर्व बताया। साथ ही कहा कि एक बहुकेंद्रित दुनिया बनाने की जटिल प्रक्रिया आकार ले रही है और रूस-चीन साझेदारी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में स्थिरता का बड़ा आधार है। पुतिन-जिनपिंग ने बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था बनाने पर एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।
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एकतरफा संघर्षों को रोकना जरूरी
बीजिंग में पुतिन के ग्रेट हाल ऑफ द पीपल में औपचारिक स्वागत के बाद उन्होंने कहा कि एकतरफा सैन्य कार्रवाई और लंबे समय तक चलने वाला युद्ध दुनिया को ऐसे दौर में ले जा सकता है, जहां अंतरराष्ट्रीय नियम कमजोर पड़ जाएं। ऐसे में लड़ाई रोकना बेहद जरूरी है। वहीं, पुतिन ने कहा, रूस और चीन संप्रभुता और राष्ट्रीय एकता जैसे मुख्य हितों की रक्षा के लिए साथ काम करेंगे। मॉस्को और बीजिंग के बीच करीबी रणनीतिक संबंध वैश्विक स्थिरता में अहम भूमिका निभा रहे हैं। दोनों देशों ने रणनीतिक सहयोग मजबूत करने और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के समर्थन में संयुक्त घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए।
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दोनों देशों ने संयुक्त घोषणापत्र में आधिकारिक तौर पर एकतरफा राजनीतिक प्रभुत्व का विरोध करने का संकल्प लिया और पश्चिमी रणनीतिक, रक्षा और सुरक्षा रियोजनाओं की कड़ी आलोचना की। नेताओं ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार का समर्थन किया। इसमें कहा गया है कि सभी द्विपक्षीय निर्यात-आयात अब अपनी अर्थव्यवस्थाओं को पश्चिमी वित्तीय प्रतिबंधों से बचाने के लिए सीधे रूबल और युआन में किए जाएं।
अंतरराष्ट्रीय कानूनों के संशोधन पर दिया जोर
पुतिन-जिनपिंग ने बहुध्रुवीय दुनिया की वास्तविकताओं को दिखाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के संशोधन करने पर जोर दिया है। संयुक्त घोषणापत्र ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन जैसे गैर-पश्चिमी मंचों के जरिए वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देता है। रूस ने चीन को बिना रुकावट ऊर्जा आपूर्ति का वादा किया है, जबकि दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग में एकतरफा हस्तक्षेप की निंदा की और समुद्री बुनियादी ढांचे को राजनीतिकरण से मुक्त रखने की अपील की।
रूस-चीन गठबंधन अभी सबसे ज्यादा अहम
पुतिन ने कहा कि मॉस्को और बीजिंग सांस्कृतिक और सभ्यतागत विविधता और राष्ट्रों के संप्रभु विकास के सम्मान की रक्षा करते हुए एक अधिक न्यायपूर्ण और लोकतांत्रिक विश्व व्यवस्था बनाने के लिए प्रयास कर रहे हैं।