Sri Lanka: ...तो अब श्रीलंका की राजनीति में सीधे दखल दे रहा है चीन
Sri Lanka: विपक्षी सांसद शनाकियन रसामनिकम ने चेतावनी दी कि अगर चीन ने श्रीलंका को जल्द कर्ज राहत नहीं दी, तो देश भर में चीन विरोधी प्रदर्शन आयोजिक किए जाएंगे। उन्होंने कहा था कि ‘गो गोटा होम’ की तर्ज पर ‘गो होम चाइना’ आंदोलन शुरू किया जाएगा...
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श्रीलंका के एक विपक्षी सांसद के खिलाफ हुए प्रदर्शन के बाद यह शक जताया गया है कि इसे चीन के इशारे पर आयोजित किया गया। विपक्षी सांसद शनाकियन रसामनिकम ने पिछले हफ्ते सदन में श्रीलंका के आर्थिक संकट का दोष चीन पर मढ़ा था। उसके बाद चीन दूतावास के सामने कुछ लोगों ने रसामनिकम के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसके बाद रसामनिकम ने आरोप लगाया कि ये लोग किसी और के एजेंडे पर काम कर रहे हैं। उन्होंने वेबसाइट इकोनॉमीनेक्स्ट.कॉम से बातचीत में कहा- ‘हम जानते हैं कि ऐसे एजेंडे कैसे आगे बढ़ाए जाते हैं और हमें यह भी मालूम है कि उन लोगो के पीछे किसका हाथ था।’
संसद में रसामनिकम ने चेतावनी दी थी कि अगर चीन ने श्रीलंका को जल्द कर्ज राहत नहीं दी, तो देश भर में चीन विरोधी प्रदर्शन आयोजिक किए जाएंगे। उन्होंने कहा था कि ‘गो गोटा होम’ की तर्ज पर ‘गो होम चाइना’ आंदोलन शुरू किया जाएगा। गो गोटा होम आंदोलन पूर्व राष्ट्रपति गोटाबया राजपक्षे के खिलाफ हुआ था। रसामनिकम के खिलाफ प्रदर्शन का आयोजन बौद्ध भिक्षुओं के एक दल ने किया। ये लोग कोलंबो स्थित चीनी दूतावास के बाहर इकट्ठे हुए। वहां वक्ताओं ने रसामनिकम के बयान के निंदा की। साथ ही वहां सांसद के खिलाफ नारेबाजी की गई।
रसामनिकम ने कहा- ‘मुझे खुशी है कि कोलंबो में मेरे खिलाफ प्रदर्शन हुआ। अगर आप प्रदर्शन करने वाले समूह पर गौर करें, तो साफ हो जाएगा कि उन्हें देश की मौजूदा आर्थिक हालत की कोई जानकारी नहीं है।’ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने मौजूदा आर्थिक संसद से उबरने में मदद देने के लिए श्रीलंका को 2.9 बिलियन डॉलर का कर्ज देने को मंजूरी दी है। लेकिन उसने शर्त लगाई है कि जब श्रीलंका के मौजूदा कर्जदाता देश अपने पुराने कर्ज को चुकाने की समयसीमा में राहत देंगे, तभी ये रकम जारी होगी।
बट्टिकालोवा से निर्वाचित सांसद रसामनिकम ने परोक्ष रूप से इस प्रदर्शन के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा- ‘इस समूह को प्रदर्शन के लिए पैसे दिए गए। ये लोग किसी और का एजेंडा आगे बढ़ा रहे थे। मैं यह नहीं मान सकता कि देश के नागरिक ऐसा प्रदर्शन करेंगे। उन्हें अपने आसपास की हालत मालूम है।’ सप्ताहांत हुए इस प्रदर्शन के स्थल पर उस समय धक्कामुक्की भी हुई, जब एक महिला ने अपने मोबाइल फोन से प्रदर्शनकारियों की रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। उसके बाद दो गुटों में कहा सुनी हुई। कुछ लोग यह कहते सुने गए कि प्रदर्शनकारी श्रीलंका को चीन के हाथों में बेच डालना चाहते हैं।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक डेट रिस्ट्रक्चर (कर्ज चुकाने के कार्यक्रम को फिर से तय करने) के सवाल पर श्रीलंका में इन दिनों भावनात्मक माहौल है। श्रीलंका सरकार अपने कर्जदाता देशों के साथ लगातार बातचीत चला रही है। इसी का जिक्र रकते हुए रसामनिकम ने आरोप लगाया था कि यह प्रक्रिया चीन के जिद्दी रुख के कारण ठहरी हुई है। उन्होंने कहा था- अगर चीन सचमुच श्रीलंका का दोस्त है, तो उसे इस मौके पर वास्तविक सहायता करनी चाहिए। उसने ऐसा नहीं किया, तो देश के लोग उसका विरोध करेंगे।