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Violence: ड्यूरंड रेखा पर भड़की हिंसा, 48 घंटों में 31 पख्तून हताहत; अफगानिस्तान और पाकिस्तान में तनाव तेज
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Mon, 23 Feb 2026 03:46 PM IST
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सार
ड्यूरंड रेखा पर 48 घंटों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान में 31 पख्तूनों की मौत हुई है। नंगरहार में पाकिस्तानी हवाई हमले के बाद खैबर जिले में भी हिंसा भड़की। मृतकों में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। स्थानीय सूत्रों ने रिहायशी इलाकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।
48 घंटों में पाकिस्तान व अफगानिस्तान में 31 पख्तून हताहत
- फोटो : IANS
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विस्तार
ड्यूरंड रेखा के दोनों ओर एक बार फिर हिंसा भड़क गई है। पिछले 48 घंटों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान में कम से कम 31 पख्तूनों की मौत हुई है। घटनाओं की शुरुआत 20 और 21 फरवरी की रात पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में की गई हवाई कार्रवाई से हुई। इसके बाद सीमा पार और पाकिस्तान के अंदर भी हिंसा भड़क उठी। हालात ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है।
पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी के ठिकानों को निशाना बनाया। लेकिन स्थानीय अफगान अधिकारियों और क्षेत्रीय सूत्रों का कहना है कि हमला नंगरहार के बिसूद जिले के एक रिहायशी परिसर पर हुआ। पाकिस्तान की ओर से 17 नागरिकों के मारे जाने की बात कही गई है। मृतकों में 11 बच्चे और महिलाएं भी शामिल बताए गए हैं। घटनास्थल से सामने आई तस्वीरों में कथित आतंकी शिविर नहीं, बल्कि तबाह घर दिखाई दे रहे हैं।
सीमा पार फिर भड़की हिंसा
हवाई हमले के एक दिन बाद हिंसा ड्यूरंड रेखा पार कर पाकिस्तान के खैबर जिले की तिराह घाटी तक पहुंच गई। यहां एक नागरिक वाहन पर मोर्टार गोला गिरने से पांच पख्तूनों की मौत हुई, जिनमें दो बच्चे शामिल थे। स्थानीय लोगों ने इसके विरोध में सैन्य चौकी के बाहर प्रदर्शन किया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर सीधी गोलीबारी की, जिसमें चार और लोगों की मौत हो गई और पांच घायल हो गए।
48 घंटे में कुल 31 मौतें
दोनों देशों में हुई घटनाओं को जोड़ें तो 48 घंटों में 31 पख्तूनों की जान गई। आरोप है कि घटनाओं की शुरुआत सीमा पार हवाई हमले से हुई और फिर पाकिस्तान के अंदर कार्रवाई और गोलीबारी में और लोग मारे गए। इससे पहले भी जनवरी 2025 से पाकिस्तान में कथित आतंकवाद विरोधी अभियानों में 168 से अधिक पख्तूनों, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, के मारे जाने की खबरें सामने आई हैं। सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच अफगानिस्तान में भी पाकिस्तानी कार्रवाई में 88 पख्तून नागरिकों की मौत बताई गई है।
बढ़ती असुरक्षा की भावना
कहा जा रहा है कि लगातार सैन्य तैनाती, कर्फ्यू, चौकियां और घरों को ढहाने की कार्रवाइयों से स्थानीय लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। पख्तून समुदाय में यह धारणा मजबूत हो रही है कि सुरक्षा देने के बजाय उनके पूरे इलाके को शक की नजर से देखा जा रहा है। फिलहाल हालात तनावपूर्ण हैं और दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
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पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी के ठिकानों को निशाना बनाया। लेकिन स्थानीय अफगान अधिकारियों और क्षेत्रीय सूत्रों का कहना है कि हमला नंगरहार के बिसूद जिले के एक रिहायशी परिसर पर हुआ। पाकिस्तान की ओर से 17 नागरिकों के मारे जाने की बात कही गई है। मृतकों में 11 बच्चे और महिलाएं भी शामिल बताए गए हैं। घटनास्थल से सामने आई तस्वीरों में कथित आतंकी शिविर नहीं, बल्कि तबाह घर दिखाई दे रहे हैं।
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सीमा पार फिर भड़की हिंसा
हवाई हमले के एक दिन बाद हिंसा ड्यूरंड रेखा पार कर पाकिस्तान के खैबर जिले की तिराह घाटी तक पहुंच गई। यहां एक नागरिक वाहन पर मोर्टार गोला गिरने से पांच पख्तूनों की मौत हुई, जिनमें दो बच्चे शामिल थे। स्थानीय लोगों ने इसके विरोध में सैन्य चौकी के बाहर प्रदर्शन किया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर सीधी गोलीबारी की, जिसमें चार और लोगों की मौत हो गई और पांच घायल हो गए।
48 घंटे में कुल 31 मौतें
दोनों देशों में हुई घटनाओं को जोड़ें तो 48 घंटों में 31 पख्तूनों की जान गई। आरोप है कि घटनाओं की शुरुआत सीमा पार हवाई हमले से हुई और फिर पाकिस्तान के अंदर कार्रवाई और गोलीबारी में और लोग मारे गए। इससे पहले भी जनवरी 2025 से पाकिस्तान में कथित आतंकवाद विरोधी अभियानों में 168 से अधिक पख्तूनों, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, के मारे जाने की खबरें सामने आई हैं। सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच अफगानिस्तान में भी पाकिस्तानी कार्रवाई में 88 पख्तून नागरिकों की मौत बताई गई है।
बढ़ती असुरक्षा की भावना
कहा जा रहा है कि लगातार सैन्य तैनाती, कर्फ्यू, चौकियां और घरों को ढहाने की कार्रवाइयों से स्थानीय लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। पख्तून समुदाय में यह धारणा मजबूत हो रही है कि सुरक्षा देने के बजाय उनके पूरे इलाके को शक की नजर से देखा जा रहा है। फिलहाल हालात तनावपूर्ण हैं और दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
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