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Epstein Files: एप्स्टीन दस्तावेज में ट्रंप समेत कई बड़े नाम का जिक्र, अमेरिकी राजनीति में हलचल मचने की संभावना
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 01 Feb 2026 08:56 AM IST
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सार
अमेरिकी राजनीति में एप्स्टीन दस्तावेज में हुए खुलासों से हलचल मचने की संभावना है। बता दें कि इन दस्तावेजों में सैंकड़ों बार ट्रंप के साथ-साथ कई बड़े नामों का जिक्र हैं। वहीं इन दस्तावेजों को लेकर डेमोक्रेट्स ने सरकार पर निशाना साधा है।
एपस्टीन की संपत्ति से ली गई तस्वीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
अमेरिका के न्याय विभाग ने शुक्रवार को जेफरी एप्स्टीन से जुड़े सरकारी दस्तावेजों का अब तक का सबसे बड़ा पैकेज सार्वजनिक किया। ये दस्तावेज एप्स्टीन फाइल्स पारदर्शिता अधिनियम के तहत जारी हुए, जिस पर खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंर ने हस्ताक्षर किए थे।
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ट्रंप का नाम सैकड़ों बार, लेकिन…
इन फाइलों में ट्रंप का नाम सैकड़ों बार ईमेल, एफबीआई नोट्स और मीडिया क्लिपिंग्स में आता है। 2025 की एक एफबीआई ईमेल चेन में 12 से ज्यादा गुमनाम शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें ट्रंप पर एप्स्टीन से जुड़े यौन शोषण के आरोप लगाए गए हैं। लेकिन न्याय विभाग ने साफ कहा कि ये आरोप असत्य, सनसनीखेज और बिना भरोसे के हैं। ट्रंप ने फिर दोहराया कि उनका एप्स्टीन से रिश्ता 2000 के दशक के मध्य में खत्म हो गया था और उन्होंने किसी भी गलत काम से इनकार किया।
भारत का जिक्र- सरकार ने किया खंडन
इन दस्तावेजों में भारत से जुड़े कुछ अजीब और अपुष्ट दावे भी हैं। भारत सरकार ने उन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह 'एक सजायाफ्ता अपराधी की घटिया और बेतुकी बातें हैं, जिन पर ध्यान देना भी गलत है।' इसके अलावा कई अन्य भारतीयों के भी नाम इसमें शामिल हैं
दूसरे बड़े नाम भी फाइलों में
इन दस्तोवेजों में बिल गेट्स का नाम है, बिल गेट्स को लेकर दावा किया गया है कि 2010 के दशक में उनकी एप्स्टीन से मुलाकातें हुईं। लेकिन किसी भी अपराध से इनकार किया और कहा कि उन्हें इसका अफसोस है। इसके साथ ही एलन मस्क 2012-13 के ईमेल में एप्स्टीन ने उन्हें अपने द्वीप पर वाइल्ड पार्टी के लिए बुलाया था। वहीं इस पर मस्क ने कहा- उन्होंने ज्यादातर न्योते ठुकराए, ईमेल्स को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा सकता है, असली न्याय तब होगा जब किसी अपराधी की गिरफ्तारी होगी। इसके साथ इसमें हावर्ड लुटनिक का भी नाम है, जिन्होंने पहले कहा था कि 2005 में रिश्ते खत्म कर लिए, लेकिन फाइलों में 2012 में परिवार के साथ लंच की योजना का जिक्र है।
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राजनीति गरम, लेकिन नतीजा ठंडा
डेमोक्रेट सांसद रो खन्ना ने कहा कि ये फाइलें 'अमेरिका के लिए नैतिक परीक्षा' हैं। लेकिन वॉशिंगटन में कोई बड़ा राजनीतिक भूचाल नहीं आया, विरोधियों का कहना है कि सरकार ने जानबूझकर देर की। वहीं पीड़ितों के समर्थकों ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में पीड़ितों के नाम ठीक से नहीं छुपाए गए, जिससे उन्हें दोबारा मानसिक आघात हो सकता है।
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ट्रंप का नाम सैकड़ों बार, लेकिन…
इन फाइलों में ट्रंप का नाम सैकड़ों बार ईमेल, एफबीआई नोट्स और मीडिया क्लिपिंग्स में आता है। 2025 की एक एफबीआई ईमेल चेन में 12 से ज्यादा गुमनाम शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें ट्रंप पर एप्स्टीन से जुड़े यौन शोषण के आरोप लगाए गए हैं। लेकिन न्याय विभाग ने साफ कहा कि ये आरोप असत्य, सनसनीखेज और बिना भरोसे के हैं। ट्रंप ने फिर दोहराया कि उनका एप्स्टीन से रिश्ता 2000 के दशक के मध्य में खत्म हो गया था और उन्होंने किसी भी गलत काम से इनकार किया।
भारत का जिक्र- सरकार ने किया खंडन
इन दस्तावेजों में भारत से जुड़े कुछ अजीब और अपुष्ट दावे भी हैं। भारत सरकार ने उन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह 'एक सजायाफ्ता अपराधी की घटिया और बेतुकी बातें हैं, जिन पर ध्यान देना भी गलत है।' इसके अलावा कई अन्य भारतीयों के भी नाम इसमें शामिल हैं
दूसरे बड़े नाम भी फाइलों में
इन दस्तोवेजों में बिल गेट्स का नाम है, बिल गेट्स को लेकर दावा किया गया है कि 2010 के दशक में उनकी एप्स्टीन से मुलाकातें हुईं। लेकिन किसी भी अपराध से इनकार किया और कहा कि उन्हें इसका अफसोस है। इसके साथ ही एलन मस्क 2012-13 के ईमेल में एप्स्टीन ने उन्हें अपने द्वीप पर वाइल्ड पार्टी के लिए बुलाया था। वहीं इस पर मस्क ने कहा- उन्होंने ज्यादातर न्योते ठुकराए, ईमेल्स को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा सकता है, असली न्याय तब होगा जब किसी अपराधी की गिरफ्तारी होगी। इसके साथ इसमें हावर्ड लुटनिक का भी नाम है, जिन्होंने पहले कहा था कि 2005 में रिश्ते खत्म कर लिए, लेकिन फाइलों में 2012 में परिवार के साथ लंच की योजना का जिक्र है।
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डेमोक्रेट सांसद रो खन्ना ने कहा कि ये फाइलें 'अमेरिका के लिए नैतिक परीक्षा' हैं। लेकिन वॉशिंगटन में कोई बड़ा राजनीतिक भूचाल नहीं आया, विरोधियों का कहना है कि सरकार ने जानबूझकर देर की। वहीं पीड़ितों के समर्थकों ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में पीड़ितों के नाम ठीक से नहीं छुपाए गए, जिससे उन्हें दोबारा मानसिक आघात हो सकता है।
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