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G7 Summit: कनाडा के पीएम मार्क कार्नी का बड़ा बयान, 'जी7 अब दुनिया नहीं चलाता, भारत की उपस्थिति इसका प्रमाण'
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, डबलिन
Published by: Pavan
Updated Tue, 16 Jun 2026 07:02 PM IST
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सार
फ्रांस में होने वाले जी7 शिखर सम्मेलन से पहले कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि भारत जैसे देशों की भागीदारी यह दिखाती है कि दुनिया की ताकत और प्रभाव अब केवल जी7 देशों तक सीमित नहीं रह गए हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक समस्याओं का समाधान अब व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ही संभव है।
मार्क कार्नी, पीएम, कनाडा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि जी7 समूह अब दुनिया नहीं चलाता और न ही ऐसा दिखावा करता है। उन्होंने भारत की जी7 शिखर सम्मेलन में उपस्थिति को बदलती वैश्विक व्यवस्था का स्पष्ट प्रमाण बताया। यह बयान मार्क कार्नी ने अपने यूरोपीय दौरे के दौरान दिया। उन्होंने कहा, 'यह एक मान्यता है कि जी7, अगर कभी दुनिया चलाता था, तो अब नहीं चलाता या ऐसा दिखावा भी नहीं करता'।
जी-7 में कई देशों को किया गया आमंत्रित
जी7 शिखर सम्मेलन में पारंपरिक सात सदस्य देशों के अलावा भारत, ब्राजील, मिस्र, केन्या और खाड़ी देशों को भी आमंत्रित किया गया है। मार्क कार्नी ने इस आमंत्रण को नई विश्व व्यवस्था की ओर इशारा बताया। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में 'नई विश्व व्यवस्था की नींव' रखी जा सकती है। उन्होंने पोस्ट-कोल्ड वॉर युग के नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के ढहने की भी बात कही।
यह भी पढ़ें- G7 शिखर सम्मेलन: 16 महीने बाद पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात, वैश्विक मंच पर दिखी गर्मजोशी
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भारत की भूमिका पर जोर
कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया। उनके अनुसार, भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं और शक्तियों की भागीदारी यह साबित करती है कि वैश्विक शक्ति अब केवल पारंपरिक पश्चिमी देशों तक सीमित नहीं रही। कनाडाई पीएम का यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया में बहुध्रुवीय व्यवस्था की चर्चा तेज हो रही है और ब्रिक्स जैसे मंचों की भूमिका बढ़ रही है।
जी-7 में इन मुद्दों पर होगी चर्चा
जी7 शिखर सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया की स्थिति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेजी से बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताते हुए कार्नी ने कहा कि दुनिया भर में एआई क्षेत्र अभी भी काफी हद तक बिना किसी स्पष्ट नियमन के काम कर रहा है। इसलिए इसके लिए साझा नियम, मानक और सुरक्षा उपाय तय करना सम्मेलन का एक प्रमुख एजेंडा होगा। जी7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। इसके अलावा यूरोपीय संघ (ईयू) भी इस समूह का हिस्सा है।
यह भी पढ़ें- 'मेरे बिना इस्राइल नहीं होता': ट्रंप ने ईरान को फिर चेताया- परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश की तो बरपेगा कहर
सम्मेलन में कौन-कौन नेता शामिल?
इस सम्मेलन में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज शामिल हुए हैं। यूरोपीय संघ की ओर से यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा पहुंचे। वहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कई गैर-जी7 देशों के नेताओं को भी आमंत्रित किया है। इनमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग और केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो शामिल हैं।
जी-7 में कई देशों को किया गया आमंत्रित
जी7 शिखर सम्मेलन में पारंपरिक सात सदस्य देशों के अलावा भारत, ब्राजील, मिस्र, केन्या और खाड़ी देशों को भी आमंत्रित किया गया है। मार्क कार्नी ने इस आमंत्रण को नई विश्व व्यवस्था की ओर इशारा बताया। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में 'नई विश्व व्यवस्था की नींव' रखी जा सकती है। उन्होंने पोस्ट-कोल्ड वॉर युग के नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के ढहने की भी बात कही।
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भारत की भूमिका पर जोर
कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया। उनके अनुसार, भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं और शक्तियों की भागीदारी यह साबित करती है कि वैश्विक शक्ति अब केवल पारंपरिक पश्चिमी देशों तक सीमित नहीं रही। कनाडाई पीएम का यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया में बहुध्रुवीय व्यवस्था की चर्चा तेज हो रही है और ब्रिक्स जैसे मंचों की भूमिका बढ़ रही है।
जी-7 में इन मुद्दों पर होगी चर्चा
जी7 शिखर सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया की स्थिति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेजी से बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताते हुए कार्नी ने कहा कि दुनिया भर में एआई क्षेत्र अभी भी काफी हद तक बिना किसी स्पष्ट नियमन के काम कर रहा है। इसलिए इसके लिए साझा नियम, मानक और सुरक्षा उपाय तय करना सम्मेलन का एक प्रमुख एजेंडा होगा। जी7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। इसके अलावा यूरोपीय संघ (ईयू) भी इस समूह का हिस्सा है।
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सम्मेलन में कौन-कौन नेता शामिल?
इस सम्मेलन में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज शामिल हुए हैं। यूरोपीय संघ की ओर से यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा पहुंचे। वहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कई गैर-जी7 देशों के नेताओं को भी आमंत्रित किया है। इनमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग और केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो शामिल हैं।