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Explainer: जी-7 सम्मेलन की शुरुआत, इस बार की बैठक क्यों खास, इसके किस सदस्य का कब हुआ ट्रंप से विवाद? जानें

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 16 Jun 2026 08:31 AM IST
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सार

अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो जाने के बाद जी-7 सम्मेलन में दुनियाभर की दिलचस्पी और ज्यादा बढ़ गई है। अधिकतर लोग समझौते की सभी शर्तों की विस्तृत जानकारी और इसे लेकर होने वाली चर्चा पर नजर रखेंगे। वहीं, अब रूस-यूक्रेन युद्ध और एआई के बढ़ते खतरों को भी जी-7 के एजेंडे में रखा गया है। 

G7 Summit in France 	Evian Les Bains Agenda US Iran Deal Russia Ukraine War AI US Trade Tariff Donald Trump ex
जी-7 सम्मेलन 2026 का एजेंडा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

फ्रांस में सोमवार (15 जून) से शुरू हो रही ग्रुप ऑफ सेवेन (जी-7) की बैठक इस बार काफी दिलचस्प होने वाली है। दरअसल, यह सम्मेलन उस समय हो रहा है, जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने पर हाल ही में समझौता करने पर सहमति बनी है। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस पूरे सम्मेलन में छाए रहने की उम्मीद है। दूसरी तरफ जी-7 देश अब रूस-यूक्रेन संघर्ष और इस समूह के ही एक सदस्य अमेरिका की टैरिफ और कूटनीति को लेकर भी चर्चाएं कर सकते हैं। 


इस बार जी-7 की अध्यक्षता फ्रांस के पास है। बीते साल जब यह सम्मेलन हुआ था, तब इसकी अध्यक्षता कनाडा के पास थी। इसी तरह फ्रांस, जर्मनी, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका भी रोटेशन प्रणाली के तहत जी-7 की अध्यक्षता और इसकी मेजबानी कर चुके हैं। दूसरी तरफ भारत बीते कुछ वर्षों में जी-7 का सदस्य न होने के बावजूद इसके लिए मेहमान के तौर पर आमंत्रित किया जाता रहा है। 
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आइये जानते हैं कि आखिर जी-7 सम्मेलन क्या है? इस बार बैठक का एजेंडा क्या तय किया गया है? डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद से जी-7 के किस नेता से उनका कब और क्या विवाद हुआ है? आइये जानते हैं...


क्या है जी-7 सम्मेलन, इसका क्या इतिहास?

जी7 के गठन की कहानी भी काफी दिलचस्प है। दरअसल, 1970 का दौर, वह समय था, जब पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था तेल के बढ़ते दामों की वजह से मुश्किल में थी। खासकर तेल पैदा करने वाले देशों के संगठन- ऑर्गनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (ओपेक) यानी पेट्रोल निर्यातक देशों के संगठन की मनमानी की वजह से। 

1975
ओपेक की तरफ से तेल के निर्यात पर लगी पाबंदियों का असर ऐसा हुआ कि तब अमेरिका के वित्त मंत्री जॉर्ज शुल्ज ने एक बैठक बुला ली। पहली बैठक में छह देश इकट्ठा हुए और आर्थिक संकटों से निपटने पर चर्चा की। फैसला हुआ कि एक साल बाद यह देश फिर मिलेंगे और उठाए गए कदमों की समीक्षा करेंगे। 

1976 
एक साल बाद जब यह बैठक फिर हुई तो कनाडा को भी इसका हिस्सा बना लिया गया। इस तरह जी7 अस्तित्व में आया।  

1977
यूरोपीय आयोग (ईसी) के अध्यक्ष को भी जी7 की बैठकों के लिए आमंत्रित कर दिया गया। सामूहिक तौर पर यूरोप जी7 का हिस्सा नहीं बना।

1997
रूस को इस समूह में शामिल किया गया था। इसके बाद यह जी-8 बन गया। हालांकि, 2014 में यूक्रेन के क्रीमिया पर कब्जा करने के बाद रूस को समूह से निलंबित कर दिया गया और यह वापस जी-7 बन गया। 


 
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इस बार क्या है जी-7 का एजेंडा?

इस बार फ्रांस के इवियन-लेस-बैंस में हो रहे जी-7 शिखर सम्मेलन का मुख्य एजेंडा कई गंभीर वैश्विक राजनीतिक, कूटनीतिक और आर्थिक चुनौतियों पर केंद्रित है। इनमें सबसे प्रमुख यूक्रेन युद्ध और दुनियाभर में अमेरिका की वजह से फैला व्यापारिक असंतुलन है। 

1. यूक्रेन का युद्ध
जी-7 देश यूक्रेन के प्रति अपनी एकजुटता और समर्थन दिखाना चाहते हैं, क्योंकि रूस और यूक्रेन का युद्ध अब अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की इस चर्चा के लिए सम्मेलन में मौजूद रहेंगे, जिन्होंने युद्ध खत्म करने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ आमने-सामने की बातचीत का प्रस्ताव रखा है। यूरोपीय नेता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह समझाने का प्रयास करेंगे कि वे पुतिन के साथ सार्थक बातचीत के लिए एक साझा और मजबूत दृष्टिकोण अपनाएं।

2. ईरान के साथ शांति समझौता
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए जिस समझौते की रूपरेखा तैयार हुई है, उस पर इस सम्मेलन में प्रमुखता से चर्चा होगी। जी-7 नेता इस समझौते का विस्तृत विवरण जानना चाहते हैं, खासकर यह कि वैश्विक व्यापार के लिए अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को शिपिंग ट्रैफिक के लिए कितनी जल्दी खोला जा सकता है। 

3. वैश्विक आर्थिक असंतुलन और व्यापार
चर्चा का एक और बड़ा विषय चीन के साथ-साथ अमेरिका की व्यापार नीतियां और वैश्विक आर्थिक असंतुलन है। फ्रांस ने इस असंतुलन को स्पष्ट करते हुए कहा है कि चीन बहुत अधिक उत्पादन करता है, अमेरिका बहुत अधिक उपभोग करता है और यूरोप बहुत कम निवेश करता है। इसके अलावा, सम्मेलन में चीन के रिकॉर्ड व्यापार मुनाफे और रोजमर्रा के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले दुर्लभ खनिजों (रेयर अर्थ) के बाजार पर चीन के दबदबे को लेकर चिंताएं उठाई जाएंगी। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से लगाए गए टैरिफ से जुड़े व्यापारिक तनावों पर भी बातचीत होने की उम्मीद है। 



4. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
तेजी से बढ़ती एआई तकनीक से जुड़े अवसरों और संभावित खतरों पर चर्चा करने के लिए फ्रांस ने ओपनएआई, गूगल, एंथ्रोपिक और मिस्ट्रल एआई जैसी प्रमुख कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों को भी आमंत्रित किया है। इसके अंतर्गत बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल बुनियादी ढांचे जैसे अहम विषयों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

5. विकासशील देशों पर कर्ज का बोझ
जी-7 नेता कई उभरते बाजारों और विकासशील देशों पर बढ़ रहे भारी कर्ज के बोझ से निपटने के लिए अपना संकल्प जाहिर करेंगे, हालांकि इसके ठोस कदम क्या होंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

फ्रांस में होने वाले जी-7 सम्मेलन में कौन-कौन ले रहा हिस्सा?

फ्रांस के इवियन-लेस-बैंस में आयोजित हो रहे जी-7 शिखर सम्मेलन में मुख्य सदस्य देशों के अलावा कई अतिथि देशों के नेताओं और तकनीकी दिग्गजों को भी आमंत्रित किया गया है।



जी-7 का हिस्सा देश
सम्मेलन में जी-7 के सातों मुख्य सदस्य देश और इनके प्रमुख शामिल होंगे। इनमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, मेजबान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी और जापान की प्रधानमंत्री सनाई तकाइची हिस्सा लेंगी। इनके साथ ही, यूरोपीय संघ (ईयू) भी हमेशा की तरह इस सम्मेलन में अपना प्रतिनिधित्व करेगा।

आमंत्रित देश
फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने कई गैर-जी7 देशों के राष्ट्राध्यक्षों को अतिथि के रूप में विशेष निमंत्रण दिया है। जिन प्रमुख नेताओं ने सम्मेलन में हिस्सा लेने की पुष्टि की है, उनमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल-सीसी, कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी।

इनके अलावा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, केन्या और दक्षिण कोरिया के नेता भी इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को भी निमंत्रण दिया गया है, लेकिन उनके शामिल होने को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

एआई और टेक कंपनियों के अधिकारी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तकनीकों, उसके खतरों और अवसरों पर चर्चा करने के लिए दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों को भी आमंत्रित किया गया है। इनमें ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन, एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो एमोडाई के साथ-साथ गूगल और मिस्ट्रल एआई के प्रतिनिधि शामिल हैं।

जी-7 के किस नेता से डोनाल्ड ट्रंप का कब और क्या विवाद हुआ है? 

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर: ईरान पर अमेरिकी सैन्य हमलों में ब्रिटिश बेस के इस्तेमाल की अनुमति न देने और युद्ध में मदद न करने पर ट्रंप ने स्टार्मर की कड़ी आलोचना की। उन्होंने स्टार्मर की तुलना विंस्टन चर्चिल से करते हुए कहा, "हम विंस्टन चर्चिल से नहीं निपट रहे हैं।" ट्रंप ने सोशल मीडिया पर यह भी ताना मारा कि "हमें ऐसे लोगों की जरूरत नहीं है जो हमारे युद्ध जीतने के बाद उसमें शामिल होते हैं।"

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी: ट्रंप कनाडा के साथ व्यापार असंतुलन से नाराज रहते हैं और अक्सर कार्नी को गवर्नर कहकर बुलाते हैं। दावोस विश्व आर्थिक मंच में कार्नी की एक परोक्ष टिप्पणी के जवाब में ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, "कनाडा अमेरिका की वजह से ही जिंदा है। अगली बार बयान देते समय इसे याद रखना, मार्क।" इतना ही नहीं, पिछले साल जब कनाडा ने जी-7 का आयोजन किया था, तब भी ट्रंप कुछ कारणों से जी-7 की बैठक को बीच में ही छोड़कर अमेरिका लौट गए थे।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों: अप्रैल में व्हाइट हाउस में ईस्टर लंच के दौरान, ट्रंप ने ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका की मदद न करने पर फ्रांस की आलोचना की और मैक्रों के वैवाहिक जीवन का मजाक उड़ाया। उन्होंने वियतनाम के एक वायरल वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि मैक्रों की पत्नी ब्रिजिट उनके साथ बहुत बुरा बर्ताव करती हैं। इसे लेकर बाद में मैक्रों ने पलटवार किया था और ट्रंप के बयान को अनुचित करार दिया। इसके अलावा, ट्रंप अक्सर व्यापार वार्ता को लेकर मैक्रों के लहजे की मजाकिया नकल भी उतारते हैं।

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी: बीते साल अक्तूबर में ट्रंप ने मेलोनी की खूब तारीफ की थी, लेकिन ईरान के खिलाफ युद्ध में इटली के मदद करने से इनकार करने और पोप लियो XIV के साथ ट्रंप के विवाद पर मेलोनी ने ट्रंप को फटकार लगाई थी। इसके बाद से ही दोनों नेताओं के बीच विवाद पैदा हो गया। ट्रंप ने इटली के एक अखबार से कहा था, "क्या लोग उसे (मेलोनी को) पसंद करते हैं? मुझे विश्वास नहीं होता... मुझे लगा था कि उसमें साहस है, लेकिन मैं गलत था।"

जापान की प्रधानमंत्री सनाई ताकाइची: ताकाइची की पहली व्हाइट हाउस यात्रा के दौरान (अक्तूबर के बाद), जब एक जापानी पत्रकार ने ईरान पर अचानक हमले को लेकर सवाल पूछा, तो ट्रंप ने जापान को असहज करते हुए पर्ल हार्बर का अप्रत्याशित हवाला दिया। ट्रंप ने कहा, "जापान से बेहतर सरप्राइज के बारे में कौन जानता है? आपने मुझे पर्ल हार्बर के बारे में क्यों नहीं बताया?।" बता दें कि पर्ल हार्बर द्वितीय विश्व युद्ध के समय की घटना थी, जिसमें जापान ने अमेरिका पर हमला किया था। इसके बाद अमेरिका ने पलटवार करते हुए जापान पर दो परमाणु बम गिरा दिए थे। 

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज: अप्रैल में मर्ज ने ईरान युद्ध में अमेरिका की रणनीति की आलोचना करते हुए कहा था कि अमेरिका अपमानित हो रहा है। इस पर ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पलटवार करते हुए कहा कि मर्ज को अपने देश की आव्रजन  और ऊर्जा समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। इस विवाद के कुछ दिनों बाद ही अमेरिका ने जर्मनी से अपने 5,000 सैनिकों को वापस बुलाने का ऐलान कर दिया। डी-डे (द्वितीय विश्व युद्ध में अमेरिका के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना की विजयी का दिन) की सालगिरह से पहले भी दोनों के बीच एक असहज स्थिति तब बन गई थी, जब ट्रंप ने मर्ज से कहा था कि वह ऐतिहासिक दिन जर्मनी के लिए सुखद नहीं था।
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