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भारत के लिए UK-डेनमार्क का मेगा प्लान: ग्रीन एनर्जी के लिए बना नॉर्थ स्टार प्लेटफॉर्म, ₹28.91 अरब का निवेश

पीटीआई, लंदन। Published by: राकेश कुमार Updated Tue, 19 May 2026 04:58 PM IST
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सार

भारत के 2030 तक 500 गीगावाट ग्रीन एनर्जी और 2070 तक नेट-जीरो के लक्ष्य को पूरा करने के लिए यूके और डेनमार्क ने मिलकर 300 मिलियन डॉलर यानी ₹28.91 अरब का 'नॉर्थ स्टार' प्लेटफॉर्म बनाया है। यह बड़ा निवेश भारत में सालाना चार मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन को कम करके स्वच्छ ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा। 
 

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भारत में निवेश करेगा यूके-डेनमार्क - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

भारत में पर्यावरण अनुकूल और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ब्रिटेन और डेनमार्क ने एक बड़ा वैश्विक गठबंधन किया है। ब्रिटेन के विकास वित्त संस्थान ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट (बीआईआई) और डेनमार्क के ग्लोबल फंड मैनेजर कोपेनहेगन इन्फ्रास्ट्रक्चर पार्टनर्स ने हाथ मिलाया है। दोनों ने मिलकर 'नॉर्थ स्टार' नाम के एक रिन्यूएबल एनर्जी प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। 300 मिलियन डॉलर यानी करीब ₹28.91 अरब के इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य भारत में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, हाइब्रिड और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में निवेश करना है। दोनों संस्थान इस प्लेटफॉर्म में 150-150 मिलियन डॉलर का योगदान देंगे। इससे भारत में हरित परियोजनाओं के लिए जरूरी फंड की कमी को पूरा किया जा सकेगा। इसके साथ ही अतिरिक्त निजी पूंजी को भी आकर्षित किया जाएगा।
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ब्रिटिश क्लाइमेट पार्टनर्स की पहली बड़ी पहल
यह रणनीतिक निवेश पिछले महीने बीआईआई की ओर से शुरू की गई 1.1 बिलियन पाउंड की ब्रिटिश क्लाइमेट पार्टनर्स (बीसीपी) पहल का पहला हिस्सा है। यह पहल बीआईआई की नई पांच वर्षीय रणनीति का एक प्रमुख अंग है। बीआईआई के प्रबंध निदेशक और एशिया इन्फ्रास्ट्रक्चर के प्रमुख रोहित आनंद ने बताया कि ब्रिटिश क्लाइमेट पार्टनर्स का उद्देश्य बड़े पैमाने पर संस्थागत पूंजी जुटाना है। यह पूंजी भारत सहित विकासशील एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में ऊर्जा संक्रमण की रफ्तार तेज करेगी। इन क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा की जरूरत और अवसर दोनों ही सबसे अधिक हैं। उन्होंने कहा कि 'नॉर्थ स्टार' की शुरुआत भारत के मजबूत रिन्यूएबल ग्रोथ और सहायक सरकारी नीतियों को दर्शाती है। यहां स्वच्छ ऊर्जा का तेजी से विस्तार करने में उत्प्रेरक पूंजी बड़ी भूमिका निभाएगी।
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हर साल कम होगा 40 लाख टन कार्बन उत्सर्जन
'नॉर्थ स्टार' प्लेटफॉर्म से भारत के पर्यावरण को बहुत बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। इस परियोजना के जरिए सालाना चार मिलियन मेगावाट-घंटे से अधिक स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन किया जाएगा। इसके साथ ही यह प्रोजेक्ट हर साल लगभग चार मिलियन टन (40 लाख टन) कार्बन उत्सर्जन को रोकने में मददगार साबित होगा। सीआईपी के ग्रोथ मार्केट्स फंड्स के पार्टनर पीटर जेनिक सजोनटॉफ्ट ने भारत को वैश्विक स्तर पर रिन्यूएबल एनर्जी का सबसे महत्वपूर्ण बाजार बताया। उन्होंने कहा कि बीआईआई के साथ इस साझेदारी से वे भारत में अपने मौजूदा निवेश को और आगे बढ़ाएंगे। यह तालमेल स्थानीय अंतर्दृष्टि और वैश्विक निवेश विशेषज्ञता को एक साथ लाएगा। 
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भारत के 'नेट-जीरो' लक्ष्य को मिलेगी रफ्तार
बीआईआई का ब्रिटिश क्लाइमेट पार्टनर्स (बीसीपी) कार्यक्रम एशिया की तेजी से बढ़ती और कोयले पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं में जलवायु समाधानों के लिए संस्थागत पूंजी जुटाने के लिए बना है। इसमें भारत के अलावा फिलीपींस, इंडोनेशिया, वियतनाम और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देश शामिल हैं। भारत ने साल 2030 तक 500 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता हासिल करने और 2070 तक 'नेट-जीरो' यानी शून्य कार्बन उत्सर्जन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। हालांकि इस लक्ष्य को पाने के लिए साल 2030 तक हर साल लगभग 160 अरब डॉलर के बड़े क्लाइमेट फाइनेंसिंग गैप का सामना करना पड़ रहा है।

बीआईआई के अनुसार, भारत के इसी बड़े पैमाने, महत्वाकांक्षा और अधूरी वित्तीय जरूरतों के संयोजन के कारण उसे बीसीपी पहल के तहत पहले निवेश बाजार के रूप में चुना गया है। भारत में रिन्यूएबल एनर्जी के टेंडर तेजी से बढ़े हैं। इसके बावजूद कई डेवलपर्स के पास परियोजनाओं को निर्माण और संचालन तक ले जाने के लिए आवश्यक क्षमता और पूंजी की कमी है। बीआईआई का भारत के ग्रीन ट्रांजिशन में निवेश का एक पुराना और सफल रिकॉर्ड रहा है। साल 2018 में संस्थान ने 100 मिलियन डॉलर यानी करीब 963.76 करोड़ रुपये के निवेश से 'अयाना' नामक रिन्यूएबल जनरेशन प्लेटफॉर्म लॉन्च किया था। इस प्लेटफॉर्म ने बड़े पैमाने पर निजी पूंजी को आकर्षित किया। पिछले साल इस प्लेटफॉर्म को 2.3 बिलियन डॉलर यानी 22,166.49 करोड़ रुपये के एंटरप्राइज वैल्यू पर बेचा गया था।
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