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Japan: समलैंगिक विवाह पर रोक को हाईकोर्ट ने बताया असंवैधानिक, 2021 के निचली अदालत के फैसले को रखा बरकरार
Thu, 14 Mar 2024 07:32 PM IST
आदर्श शर्मा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Thu, 14 Mar 2024 07:32 PM IST
सार
Same Gender Marriage: समलैंगिक विवाह पर रोक से जुड़े निचली अदालत के फैसले को जापान की हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि इस तरह की रोक समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
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जापान (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : ANI
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विस्तार
समलैंगिक विवाह से जुड़े मामले पर जापान हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसमें अदालत ने समलैंगिक विवाह पर रोक को असंवैधानिक करार दिया गया है। गौरतलब है कि इस कदम से जापानी सरकार पर समलैंगिक जोड़ों की सुरक्षा के लिए और अधिक प्रयास करने का दबाव बढ़ने की संभावना है।
निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट ने रखा बरकरार
साप्पोरा हाईकोर्ट ने 2021 में निचली अदालत के ऐतिहासिक फैसले को बरकरार रखा। जिसमें कहा गया था कि समलैंगिक विवाह को मान्यता न देना संविधान के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है। गौरतलब है कि जापान में समलैंगिक जोड़े विवाह को लेकर लगातार सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
समलैंगिक विवाह पर बैन समानता के अधिकार का उल्लघंन- कोर्ट
बता दें समलैंगिक विवाह की अनुमति देने में सरकार पर सवाल उठाने वाले पांच जिला अदालतों में दायर छह मुकदमों में से एक का पहला फैसला हाईकोर्ट ने सुनाया। अदालत ने यह भी कहा कि अनुच्छेद 24 को समान लिंग के व्यक्तियों के बीच विवाह की गारंटी के रूप में समझा जा सकता है।
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हालांकि मामले में सुनवाई के दौरान जापानी सरकार ने तर्क दिया है कि संविधान में 'विवाह' शब्द केवल विपरीत लिंग के जोड़ों के बीच माना गया है। विशेष रूप से जापान सात समूह (जी7) का एकमात्र प्रमुख औद्योगिक देश बना हुआ है, जिसने एलजीबीटी समुदाय और उसके समर्थकों के बढ़ते दबाव के बावजूद समलैंगिक विवाह को वैध नहीं बनाया है।
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निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट ने रखा बरकरार
साप्पोरा हाईकोर्ट ने 2021 में निचली अदालत के ऐतिहासिक फैसले को बरकरार रखा। जिसमें कहा गया था कि समलैंगिक विवाह को मान्यता न देना संविधान के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है। गौरतलब है कि जापान में समलैंगिक जोड़े विवाह को लेकर लगातार सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
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समलैंगिक विवाह पर बैन समानता के अधिकार का उल्लघंन- कोर्ट
बता दें समलैंगिक विवाह की अनुमति देने में सरकार पर सवाल उठाने वाले पांच जिला अदालतों में दायर छह मुकदमों में से एक का पहला फैसला हाईकोर्ट ने सुनाया। अदालत ने यह भी कहा कि अनुच्छेद 24 को समान लिंग के व्यक्तियों के बीच विवाह की गारंटी के रूप में समझा जा सकता है।
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हालांकि मामले में सुनवाई के दौरान जापानी सरकार ने तर्क दिया है कि संविधान में 'विवाह' शब्द केवल विपरीत लिंग के जोड़ों के बीच माना गया है। विशेष रूप से जापान सात समूह (जी7) का एकमात्र प्रमुख औद्योगिक देश बना हुआ है, जिसने एलजीबीटी समुदाय और उसके समर्थकों के बढ़ते दबाव के बावजूद समलैंगिक विवाह को वैध नहीं बनाया है।