खाड़ी देशों पर ईरान का हमला जारी: सऊदी ने अब तक 438 ड्रोन और 36 मिसाइलें नष्ट की, अन्य देशों का हाल भी जानिए
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब अपने 19वें दिन में प्रवेश कर चुका है। ऐसे में इतने दिनों से जारी इस संघर्ष का बड़े पैमाने पर असर खाड़ी देशों पर देखने को मिला है। क्या सऊदी, क्या यूएई और कतर। ईरान के हमलों ने इन सभी देशों में रहने वाले लोगों को डर और चिंता में जीने के लिए मजबूर कर दिया है।
विस्तार
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-ब-दिन और भयावह होता जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के भीषण हमलों से दहक रहे मोर्चे पर ईरान भी इस्राइल और खाड़ी देशों में मैजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जोरदार पलटवार कर रहा है। मिसाइलों और ड्रोन की गरज के बीच यह संघर्ष अब 19वें दिन में प्रवेश कर चुका है और पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है। इसी बीच सऊदी अरब ने आंकड़ा जारी कर बताया कि संघर्ष शुरू होने के बाद से उसने अब तक 438 ड्रोन और 36 मिसाइलों को रोक दिया है।
सऊदी रक्षा मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि ये हमले बहुत बड़े पैमाने पर और लगातार हुए हैं। पिछले तीन हफ्तों से सऊदी हवाई सुरक्षा बल लगातार सतर्क हैं। सऊदी अरब में सबसे ज्यादा हमले पूर्वी प्रांत की तरफ हुए, जहां देश के बड़े तेल रिफाइनरी हैं। इसके बाद शैबाह के तेल क्षेत्र और रियाद से 80 किलोमीटर दूर अल-खारज में प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर मिसाइलें दागी गईं।
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खाड़ी के अन्य देशों की स्थिति भी गंभीर, समझिए आंकड़ें
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संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पर 165 से ज्यादा मिसाइलें और 541 ड्रोन हमले हुए।
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कुवैत पर 97 मिसाइल और 283 ड्रोन हमला किए गए।
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कतर और बहरीन भी कई बार हमलों की चपेट में आए।
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ओमान भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहा, ईरानी ड्रोन ने उसके दुक्म बंदरगाह को निशाना बनाया।
ईरान का दावा- अमेरिकी-इस्राइली सैन्य बेस को बना रहे निशाना
हालांकि इतने हमले और बड़े पैमाने पर नुकसान के बाद भी ईरान का कहना है कि उसका लक्ष्य केवल अमेरिकी और इस्राइली सैन्य ठिकाने हैं, न कि नागरिक या आर्थिक जगहें। लेकिन खाड़ी देशों की सरकारों ने इसे नकार दिया और कई देशों ने ईरानी राजदूतों को तलब कर विरोध जताया।
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सऊदी अरब ने इस्लामी विदेश मंत्रियों की बैठक भी बुलाई
दूसरी ओर बढ़ते संघर्ष को देखते हुए सऊदी अरब में बुधवार को अरब और इस्लामी विदेश मंत्रियों की आपात बैठक हुई। सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा कि बैठक का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सलाह-मशविरा और समन्वय बढ़ाना है ताकि पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनी रहे। ऐसे में विश्लेषकों का कहना है कि अगर हमले इसी तरह जारी रहे, तो राजनयिक समाधान का मौका तेजी से कम हो रहा है। हवाई सुरक्षा पर दबाव लगातार बढ़ रहा है और युद्धविराम की संभावना अभी दूर है।
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