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'दुनिया ने माना कि हमने अमेरिका को हराया': जंग के बीच ईरान का दावा; पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर एक रिपोर्ट

Sat, 22 Aug 2026 05:12 PM IST
शिवम गर्ग वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन/तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन/तेहरान Published by: शिवम गर्ग Updated Sat, 22 Aug 2026 05:12 PM IST
सार

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने दावा किया कि दुनिया ने अमेरिका पर ईरान की जीत स्वीकार कर ली है और अब युद्ध खत्म होना चाहिए। लेकिन अमेरिका का दबाव और होर्मुज का संकट जारी है। क्या जंग खत्म होने की राह खुलेगी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं... 

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Iran Claims World Has Accepted Its Victory Over US Amid Economic War and Golan Heights Row
पश्चिम एशिया में तनाव - फोटो : @PTI/अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने दावा किया है कि दुनिया ने मान लिया है कि ईरान ने अमेरिका के खिलाफ युद्ध जीत लिया है। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, पेजेशकियन ने कहा कि अब अमेरिका के साथ युद्ध खत्म होना चाहिए, क्योंकि पूरी दुनिया ईरान की जीत को स्वीकार कर चुकी है।

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यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन ईरान पर आर्थिक दबाव और प्रतिबंधों को और कड़ा करने की तैयारी में है। अमेरिका ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने और तेल एवं गैस टैंकरों के लिए रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने के लिए मजबूर करना चाहता है।

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क्या ईरान ने सच में युद्ध जीतने का दावा किया?

ईरानी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, पेजेशकियन ने कहा कि पूरी दुनिया ने हमारी जीत को स्वीकार किया है और अमेरिका से नफरत की जाती है। ईरानी राष्ट्रपति का यह बयान अमेरिका की ओर से बढ़ाए जा रहे आर्थिक दबाव के बीच आया है। ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ अभूतपूर्व आर्थिक कार्रवाई की बात कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान पर अभूतपूर्व स्तर की आर्थिक जंग और अलगाव थोपने की घोषणा की है। अमेरिका का उद्देश्य ईरानी नेतृत्व पर दबाव बढ़ाकर उसकी परमाणु गतिविधियों को रोकना और होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा पूरी तरह खोलना है।

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गोलान हाइट्स पर अमेरिका के रुख में क्यों दिखा विरोधाभास?

इसी बीच अमेरिका के तुर्किये में राजदूत और सीरिया के विशेष दूत टॉम बैरक की टिप्पणी ने गोलान हाइट्स को लेकर अमेरिकी नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार को एक इंटरव्यू में बैरक ने कहा कि इस्राइल अभी भी गोलान हाइट्स पर कब्जा किए हुए है और यह संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सीरिया से जुड़े गोलान क्षेत्र में इस्राइल का कब्जा अभी भी कायम है।

गोलान हाइट्स पर विवाद क्या है?

इस्राइल ने 1967 के युद्ध में सीरिया से गोलान हाइट्स पर कब्जा किया था और 1981 में इसे अपने क्षेत्र में मिला लिया। संयुक्त राष्ट्र इसे अब भी सीरियाई क्षेत्र का कब्जा किया हुआ हिस्सा मानता है और इस्राइल के कब्जे को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मान्यता नहीं देता। संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों में इस्राइल से 4 जून 1967 की स्थिति वाली सीमा तक पीछे हटने की मांग की गई है।

हालांकि, मार्च 2019 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक घोषणा पर हस्ताक्षर कर गोलान हाइट्स पर इस्राइल की संप्रभुता को अमेरिकी मान्यता दे दी थी। इस फैसले ने अमेरिका की दशकों पुरानी नीति को बदल दिया था, लेकिन इससे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत क्षेत्र की स्थिति नहीं बदली। इस महीने कोलंबिया भी गोलान हाइट्स पर इस्राइल की संप्रभुता को मान्यता देने वाला अमेरिका के बाद दूसरा देश बन गया।

टॉम बैरक के बयान पर क्यों मचा विवाद?

गोलान हाइट्स को लेकर बैरक की टिप्पणी के बाद शनिवार को अमेरिका में उनके खिलाफ आलोचना शुरू हो गई। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की समर्थक और रूढ़िवादी कार्यकर्ता लॉरा लूमर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बैरक की आलोचना करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। लूमर ने आरोप लगाया कि बैरक को अमेरिकी विदेश नीति की पर्याप्त समझ नहीं है। बैरक की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब ईरान युद्ध और व्यापक मध्य पूर्व में अमेरिकी नीति को लेकर पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है।

अब पश्चिम एशिया में क्या हालात?

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के जीत के दावे के बाद भी पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत नहीं हैं। अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव और अलगाव बढ़ाने की तैयारी में है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर संकट अब भी क्षेत्रीय और वैश्विक चिंता का बड़ा कारण बना हुआ है। इसी बीच गोलान हाइट्स पर अमेरिकी राजदूत टॉम बैरक की टिप्पणी ने इस्राइल-अमेरिका नीति को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। 



इसके साथ ही फ्रांस और सऊदी अरब होर्मुज के विकल्प के तौर पर नए व्यापार मार्ग, पाइपलाइन और रेल संपर्क विकसित करने पर चर्चा करने वाले हैं। यानी ईरान के बयान के बाद भी पश्चिम एशिया में तनाव, कूटनीतिक खींचतान और रणनीतिक हलचल लगातार जारी है।

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