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Iran: मिसाइल क्षमता ध्वस्त होने के अमेरिकी दावों के बीच जारी भीषण हमले, ड्रोन-मोबाइल लॉन्चर बने बड़ी चुनौती

एजेंसी, दोहा/वॉशिंगटन। Published by: Shivam Garg Updated Tue, 17 Mar 2026 05:08 AM IST
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सार

अमेरिका और इस्राइल के दावों के बावजूद ईरान मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे हुए है। विशेषज्ञों के अनुसार तेहरान के पास अभी भी पर्याप्त हथियार, मोबाइल लॉन्चर और रणनीतियां मौजूद हैं जो क्षेत्र में तनाव बनाए रख सकती हैं।

Iran Continues Missile and Drone Strikes Despite US Claims of Destroyed Capabilities
ईरान कर रहा भीषण हमले - फोटो : अमर उजाला प्रिन्ट/एजेंसी
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विस्तार

अमेरिका और इस्राइल का दावा है कि संयुक्त हमलों में ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है और उसके कई लॉन्चर नष्ट कर दिए गए हैं। इसके बावजूद ईरान अब भी क्षेत्रीय देशों और इस्राइल की दिशा में असरदार तरीके से मिसाइल और ड्रोन दाग रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार ईरान की हमला क्षमता जरूर घटी है, लेकिन उसके पास अभी भी इतने हथियार और वैकल्पिक रणनीतियां मौजूद हैं कि वह सीमित लेकिन रणनीतिक हमलों के जरिये पूरे क्षेत्र में तनाव बनाए रख सकता है।

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अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि अभियान एपिक फ्यूरी में ईरान की सैन्य क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है। ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता कार्यात्मक रूप से नष्ट हो चुकी है, उसकी नौसेना को युद्ध के लिहाज से अप्रभावी माना जा रहा है और अमेरिकी व इस्राइली वायुसेना ने ईरान के हवाई क्षेत्र पर लगभग पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार इन दावों के बावजूद सोमवार को कतर ने घोषणा की कि उसने ईरान से दागी गई मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया है।
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सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने भी मिसाइल अलर्ट जारी किए। अबू धाबी में एक मिसाइल के कार पर गिरने से एक व्यक्ति की मौत भी हुई। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी वजह यह है कि ईरान की पूरी क्षमता खत्म नहीं हुई है। उसके पास अभी भी मिसाइलों का बड़ा भंडार, मोबाइल लॉन्चर और विकेंद्रीकृत सैन्य ढांचा मौजूद है, जिससे वह सीमित स्तर पर हमले जारी रख सकता है।

हमले कम हुए पर लगा रहा सटीक निशाना
रिपोर्ट के अनुसार हालांकि युद्ध के शुरुआती दिनों की तुलना में ईरान के हमलों में स्पष्ट कमी आई है। संघर्ष के पहले 24 घंटों में ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात की ओर 167 मिसाइलें और 541 ड्रोन दागे थे। लेकिन युद्ध के 15वें दिन यह संख्या घटकर सिर्फ 26 मिसाइल और करीब 50 ड्रोन रह गई, यह आंकड़े यूएई के रक्षा मंत्रालय के बयानों के आधार पर संकलित किए गए हैं। इस्राइल पर हमलों में भी गिरावट आई है। शुरुआती दो दिनों में लगभग 100 प्रोजेक्टाइल दागे गए थे, जबकि हाल के दिनों में यह संख्या 15 से 20 सिमट गई है।पेंटागन ने भी कहा कि युद्ध के पहले दिन की तुलना में ईरानी मिसाइल लॉन्च 90 प्रतिशत और ड्रोन हमले 86 प्रतिशत तक घट गए हैं।

ईरान के पास क्षेत्र का सबसे बड़ा बैलिस्टिक मिसाइल भंडार
अमेरिकी खुफिया एजेंसी ऑफिस ऑफ द डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस ने 2022 में आकलन किया था कि ईरान के पास क्षेत्र का सबसे बड़ा बैलिस्टिक मिसाइल भंडार है। हालांकि इसकी सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं है, लेकिन इस्राइली खुफिया रिपोर्टों के अनुसार ईरान के पास लगभग 3000 मिसाइलें थीं। पिछले साल जून में हुए 12 दिन के युद्ध के बाद यह संख्या घटकर लगभग 2500 रह गई थी।

विशाल भूगोल और छिपे लॉन्चर बड़ी चुनौती...
वॉशिंगटन स्थित नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर डेविड डेस रोशेस के अनुसार, ईरान जैसे विशाल देश में सभी लॉन्चरों को पूरी तरह खत्म करना बेहद कठिन है, खासकर तब जब जमीन पर सैनिक तैनात न हों।उन्होंने कहा कि कई मिसाइलें युद्ध से पहले ही ऐसे गुप्त स्थानों पर छिपा दी गई थीं जो सैन्य ठिकानों से जुड़े नहीं थे। ऐसे लॉन्चरों की पहचान करना मुश्किल होता है।डेस रोशेस के अनुसार ईरान अब बड़े पैमाने पर मिसाइलों की बौछार करने की क्षमता खो चुका है। इसलिए वह एक समय में एक या दो मिसाइलें दागकर नागरिक या वाणिज्यिक ढांचों को निशाना बना रहा है।

ईरान की रणनीति : थकावट का युद्ध
जर्मनी के जर्मन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल एंड सिक्योरिटी अफेयर्स के विशेषज्ञ हामिदरेजा अजीजी के अनुसार तेहरान की रणनीति यह हो सकती है कि खाड़ी देश और इस्राइल अपनी रक्षात्मक क्षमता पहले खो दें, जबकि ईरान के पास मिसाइलें बची रहें। उनके अनुसार ईरान ने अपने मिसाइल ठिकानों और कमांड सिस्टम को विकेंद्रीकृत कर दिया है और अब वह अधिकतर मोबाइल लॉन्चरों का उपयोग कर रहा है, जिन्हें ढूंढना और निशाना बनाना मुश्किल होता है।

सस्ती ड्रोन तकनीक से दबाव की कोशिश
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की एक बड़ी ताकत उसके कम लागत वाले लेकिन प्रभावी ड्रोन हैं। जैसे शाहेद-136 ड्रोन अपेक्षाकृत सरल फैक्टरियों में बड़ी संख्या में बनाए जा सकते हैं और इन्हें जटिल लॉन्चरों की जरूरत भी नहीं होती। लगभग 185 किमी प्रति घंटा की गति वाले ये ड्रोन हेलीकॉप्टर से गिराए जा सकते हैं, फिर भी कई बार वे अमेरिकी और खाड़ी देशों की एयर डिफेंस प्रणाली को पार कर जाते हैं। हाल ही में फुजैरा औद्योगिक क्षेत्र में भी ड्रोन हमले से आग लगने की खबर आई।

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