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इस्लामाबाद में नहीं बनी बात: शांति वार्ता रही बेनतीजा तो क्यों मिमियाने लगा पाकिस्तान? US-ईरान से की ये मांग

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Devesh Tripathi Updated Sun, 12 Apr 2026 12:59 PM IST
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सार

अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता के बेनतीजा रहने पर पाकिस्तान के सुर अचानक से बदल गए हैं। जो पाकिस्तान पहले अमेरिका और ईरान को कूटनीति की मेज पर लाने के लिए अपनी तारीफ करने में जुटा था। वही, अब दोनों देशों से युद्धविराम को जारी रखने की मांग करते हुए आगे भी बातचीत में मदद करने की बात कह रहा है।

Ishaq Dar on failed US Iran Peace talks Islamabad Pakistan start whining demands West Asia Crisis
अमेरिका-ईरान शांति वार्ता - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम के बाद दोनों देशों को शांति वार्ता की मेज पर लाने के लिए पाकिस्तान अपनी पीठ खुद ही थपथपाने में जुटा था। हालांकि, इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता बेनतीजा रहने के बाद अब पाकिस्तान के सुर मिमियाने में बदल गए हैं।  
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पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने रविवार को कहा कि उनका देश ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता की मध्यस्थता जारी रखेगा। उन्होंने दोनों पक्षों से चल रहे युद्धविराम को बनाए रखने का आग्रह किया। 
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अमेरिका-ईरान से की ये अपील
इशाक डार ने मीडिया से छोटी सी बातचीत में बताया कि पिछले 24 घंटों में दोनों पक्षों के बीच गहन और रचनात्मक चर्चाओं के कई दौरों में पाकिस्तान ने मध्यस्थता की है। उनके साथ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी इस शांति वार्ता में शामिल हुए थे। डार ने प्रगति की उम्मीद जताते हुए कहा कि स्थायी शांति और क्षेत्रीय स्थिरता प्राप्त करने के लिए दोनों पक्षों को सकारात्मक भावना बनाए रखनी चाहिए।

युद्धविराम को बनाए रखें : इशाक डार
उप प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि दोनों पक्ष युद्धविराम के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखें। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच आगामी दिनों में भी जुड़ाव और संवाद की सुविधा प्रदान करने में अपनी भूमिका निभाता रहेगा। 

ईरान-अमेरिका के बीच बातचीत में कहां फंसा पेच?
शांति वार्ता में अमेरिका की ओर से ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को पूरी तरह से खत्म करने और होर्मुज को तत्काल खोलने की मांग की गई थी। हालांकि, ईरान इन मांगों पर तैयार नहीं हुआ। ईरानी समाचार एजेंसी ने बताया कि तेहरान ने अमेरिका की मांगों को खारिज कर दिया, क्योंकि वॉशिंगटन जिन चीजों को संघर्ष से हासिल नहीं कर सका, उन्हें बातचीत के जरिए हासिल करने की कोशिश कर रहा था।

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सीजफायर पर संशय, गहराएगा ऊर्जा संकट
इस वार्ता की विफलता ने दो सप्ताह के नाजुक युद्धविराम की प्रभावशीलता और वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की संभावनाओं पर संदेह पैदा कर दिया है। पाकिस्तान की भूमिका इस क्षेत्र में तनाव कम करने के प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है।

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