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'हमें खेल मत सिखाइए': रूसी तेल पर घेरने वालों को जयशंकर का जवाब, यूरोप-अमेरिका की दोहरी नीति पर उठाए सवाल

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हेलसिंकी Published by: शिवम गर्ग Updated Fri, 12 Jun 2026 03:02 AM IST
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सार

S. Jaishankar: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस से तेल खरीदने को लेकर पश्चिमी देशों की आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि भारत ने हमेशा लागत और उपलब्धता के आधार पर फैसले लिए हैं। उन्होंने यूरोप और अमेरिका की नीतियों में विरोधाभास का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत को नैतिकता का पाठ न पढ़ाया जाए। जयशंकर ने दोहराया कि ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित भारत की प्राथमिकता हैं। आइए, विस्तार से पूरे मामल को समझते हैं...

Jaishankar Calls for Resilient Supply Chains and Strong Diplomacy Amid Global Conflicts at Finland Forum
फिनलैंड में जयशंकर का बड़ा संदेश। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने फिनलैंड में आयोजित कुल्तारांता वार्ता में रूस से तेल खरीदने को लेकर पश्चिमी देशों की आलोचना का कड़ा जवाब दिया है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने साफ कहा कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेता है। जयशंकर ने यह भी संकेत दिया कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान यूरोप और अमेरिका की नीतियों में कई विरोधाभास रहे हैं, इसलिए भारत को नैतिकता का पाठ पढ़ाने की कोशिश उचित नहीं है। उनके बयान को भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और ऊर्जा रणनीति के मजबूत बचाव के रूप में देखा जा रहा है।



फिनलैंड में 'उभरती शक्तियां और नई भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा' विषय पर चर्चा के दौरान एक पत्रकार ने भारत पर रूस के प्रति नरम रुख अपनाने और रूस से तेल खरीदने का आरोप लगाया। इसके जवाब में जयशंकर ने कहा कि भारत ने हमेशा लागत और उपलब्धता के आधार पर तेल खरीदा है। उन्होंने बताया कि उस समय यूरोपीय देश मध्य-पूर्व से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहे थे, जो भारत का पारंपरिक आपूर्तिकर्ता रहा है। ऐसे में बाजार की परिस्थितियों ने भारत को रूस से तेल खरीदने की दिशा में आगे बढ़ाया।
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क्या रूसी तेल खरीदना भारत की मजबूरी थी?

जयशंकर ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव आया था। यूरोपीय देशों द्वारा मध्य-पूर्व के तेल पर अधिक निर्भरता बढ़ाने के कारण भारत के सामने वैकल्पिक स्रोत तलाशने की आवश्यकता पैदा हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने कोई राजनीतिक संदेश देने के लिए नहीं, बल्कि अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से तेल खरीदा। उनके अनुसार किसी भी सरकार की पहली जिम्मेदारी अपने नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा करना होती है।

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यूरोप को लेकर जयशंकर ने क्या सवाल उठाए?

विदेश मंत्री ने यूरोप की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी यूरोपीय देश पर भारतीय हथियारों से हमला नहीं हुआ है, लेकिन भारत ने वर्षों से ऐसे हालात देखे हैं जहां यूरोपीय देशों के हथियार भारत के खिलाफ इस्तेमाल किए गए। जयशंकर ने कहा कि भारत ने कभी यूरोप की सुरक्षा को खतरे में नहीं डाला, इसलिए भारत की चिंताओं को भी समान गंभीरता से समझा जाना चाहिए। उनका यह बयान पश्चिमी देशों की सुरक्षा और नैतिकता संबंधी दलीलों पर सीधा जवाब माना जा रहा है।


अमेरिका को लेकर 'खेल' वाली टिप्पणी क्यों की?

जयशंकर ने कहा कि वर्ष 2022 में खुद अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया था ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर रह सके और तेल की कीमतें नियंत्रण में रहें। उन्होंने कहा कि एक समय रूसी तेल खरीदने पर दबाव बनाया जाता है और दूसरे समय उसी नीति में बदलाव कर दिया जाता है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि दुनिया के सभी देश समझते हैं कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति कैसे काम करती है और इसे केवल सिद्धांतों या नैतिकता का प्रश्न बताना सही नहीं होगा। उनके इस बयान को अमेरिका और पश्चिमी देशों की बदलती नीतियों पर तीखा कटाक्ष माना जा रहा है।

विदेश मंत्री जयशंकर की मुख्य बातें-

  • जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक संघर्षों से लागत बढ़ रही है और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
  • अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संघर्षों के प्रभाव को कम करने के लिए लगातार प्रयास करने चाहिए।
  • कूटनीति के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना समय की जरूरत है।
  • दुनिया को वैश्विक स्थिरता और शांति के लिए मिलकर काम करना होगा।
  • सुरक्षित, मजबूत और विविधीकृत सप्लाई चेन को भविष्य की आर्थिक जरूरत बताया।
  • डी-रिस्किंग और डाइवर्सिफिकेशन की नीति को आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बताया।
  • भारत की ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हितों पर आधारित है।
  • ऊर्जा खरीद में उपलब्धता और वहनीयता को सबसे महत्वपूर्ण मानदंड बताया।
  • पश्चिम एशिया को भारत की विदेश नीति का अहम स्तंभ बताया।
  • खाड़ी क्षेत्र को ऊर्जा, रणनीतिक साझेदारी और जन-जन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया।
  • भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों में लगातार मजबूती आने की बात कही।
  • भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत पूरी होने का उल्लेख किया।

क्या भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम है?

जयशंकर के बयान से यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि भारत अपनी विदेश नीति और आर्थिक फैसले किसी बाहरी दबाव के आधार पर नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार तय करता है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों को केवल राजनीतिक या नैतिक चश्मे से नहीं देखा जा सकता। भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों के लिए सस्ती और स्थिर ऊर्जा उपलब्ध कराना है। यही कारण है कि नई दिल्ली वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए व्यावहारिक और संतुलित नीति अपनाने पर जोर देती रही है।
 

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