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Japan: ओसाका में फूड पॉइजनिंग से 600 से अधिक छात्र और स्टाफ बीमार, स्कूल के लंच में मिली ब्रेड बनी वजह
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 26 Mar 2026 01:49 PM IST
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सार
जापान के ओसाका में फूड पॉइजनिंग की वजह से 600 से ज्यादा छात्र और स्टाफ बीमार हो गए हैं। जांच में स्कूल की ब्रेड में नोरोवायरस मिला है। प्रशासन ने संबंधित कंपनी पर पांच दिनों की रोक लगा दी है और मामले की जांच जारी है।
फूड पॉयजनिंग (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : iStock
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विस्तार
जापान के ओसाका प्रांत में फूड पॉइजनिंग का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां के कुमातोरी टाउन के कई स्कूलों में 600 से ज्यादा छात्र और स्टाफ सदस्य बीमार पड़ गए हैं। सार्वजनिक प्रसारक एनएचके ने गुरुवार को इस बारे में जानकारी दी। शहर के आठ प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूलों में पिछले गुरुवार से दस्त और उल्टी जैसे लक्षण लगातार सामने आ रहे हैं। मंगलवार तक प्रभावित लोगों की कुल संख्या 633 पहुंच गई है।
खाने में दी गई ब्रेड से फैली बिमारी
स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ने कुछ बीमार छात्रों की जांच की, जिसमें नोरोवायरस की पुष्टि हुई है। शिन्हुआ समाचार एजेंसी मुताबिक यह वायरस उस कंपनी के कर्मचारियों में भी मिला है जो शहर के सभी स्कूलों में लंच के लिए ब्रेड की सप्लाई करती थी। इन नतीजों के आधार पर सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र ने यह निष्कर्ष निकाला है कि स्कूल के खाने में दी गई ब्रेड ही इस बीमारी की मुख्य वजह है। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए संबंधित निर्माता कंपनी के कामकाज पर पांच दिनों की रोक लगा दी है।
ये भी पढ़ें: क्या है 82वीं एयरबोर्न डिवीजन: ईरान में उतर सकती है ये खतरनाक टुकड़ी, दूसरे विश्व युद्ध में अमेरिका की जीत में भूमिका
क्या होता है फूड पॉइजनिंग?
फूड पॉइजनिंग एक तरह की बीमारी है जो दूषित खाना खाने या पानी पीने से होती है। इसका मुख्य कारण भोजन में मौजूद कीटाणु, हानिकारक बैक्टीरिया या अन्य दूषित तत्व होते हैं। इसके लक्षणों में पेट खराब होना, दस्त और उल्टी शामिल हैं। ये लक्षण अक्सर खाना खाने के कुछ घंटों या दिनों के भीतर शुरू हो सकते हैं।
फूड पॉइजनिंग के लक्षण
ज्यादातर मामलों में फूड पॉइजनिंग के लक्षण हल्के होते हैं और लोग बिना किसी विशेष इलाज के ठीक हो जाते हैं। हालांकि, कभी-कभी यह गंभीर बीमारी या अन्य शारीरिक समस्याओं का कारण भी बन सकता है। इसके सामान्य लक्षणों में पेट दर्द, मरोड़ और बुखार भी शामिल हैं। कुछ मामलों में दस्त के साथ खून भी आ सकता है।
फूड पॉइजनिंग से फैलने वाले संक्रमण काफी संक्रामक होते हैं। जब कोई व्यक्ति संक्रमित होता है, तो वह उल्टी या मल के सूक्ष्म कणों के माध्यम से कीटाणु फैला सकता है। ये कण सतहों पर या उंगलियों पर लंबे समय तक रह सकते हैं। अगर कोई दूसरा व्यक्ति उन सतहों को छूता है या संक्रमित व्यक्ति किसी के भोजन को छूता है, तो यह बीमारी दूसरे व्यक्ति तक पहुंच जाती है। स्कूलों और क्रूज शिप जैसी जगहों पर, जहां लोग एक-दूसरे के करीब रहते हैं, यह संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है। फिलहाल इस बात की निगरानी कर रही हैं कि संक्रमण और ज्यादा न फैले।
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खाने में दी गई ब्रेड से फैली बिमारी
स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ने कुछ बीमार छात्रों की जांच की, जिसमें नोरोवायरस की पुष्टि हुई है। शिन्हुआ समाचार एजेंसी मुताबिक यह वायरस उस कंपनी के कर्मचारियों में भी मिला है जो शहर के सभी स्कूलों में लंच के लिए ब्रेड की सप्लाई करती थी। इन नतीजों के आधार पर सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र ने यह निष्कर्ष निकाला है कि स्कूल के खाने में दी गई ब्रेड ही इस बीमारी की मुख्य वजह है। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए संबंधित निर्माता कंपनी के कामकाज पर पांच दिनों की रोक लगा दी है।
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क्या होता है फूड पॉइजनिंग?
फूड पॉइजनिंग एक तरह की बीमारी है जो दूषित खाना खाने या पानी पीने से होती है। इसका मुख्य कारण भोजन में मौजूद कीटाणु, हानिकारक बैक्टीरिया या अन्य दूषित तत्व होते हैं। इसके लक्षणों में पेट खराब होना, दस्त और उल्टी शामिल हैं। ये लक्षण अक्सर खाना खाने के कुछ घंटों या दिनों के भीतर शुरू हो सकते हैं।
फूड पॉइजनिंग के लक्षण
ज्यादातर मामलों में फूड पॉइजनिंग के लक्षण हल्के होते हैं और लोग बिना किसी विशेष इलाज के ठीक हो जाते हैं। हालांकि, कभी-कभी यह गंभीर बीमारी या अन्य शारीरिक समस्याओं का कारण भी बन सकता है। इसके सामान्य लक्षणों में पेट दर्द, मरोड़ और बुखार भी शामिल हैं। कुछ मामलों में दस्त के साथ खून भी आ सकता है।
फूड पॉइजनिंग से फैलने वाले संक्रमण काफी संक्रामक होते हैं। जब कोई व्यक्ति संक्रमित होता है, तो वह उल्टी या मल के सूक्ष्म कणों के माध्यम से कीटाणु फैला सकता है। ये कण सतहों पर या उंगलियों पर लंबे समय तक रह सकते हैं। अगर कोई दूसरा व्यक्ति उन सतहों को छूता है या संक्रमित व्यक्ति किसी के भोजन को छूता है, तो यह बीमारी दूसरे व्यक्ति तक पहुंच जाती है। स्कूलों और क्रूज शिप जैसी जगहों पर, जहां लोग एक-दूसरे के करीब रहते हैं, यह संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है। फिलहाल इस बात की निगरानी कर रही हैं कि संक्रमण और ज्यादा न फैले।
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