नेपाल आपदा में मदद: इन नंबरों पर फोन से कंट्रोल रूम में बात करें, बाढ़ की विभीषिका बयां कर कांप रहे पीड़ित
नेपाल में आए भीषण सैलाब में मरने वालों की संख्या बढ़ रही है। नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के अनुसार, 290 भारतीयों समेत 1,468 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है कि मृतकों में कितने भारतीय हैं। पीड़ितों ने जो आंखों-देखी बयां की है, वो सिहरन पैदा करने वाली है।
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विस्तार
नेपाल में आए भीषण सैलाब की चपेट में आकर करीब 400 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। 30 देशों के 1400 से अधिक लापता लोगों में 290 भारतीय भी शामिल हैं। विदेश मंत्रालय ने भारतीयों की मदद के लिए कंट्रोल रूम का नंबर जारी किया है। पीड़ित परिवार, लापता स्वजनों को तलाश रहे लोग काठमांडो में भारतीय दूतावास के नंबर +9779851316807, +9779709107500 और +9779810326117 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा +911123088718, +911123088719, +919968291988 (व्हाट्सएप) इन नंबरों पर भी सूचना और मदद मांगने के लिए संपर्क साधा जा सकता है। विपदा की इस घड़ी में नेपाल से सटे बिहार और उत्तर प्रदेश में अलर्ट जारी किया गया है। नेपाल के चितवन से राजन राय के अलावा शशिकल, बिस्किला ने बयां किया आंखों देखा हाल।
बिहार और उत्तर प्रदेश में अलर्ट, एक सितंबर तक पानी का दबाव चरम पर होगा।
इस बीच, भोटेकोशी नदी के निचले इलाकों में बाढ़ का नया खतरा पैदा हो गया है। नेपाल के हाइड्रोलॉजी और मौसम विज्ञान विभाग ने बताया, चीन ने तिब्बत में छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास नई बैरियर झील बनने की जानकारी दी है। दोनों नदियां नेपाल में भोटेकोशी का हिस्सा बनती हैं। झील में बृहस्पतिवार सुबह तक 20 लाख घनमीटर पानी जमा हो चुका था और तीन दिन में इसके 50 लाख घनमीटर पहुंचने की आशंका है। एक सितंबर तक पानी का दबाव चरम पर होगा। इससे फिर सैलाब आ सकता है। विभाग ने लोगों से भोटेकोशी-त्रिशूली नदियों से दूर सुरक्षित जगहों पर रहने की अपील की है। खोज व बचाव अभियान में शामिल लोगों को भी सतर्क कर दिया गया है। हालात को देखते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश में अलर्ट है। दोनों राज्यों में सतर्कता बरती जा रही है।
- मलबे में दबे शवों का मिलना लगातार जारी।
- पोस्टर-फोटो लेकर अस्पतालों के बाहर अपनों की तलाश कर रहे सैकड़ों लोग।
- वर्दी में दिखी मां जैसी ममता, महिला सैनिकों ने बच्चों को बचाया।
- रूस, अमेरिका, जर्मनी समेत 30+ देशों के 1400 से अधिक नागरिक लापता।
- सैकड़ों पर्यटकों से टूटा संपर्क, अपनों की तलाश में भटक रहे लोग।
180 किमी/घंटे की रफ्तार से आया था सैलाब, बचने का मौका तक न मिला
चीनी सरकार के भूविज्ञानी गुओ झाओचेंग ने बताया, बर्फ खिसकने से भोटेकोशी में जो सैलाब आया था, उसकी रफ्तार लगभग 50 मीटर प्रति सेकंड यानी 180 किमी/घंटा थी। इससे लोगों को बचने का मौका ही नहीं मिला। कीचड़ का यह फैलाव करीब 20 किलोमीटर तक था।
सदियों में पहली बार हुआ ऐसा
नेपाल की बागमती नदी तल से 100 मीटर की ऊंचाई पर गांव में भी पानी घुस गया। यहां रहने वाले अर्जुन पौडेल के अनुसार, उनका गांव ‘सोले’ और ‘तुप्चे’ नदी के तल से लगभग 100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित थे। सदियों के इतिहास में नदी का पानी कभी इतनी ऊंचाई तक नहीं पहुंचा था। लेकिन 26 अगस्त को आए सैलाब ने इन सुरक्षित माने जाने वाले गांवों को कुछ ही मिनटों में मलबे के ढेर में बदल दिया। एक फोन कॉल और खत्म हुआ पूरा परिवार काठमांडू में दफ्तर जा रहे अर्जुन को जब गांव से फोन आए, तो तबाही का मंजर सामने आया। उनकी बड़ी चाची, भाई मधु, भाभी, दूसरी चाची, नाती सिजन और पत्नी समेत कई रिश्तेदार पानी में बह गए। मामा जो सुबह मवेशियों के लिए घास काटने गए थे, कभी नहीं लौटे। उनके पत्रकार साथी निरंजन के चाचा ने रोते हुए बताया कि निरंजन के माता-पिता, चाचा-चाची और छोटी बहन हिमानी, सब कुछ पानी लील गया। उनका अंतिम वाक्य था: हम पूरी तरह खत्म हो गए, अर्जुन।
फोन करने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं
शशिकला खतिवड़ा अपने पति दीपक रिमाल की तलाश में पहुंचीं, जो मैलुंग स्थित त्रिशूली 3ए हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट में काम करते हैं। बुधवार शाम करीब 4 बजे दीपक ने संदेश भेजा था कि वे 35 साथियों के साथ सुरंग में सुरक्षित हैं, लेकिन गेट बंद होने के कारण बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। खतिवड़ा ने कहा, मैंने बुधवार सुबह लगभग 8 बजे उन्हें फोन करने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। जब मैंने दोपहर में कॉल किया, तो उनका मोबाइल फोन बंद था। श्रमिक सुबह करीब 7 बजे सुरंग में प्रवेश करते थे और दोपहर के भोजन के लिए 12 बजे बाहर आते थे।
चीन से आयातित इलेक्ट्रिक गाड़ियां लाने गए थे, अब...
रसुवा की 29 वर्षीय बिस्किला तमांग अपने पति सोम बहादुर घले की तलाश में हैं, जो बुधवार सुबह से संपर्क से बाहर हैं। वह चीन से आयातित इलेक्ट्रिक गाड़ियां लाने रसुवा कस्टम गए थे। बिस्किला ने रोते हुए बताया, दो दिन हो गए हैं और मेरे पति की कोई खबर नहीं है। न तो इस बात का कोई सुराग है कि वह जीवित हैं और न ही उनका शव मिला है। वह अपने दोस्तों के साथ रात में तिमुरे में रुके थे। उसके बाद से उनसे कोई संपर्क नहीं हुआ है।
भयावहता...आपदा की सैटेलाइट तस्वीरों ने दिखाया तबाही का हाल
घायलों से अस्पताल फुल हो चुके, शव गृह में नहीं बची जगह
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से भारी तबाही के बाद बृहस्पतिवार को सैकड़ों लोग अपने लापता परिजनों और दोस्तों की तलाश में विभिन्न अस्पतालों के बाहर जमा हुए। काठमांडो स्थित त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल के बाहर कई परिवार अपने लापता रिश्तेदारों के फोटो, पते और मोबाइल नंबर वाले पोस्टर लेकर लोगों से मदद मांगते नजर आए। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने अस्पतालों में बचाए गए घायलों और मृतकों की सूचियां व तस्वीरें लगाई हैं। इसके साथ ही लापता लोगों की जानकारी दर्ज करने के लिए विशेष हेल्प डेस्क भी बनाए गए हैं। काठमांडू के बीर अस्पताल, नेशनल ट्रॉमा सेंटर और नुवाकोट के त्रिशूली अस्पताल समेत कई चिकित्सा केंद्रों के आपातकालीन वार्ड घायलों से भरे हुए हैं। चितवन के भरतपुर अस्पताल में स्थिति बेहद गंभीर हो गई है, जहां शवगृह (मोर्चरी) में जगह कम पड़ने लगी है।
80 पुल और 42 किमी सड़क आपदा में घ्वस्त
नेपाल के भोटे कोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में ऊंची चोटियों से उतरी आपदा अपने पीछे भयावह तबाही और बर्बादी का मंजर छोड़ गई है। त्रिशूली बाजार और उसके आसपास लगभग 60 घर बह गए हैं, जबकि त्रिशूली नदी पर बने दो मोटर योग्य पुल भी बह गए। पास के देवीघाट क्षेत्र में भी भारी नुकसान हुआ है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बाढ़ से परिवहन ढांचे को भारी नुकसान हुआ है। इसके तहत 35 मोटर योग्य पुल, 45 सस्पेंशन ब्रिज और लगभग 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। कई स्थानों पर वाहन बह गए या मलबे के नीचे दब गए।
ग्लेशियर से जुड़ी आपदाएं अब भी दहलाती हैं
- जून 2013, केदारनाथ
- केदारनाथ में चोराबाड़ी ग्लेशियर झील टूट गई थी। इससे मंदाकिनी नदी में पानी, कीचड़ और पत्थरों की एक बड़ी दीवार बन गई। इसमें हजारों लोग मारे गए थे। शहर पूरी तरह तबाह हो गया था।
- 2021-चमोली, भारत...
- उत्तराखंड में नंदा देवी के पास रौंटी चोटी से बर्फ का बड़ा हिस्सा टूटकर घाटी में गिरा। इससे अचानक भीषण बाढ़ आ गई। इस आपदा में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई।
- 1981-साइरेनमा को,
- तिब्बत... चीन-नेपाल सीमा से करीब ग्लेशियर की एक झील में बर्फ का बड़ा हिस्सा गिर गया। दो करोड़ घन मीटर पानी, बर्फ और मलबा : नेपाल की ओर तेजी से बह निकला। 200 लोग मारे गए।
- 1970-यूंगाय, पेरू...
- 7.9 तीव्रता के भूकंप ने के बाद चट्टानों का विशाल मलबा 335 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आया। करीब 25,000 लोगों की मौत हुई। भूकंप समेत कुल मृतकों की संख्या 50,000 से अधिक थी।
- 2026-नेपाल-तिब्बत सीमा..
- ग्लेशियर का 2000 फीट का टुकड़ा टूटकर लहेंदे खोला नदी में जा गिरा और तेज बहाव के साथ आगे बढ़ा। नेपाल में भारी तबाही। 359 लोगों की मौत हो गई।
स्वजनों की आस में आंखों, कुशलता की प्रार्थना और दुआओं में सजदे...
नेपाल की आपदा में अपनों को खोने की आशंका से जूझ रहे लोग, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु समेत कई प्रदेशों में फैले हैं। पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में रहने वाले पंकज बुच्छा ने बताया कि परिवार आपदा के बीच नेपाल में मौजूद अपने रिश्तेदारों से संपर्क नहीं कर पा रहा है। अचानक बहुत सारा पानी आ गया। यहां तक कि बर्तन भी पानी में बह गए। 3-4 मंजिला इमारतें भी ढह गई हैं। संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। यह प्रकृति का प्रकोप है, भारी नुकसान हुआ है।
मानसरोवर यात्रा पर गया दंपती लापता
गुजरात के अहमदाबाद में रहने वाला परिवार भी नेपाल के जलप्रलय से प्रभावित हुआ है। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए दंपती के लापता होने से व्याकुल परिवार के सदस्य उत्पल पटेल ने कहा, मेरे छोटे भाई और भाभी 21 तारीख को न्यूजीलैंड से कैलाश मानसरोवर के लिए रवाना हुए थे... उन्हें 26 तारीख की सुबह चीन लौटना था। घटना के समय वे आव्रजन विभाग में थे। हम अभी तक उनसे संपर्क नहीं कर पाए हैं। सरकार, विधायक और हमारे सांसद हमारे संपर्क में हैं। प्रयास जारी हैं।
दो बसें खाई में गिरीं, तमिलनाडु के यात्री का कटा संपर्क
तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली से नेपाल गए लोगों से भी संपर्क कटा हुआ है। नेपाल में अचानक आई बाढ़ के कारण परिवार के सदस्यों के फंसे होने को लेकर स्थानीय वकील मनोहरन ने बताया... 'मेरी भाभी, अपने दो और रिश्तेदारों के साथ, कैलाश मानसरोवर यात्रा में शामिल हुई थीं... कल दोपहर करीब हमें दो तस्वीरों और वॉइस मैसेज के साथ सूचना मिली कि एक भीषण आपदा आई है और वे सुरक्षित हैं। भाभी वाली बस में 17 लोग और तीन क्रू मेंबर भी सवार थे। दो और बसें तिब्बत की ओर जा रही थीं... वे दोनों बसें खाई में गिर गईं... आशा है कि इन लोगों को बचा लिया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि मृतकों को भारत के पैतृक स्थानों पर वापस लाया जाएगा। केंद्र और राज्य सरकारें तीर्थयात्रियों की मदद के लिए प्रयास कर रही हैं।