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बालेंद्र ने चार बार PM रहे ओली को कैसे हराया?: नेपाल चुनाव में पारंपरिक दलों को झटका, किन मुद्दों का दिखा असर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू।
Published by: Nirmal Kant
Updated Sat, 07 Mar 2026 08:22 PM IST
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सार
नेपाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है, जहां रैपर से नेता बने बालेंद्र शाह ने चार बार प्रधानमंत्री रह चुके केपी शर्मा ओली को भारी मतों से हरा दिया। इस जीत के साथ उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी सरकार बनाने की ओर बढ़ रही है और पारंपरिक दलों को बड़ा झटका लगा है। पढ़िये रिपोर्ट-
बालेंद्र शाह, नेता, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
नेपाल में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के नेता बालेंद्र शाह ने शनिवार को चार बार प्रधानमंत्री रह चुके केपी शर्मा ओली को भारी मतों से हरा दिया। इसके साथ ही आरएसपी देश में अगली सरकार बनाने की ओर बढ़ रही है। पिछले साल जेन-जी के हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद यह पहला आम चुनाव था, जिसमें परिवारवाद को खत्म करने और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन की मांग उठी थी। इन चुनावों में पारंपरिक राजनीतिक दलों को बड़ा झटका लगा है।
बालेंद्र ने भारी मतों से केपी शर्मा ओली को हराया
रैपर से नेता बने बालेंद्र शाह 'बालेन' ने झापा-5 सीट पर नेपाल की पुरानी पार्टी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली को करीब 50 हजार वोटों से हराया। निर्वाचन आयोग के अनुसार 35 साल के बालेन को 68,348 वोट मिले, जबकि 74 साल के ओली को 18,734 वोट मिले। निर्वाचन आयोग के मुताबिक, 2022 में बनाई गई आरएसपी ने घोषित 78 सीटों में से 62 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है।
कौन से मुद्दे चुनाव पर असर डालते दिखे?
आंकड़ों के अनुसार, आरएसपी ने काठमांडू जिले की सभी 10 सीटों पर जीत दर्ज की है। साथ ही देश भर में करीब 60 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। मतदाताओं को भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई, भाई-भतीजावाद खत्म करने और राजनीतिक नेतृत्व में परिवारवाद जैसे मुद्दे ज्यादा असर डालते दिखे। इसी वजह से पारंपरिक दल मतदाताओं को प्रभावित करने में पीछे रह गए।
अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं बालेंद्र?
35 वर्षीय इंजीनियर, रैपर और अब नेता बने बालेन के नेपाल के अगले प्रधानमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। यह नतीजे स्थापित राजनीतिक दलों के प्रति जनता के असंतोष को भी दिखाते हैं। पिछले 18 वर्षों में नेपाल में 14 सरकारें बन चुकी हैं।
ये भी पढ़ें: जिनपिंग ने सेना को क्यों पढ़ाया सियासी निष्ठा पाठ? भ्रष्टाचार में घिरे थे कई अफसर; जानिए मामला
ऐतिहासिक जनादेश के पीछे प्रवासियों की भूमिका
नेपाल के ऐतिहासिक जनादेश के पीछे प्रवासियों के समर्थन की भी भूमिका है। इस देश की राजनीति और चुनाव परिणाम से जुड़ी रिपोर्ट्स के मुताबिक नेपाली डायस्पोरा (प्रवासी) से मिली फंडिंग ने बालेंद्र शाह और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के चुनाव प्रचार को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभाई। आरएसपी पदाधिकारियों का कहना है कि नेपाल से बाहर, खासकर अमेरिका में नेपालियों से बड़े दान मिले। बड़ी रैलियों और चुनाव प्रचार अभियान में इससे मदद मिली। मीडिया स्ट्रैटेजी के तहत उन्होंने लगभग हर आठ दिन में एक बड़ा भाषण दिया। 650 से अधिक लोगों की सोशल मीडिया टीम ने उनके संदेशों को पूरे देश में पहुंचाया।
कैसे गिरी थी ओली के नेतृत्व वाली सरकार?
पिछले साल 8 और 9 सितंबर को जेन-जी ने दो दिन तक हिंसक विरोध प्रदर्शन किए थे। इन प्रदर्शनों के बाद नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। उस समय वह नेपाली कांग्रेस के समर्थन वाली गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे थे, जिसके पास लगभग दो-तिहाई बहुमत था।
ओली के पद छोड़ने के बाद अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए बालेन का नाम सामने आया था। लेकिन उन्होंने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया था। उन्होंने कहा था कि वह पूर्ण कार्यकाल के लिए संसदीय चुनाव लड़ना पसंद करेंगे। जनवरी में वह आरएसपी में शामिल हुए और जल्द ही उन्हें पार्टी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। चुनाव अभियान के दौरान जेन-जी ने भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई, बेहतर शासन, भाई-भतीजावाद खत्म करने और राजनीतिक नेतृत्व में पीढ़ीगत बदलाव जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
नेपाल की संसद में कुल 275 सदस्य होते हैं। इनमें से 165 सदस्य प्रत्यक्ष मतदान से चुने जाते हैं, जबकि 110 सदस्य अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से चुने जाते हैं। प्रत्यक्ष मतदान के तहत 165 सीटों के लिए करीब 3,400 उम्मीदवार मैदान में थे। जबकि अनुपातिक प्रणाली के तहत 110 सीटों के लिए 3,135 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा। अनुपातिक मतदान प्रणाली में भी आरएसपी आगे चल रही है। पार्टी को अब तक 1,26,503 वोट मिले हैं। नेपाली कांग्रेस को 38,343, यूएमएल को 28,721, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी को 10,962, नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी को 10,794 और श्रम शक्ति पार्टी को 6,474 वोट मिले हैं।
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बालेंद्र ने भारी मतों से केपी शर्मा ओली को हराया
रैपर से नेता बने बालेंद्र शाह 'बालेन' ने झापा-5 सीट पर नेपाल की पुरानी पार्टी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली को करीब 50 हजार वोटों से हराया। निर्वाचन आयोग के अनुसार 35 साल के बालेन को 68,348 वोट मिले, जबकि 74 साल के ओली को 18,734 वोट मिले। निर्वाचन आयोग के मुताबिक, 2022 में बनाई गई आरएसपी ने घोषित 78 सीटों में से 62 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है।
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कौन से मुद्दे चुनाव पर असर डालते दिखे?
आंकड़ों के अनुसार, आरएसपी ने काठमांडू जिले की सभी 10 सीटों पर जीत दर्ज की है। साथ ही देश भर में करीब 60 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। मतदाताओं को भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई, भाई-भतीजावाद खत्म करने और राजनीतिक नेतृत्व में परिवारवाद जैसे मुद्दे ज्यादा असर डालते दिखे। इसी वजह से पारंपरिक दल मतदाताओं को प्रभावित करने में पीछे रह गए।
अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं बालेंद्र?
35 वर्षीय इंजीनियर, रैपर और अब नेता बने बालेन के नेपाल के अगले प्रधानमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। यह नतीजे स्थापित राजनीतिक दलों के प्रति जनता के असंतोष को भी दिखाते हैं। पिछले 18 वर्षों में नेपाल में 14 सरकारें बन चुकी हैं।
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ऐतिहासिक जनादेश के पीछे प्रवासियों की भूमिका
नेपाल के ऐतिहासिक जनादेश के पीछे प्रवासियों के समर्थन की भी भूमिका है। इस देश की राजनीति और चुनाव परिणाम से जुड़ी रिपोर्ट्स के मुताबिक नेपाली डायस्पोरा (प्रवासी) से मिली फंडिंग ने बालेंद्र शाह और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के चुनाव प्रचार को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभाई। आरएसपी पदाधिकारियों का कहना है कि नेपाल से बाहर, खासकर अमेरिका में नेपालियों से बड़े दान मिले। बड़ी रैलियों और चुनाव प्रचार अभियान में इससे मदद मिली। मीडिया स्ट्रैटेजी के तहत उन्होंने लगभग हर आठ दिन में एक बड़ा भाषण दिया। 650 से अधिक लोगों की सोशल मीडिया टीम ने उनके संदेशों को पूरे देश में पहुंचाया।
कैसे गिरी थी ओली के नेतृत्व वाली सरकार?
पिछले साल 8 और 9 सितंबर को जेन-जी ने दो दिन तक हिंसक विरोध प्रदर्शन किए थे। इन प्रदर्शनों के बाद नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। उस समय वह नेपाली कांग्रेस के समर्थन वाली गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे थे, जिसके पास लगभग दो-तिहाई बहुमत था।
ओली के पद छोड़ने के बाद अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए बालेन का नाम सामने आया था। लेकिन उन्होंने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया था। उन्होंने कहा था कि वह पूर्ण कार्यकाल के लिए संसदीय चुनाव लड़ना पसंद करेंगे। जनवरी में वह आरएसपी में शामिल हुए और जल्द ही उन्हें पार्टी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। चुनाव अभियान के दौरान जेन-जी ने भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई, बेहतर शासन, भाई-भतीजावाद खत्म करने और राजनीतिक नेतृत्व में पीढ़ीगत बदलाव जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
नेपाल की संसद में कुल 275 सदस्य होते हैं। इनमें से 165 सदस्य प्रत्यक्ष मतदान से चुने जाते हैं, जबकि 110 सदस्य अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से चुने जाते हैं। प्रत्यक्ष मतदान के तहत 165 सीटों के लिए करीब 3,400 उम्मीदवार मैदान में थे। जबकि अनुपातिक प्रणाली के तहत 110 सीटों के लिए 3,135 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा। अनुपातिक मतदान प्रणाली में भी आरएसपी आगे चल रही है। पार्टी को अब तक 1,26,503 वोट मिले हैं। नेपाली कांग्रेस को 38,343, यूएमएल को 28,721, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी को 10,962, नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी को 10,794 और श्रम शक्ति पार्टी को 6,474 वोट मिले हैं।
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