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'किल एंड डंप' नीति का शिकार बलूच: मानवाधिकार संगठन का आरोप- पाकिस्तानी सेना ने सात निर्दोष लोगों का किया कत्ल

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, क्वेटा (पाकिस्तान) Published by: Nirmal Kant Updated Mon, 09 Mar 2026 05:23 PM IST
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Pakistan Army killed several people in balochistan without any legal action: Human Rights Organisation
पाकिस्तानी सेना (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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पाकिस्तानी सेना की बलूचों पर ज्यादती का एक और मामला सामने आया है। एक मानवाधिकार संगठन ने आरोप लगाया है कि करीब सात बलूच नागरिकों को बिना किसी अदालत के आदेश के मार दिया गया।
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बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग (पांक) ने कहा कि अवारन जिले में दो भाइयों नादिल बलूच और शेर जान को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के मार दिया गया। मानवाधिकार विभाग ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने इन्हें जबरदस्ती पकड़कर गायब कर दिया था। 
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मानवाधिकार संगठन ने बताया कि नादिल का शव गोलियों से छलनी करके आठ मार्च को अवारन के जाहू कोटू इलाके में फेंक दिया गया। आरोप है कि हत्या से करीब चार महीने पहले तक उसे गैरकानूनी हिरासत में रखा गया था। उसी दिन शेर का क्षत-विक्षप्त शव बाद में अवारन के तीरतागे इलाके में मिला। उसे 21 नवंबर, 2025 को पाकिस्तानी कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने हब चौकी मुख्य बाजार से जबरदस्ती गायब कर दिया था।

पांक ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि इन दोनों भाइयों की हत्या बलूचिस्तान में आम तौर पर अपनाई जाने वाली 'किल एंड डंप' (मारो और फेंक दो) नीति को दिखाती है। इस नीति में लोगों को जबरदस्ती गायब किया जाता है और लंबे समय तक गैरकानूनी हिरासत में रखने के बाद उन्हें मृत पाया जाता है। 

संगठन ने आगे बताया कि पांच मार्च को पंजगुर जिले के परूम इलाके में डेथ स्क्वाड ने दो युवा वाहन चालकों को निशाना बनाकर मार डाला। मरने वालों की पहचान 20 साल के नियाज बलूच और 20 साल के जाकिर बलूच के तौर पर हुई।

इस मानवाधिकार संस्था ने नियाज और जाकिर की हत्याओं की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच और जिम्मेदार लोगों को सजा देने की भी मांग की। पांक ने आगे बताया कि हलीम बलूच का क्षत-विक्षप्त शव छह मार्च को पंजगुर के सरीकुरान इलाके में जबरदस्ती गायब किए जाने के बाद मिला था।

मानवाधिकार संस्था के मुताबिक, पंजगुर के खुदाबदन में रहने वाले और अपनी दुकान चलाने वाले हलीम को 20 फरवरी को डेथ स्क्वॉड ने उनके घर से जबरदस्ती गायब कर दिया था। इस बीच, मानवाधिकार संस्था बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने बताया कि हम्माल हसनी को पाकिस्तान के फ्रंटियर कॉर्प्स के लोगों ने 6 मार्च को पंजगुर जिले के कोह सब्ज पलंतक इलाके में मार डाला था। हसनी एक वकील थे। 

बीवाईसी ने कहा, हम्माल हसनी की हत्या उसी तर्ज पर हुई है, जिसे मानवाधिकार संगठन दो दशकों से अधिक समय से दर्ज कर रहे हैं। एक बलूच नागरिक को पकड़ लिया जाता है, किसी दूर के इलाके, घर या चेकपॉइंट पर ले जाया जाता है और मरा हुआ उसके परिवार को लौटाया जाता है। अधिकारी या तो उसे फर्जी मुठभेड़ में मारा गया उग्रवादी बता देते हैं या कोई जानकारी नहीं देते। 

पंजगुर में एक अलग घटना में, एक और चालक उमर जान (19 वर्षीय) को पांच मार्च को परूम इलाके में पाकिस्तान की मदद से चल रहे डेथ स्क्वॉड ने गोली मार दी थी। उमर की बेरहमी से हत्या की निंदा करते हुए बीवाईसी ने कहा, पिछले साल ये हत्याएं बढ़ीं और बिना किसी नतीजे के जारी रहीं। मानवाधिकार संगठनों को पाकिस्तान सरकार से बलूचिस्तान के मौजूदा हालात के बारे में पूछना चाहिए। हर किसी की जिंदगी मायने रखती है। बलूचिस्तान को इंसाफ मिलना चाहिए। तुरंत दखल के बिना युवाओं और बेगुनाह लोगों की हत्याएं जारी रहेंगी और दुनिया इंसानियत के बजाय चुप्पी चुन लेगी। 

इनपुट: आईएएनएस






 
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