Pakistan: पाकिस्तान में मच्छरों से मुकाबले के लिए लेनी पड़ी सेना की मदद
Pakistan: सेना के डिफेंस साइंस एंड टेक्नोलॉजी ऑर्गेनाइजेशन (डीईएसटीओ) ‘मॉस्किल’ नाम के इस खास कीटनाशक का उत्पादन करता है। अब तक इसका इस्तेमाल सेना और अर्ध सैनिक बलों की टुकड़ियां अपनी तैनाती की जगह पर मच्छरों से छुटकारा पाने के लिए करती रही हैं...
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पाकिस्तान में अब मच्छरों का मुकाबला करने के लिए सेना की मदद लेनी पड़ी है। खास कर सिंध और बलूचिस्तान राज्यों के जिन इलाकों में हाल में भीषण बाढ़ आई थी, वहां इन दिनों मच्छरों का प्रकोप फैला हुआ है। मच्छरों की वजह से मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियां व्यापक रूप से फैली हुई हैं, जिनसे बड़ी संख्या में लोगों के मरने का अंदेशा गहरा गया है। इन दोनों राज्यों की सरकारों ने अब हजारों किलोग्राम नए जैविक कीटनाशक खरीदे हैं, जिनका उत्पादन पाकिस्तान की सेना ने किया है।
सेना के डिफेंस साइंस एंड टेक्नोलॉजी ऑर्गेनाइजेशन (डीईएसटीओ) ‘मॉस्किल’ नाम के इस खास कीटनाशक का उत्पादन करता है। अब तक इसका इस्तेमाल सेना और अर्ध सैनिक बलों की टुकड़ियां अपनी तैनाती की जगह पर मच्छरों से छुटकारा पाने के लिए करती रही हैं। अखबार द न्यूज में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की स्वास्थ्य एजेंसी- राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा, विनियमन, और समन्वय (एनएचएसआर एंड सी) की सलाह पर मॉस्किल की खरीदारी की गई। इसका इस्तेमाल सेना के दिशा-निर्देशों के मुताबिक किया जाएगा।
द न्यूज ने प्रांतीय सरकारों के सूत्रों के हवाले से कहा है कि इस तरह की दवा से पानी जमाव के कारण होने वाली बीमारियों का मुकाबला करने का अनुभव सरकारी एजेंसियों को नहीं है। हालांकि पाकिस्तान के दवा विनियामक प्राधिकरण और पर्यावरण संरक्षण एजेंसी ने मॉस्किल के इस्तेमाल को हरी झंडी दे दी है, इसके बावजूद फिलहाल इसका उपयोग प्रायोगिक आधार पर ही किया जा रहा है।
पाकिस्तान की सेना से जुड़े एक डॉक्टर ने द न्यूज को बताया कि ब्रिटिश राज के समय अविभाजित भारत की सेना ने मच्छरों का मुकाबला करने का खास अनुभव हासिल किया था। खास कर मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों से ब्रिटिश सैन्य कर्मी चिंतित रहते थे। ब्रिटिश राज के समय जितने सैनिकों की मृत्यु विरोधी सेना से लड़ाई के दौरान हुई, उससे ज्यादा ब्रिटिश सैनिक मलेरिया से मरे थे। उसी दौर में सेना ने पानी जमाव से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के तरीके ढूंढे।
पाकिस्तान सेना के डॉक्टर ने कहा- ‘मलेरिया और डेंगू सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती हैं। इनकी रोकथाम के लिए पाकिस्तान की सेना परंपरागत और अनुसंधान आधारित नई तकनीकों- दोनों का इस्तेमाल करती है। इनमें मच्छरों को मारने के लिए बायोटेक्नोलॉजी आधारित समाधान भी हैं।’
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चेतावनी दी है कि सिंध और बलूचिस्तान के 32 बाढ़ पीड़ित इलाकों में मलेरिया फैलने का गंभीर खतरा है। इन क्षेत्रों में 27 लाख आबादी रहती है। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि मलेरिया का खतरा जनवरी 2023 तक मंडराता रहेगा। अगर इस पर काबू नहीं पाया गया, तो बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो सकती है।
एनएचएसआर एंड सी के अधिकारियों ने बताया है कि सेना के अधिकारी दोनों राज्यों के कर्मचारियों को मॉस्किल का इस्तेमाल करने के लिए प्रशिक्षित कर रहे हैं। मॉस्किल मिट्टी में पाए जाने वाले प्राकृतिक बैक्टीरिया को लेकर तैयार जैविक रसायन से बनाया गया है। इस बैक्टीरिया का इस्तेमाल भारत, अमेरिका, कनाडा, चीन और कई दूसरे देशों में भी कीटनाशक तैयार करने में किया जाता है।