सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Peace Talks: Araghchi claims PM Netanyahu called Vance amid peace talks in Pakistan! Priorities have shifted

Peace Talks: अराघची का दावा- PAK में शांति वार्ता के बीच पीएम नेतन्याहू ने वेंस को किया फोन! बदल गई प्राथमिकता

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान Published by: Pavan Updated Mon, 13 Apr 2026 08:31 AM IST
विज्ञापन
सार

इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता विफल होने को लेकर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बड़ा दावा किया है। उनके अनुसार, शांति वार्ता सही दिशा में जा रही थी लेकिन इसी बीच जेडी वेंस को इस्राइली पीएम नेतन्याहू ने फोन किया, जिसके बाद से इस बैठक की प्राथमिकता बदल गई। 

Peace Talks: Araghchi claims PM Netanyahu called Vance amid peace talks in Pakistan! Priorities have shifted
अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर अराघची का दावा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार

इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही अहम शांति वार्ता अचानक बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। इस पूरे घटनाक्रम पर ईरान ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि एक फोन कॉल ने सब कुछ बदल दिया। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने आरोप लगाया कि इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बातचीत के दौरान अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को फोन किया, जिसके बाद वार्ता का रुख बदल गया।
Trending Videos


यह भी पढ़ें - 'अनोखी जोड़ी': ईरान-US के बीच शांति वार्ता विफल रही, ट्रंप ने PM शहबाज और मुनीर की तारीफ में कसीदे क्यों पढ़े?
विज्ञापन
विज्ञापन


ईरानी विदेश मंत्री ने क्या किया दावा?
अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि इस फोन कॉल के बाद बातचीत का फोकस अमेरिका-ईरान के मुद्दों से हटकर इस्राइल के हितों पर चला गया। उनका कहना है कि ईरान इस बातचीत में पूरी ईमानदारी के साथ शामिल हुआ था, लेकिन अमेरिका ने ऐसे शर्तें रखीं जो स्वीकार करना संभव नहीं था। 



अमेरिका ने ईरान के समक्ष क्या रखीं थी शर्ते?
बताया जा रहा है कि इस्लामाबाद में करीब 21 घंटे तक चली इस बातचीत में अमेरिका ने ईरान के सामने कड़ी शर्तें रखीं। इनमें होर्मुज जलडमरूमध्य से अपने और अपने सहयोगियों के जहाजों की सुरक्षित आवाजाही, साथ ही ईरान के पूरे यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को खत्म करने और उसके मौजूदा यूरेनियम भंडार को सौंपने जैसी मांगें शामिल थीं। ईरान ने इन शर्तों को ठुकरा दिया। इस पूरी स्थिति पर अमेरिका की ओर से कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है कि वास्तव में बातचीत में क्या पेश किया गया था। वहीं, ईरान का कहना है कि अमेरिका 'बातचीत की मेज पर वही हासिल करना चाहता था जो वह युद्ध में नहीं कर पाया।'

युद्धविराम पर मंडरा रहा खतरा
इस बीच, हालात और भी संवेदनशील हो गए हैं क्योंकि कुछ दिन पहले जो दो हफ्ते का युद्धविराम हुआ था, अब उस पर भी खतरा मंडराने लगा है। इस युद्धविराम की अवधि खत्म होने में सिर्फ नौ दिन बचे हैं। इस वार्ता के विफल होने का असर अब वैश्विक बाजार पर भी दिखने लगा है। खासकर तेल की कीमतों में फिर से उछाल आने की आशंका है। युद्धविराम के दौरान तेल की कीमतें कुछ कम हुई थीं, लेकिन अब विश्लेषकों का मानना है कि अगर समझौता नहीं हुआ तो कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।

यह भी पढ़ें - UAE-China Ties: बीजिंग पहुंचे अबू धाबी के क्राउन प्रिंस, संयुक्त अरब अमीरात-चीन रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार

होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बाधित
इसके साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो चुकी है। ईरान ने वहां बारूदी सुरंगें, ड्रोन और मिसाइल तैनात कर रखी हैं और हर जहाज से भारी शुल्क की मांग कर रहा है, जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ माना जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका के सहयोगी देशों के बीच भी मतभेद उजागर कर दिए हैं। स्पेन और इटली जैसे देशों ने ईरान के खिलाफ किसी सैन्य कार्रवाई में अपनी जमीन या हवाई क्षेत्र देने से मना कर दिया है। कई अन्य नाटो देश भी अमेरिका के साथ खुलकर नहीं आ रहे हैं।

अन्य वीडियो
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed