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पीओजेके में मानवाधिकार उल्लंघन के खिलाफ प्रदर्शन: ब्रोकन चेयर के पास पाकिस्तान को घेरा, किसने क्या की मांग?
Thu, 24 Sep 2026 08:58 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी
एएनआई, जिनेवा
एएनआई, जिनेवा
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Thu, 24 Sep 2026 08:58 AM IST
सार
जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर यूकेपीएनपी ने पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन किया। संगठन ने पीओजेके में मानवाधिकार उल्लंघन, राजनीतिक दमन और नागरिकों पर कथित गोलीबारी का मुद्दा उठाया। प्रदर्शनकारियों ने घटना को लेकर क्या मांग की है?
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यूकेपीएनपी का प्रदर्शन
- फोटो : एएनआई
विस्तार
यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर 'ब्रोकन चेयर' पर पाकिस्तान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सेशन के दौरान किया गया, जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में मानवाधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया गया।
यूकेपीएनपी ने क्यों किया प्रदर्शन?
प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए। इसके साथ ही पीओजेके में लगातार हो रहे दमन, राजनीतिक पाबंदियों और बुनियादी अधिकारों के उल्लंघन की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचा।
इस प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा पीओजेके में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर 5 जून को हुई गोलीबारी थी। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें कई आम नागरिक मारे गए और दर्जनों अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
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प्रदर्शनकारियों ने क्या मांग की?
प्रदर्शनकारियों ने घटना की निष्पक्ष जांच और नागरिकों के खिलाफ कथित तौर पर बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की। यूकेपीएनपी ने इस क्षेत्र में आतंकवाद को लगातार बढ़ावा दिए जाने और उसे पनपने देने पर भी चिंता जताई। संगठन ने आरोप लगाया कि पीओजेके का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए एक अड्डे के तौर पर किया गया है।
सभा को संबोधित करते हुए, यूकेपीएनपी के प्रतिनिधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और यूएन के मानवाधिकार तंत्र से पीओजेके के हालात पर ध्यान देने और वहां के लोगों के अधिकारों और आजादी की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।
यूकेपीएनपी के चेयरमैन ने क्या आरोप लगाए?
समाचार एजेंसी से बात करते हुए, यूकेपीएनपी के चेयरमैन सरदार शौकत अली कश्मीरी ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन और विरोध-प्रदर्शनों को बेरहमी से दबाने का आरोप लगाया।
चेयरमैन ने कहा 'स्थानीय लोग बुनियादी अधिकारों और निष्पक्ष प्रशासन की मांग करने के कारण सरकार के कड़े दमन का सामना कर रहे हैं। आज हम पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में काम कर रही पाकिस्तानी सेना के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। लोग अपने बुनियादी अधिकारों के लिए विरोध कर रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्य से, पाकिस्तान सरकार उनकी तत्काल मांगों को मानने को तैयार नहीं है।'
'न्यायपालिका पूरी तरह से समझौता कर चुकी है'
उन्होंने बुनियादी अधिकारों और स्थानीय संसाधनों पर नियंत्रण की शांतिपूर्ण मांगों को नजरअंदाज करने के लिए इस्लामाबाद की आलोचना की। उन्होंने कहा, '100 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। 600 से ज्यादा लोगों को जबरदस्ती गायब कर दिया गया है। लगभग 1,500 लोगों को हिरासत में लिया गया है।' उन्होंने संस्थागत ढांचे के पतन की चेतावनी देते हुए कहा, 'न्यायपालिका पूरी तरह से समझौता कर चुकी है और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कश्मीरियों की तकलीफों के बारे में आवाज उठाने की किसी को भी इजाजत नहीं है।'
इस इलाके में आर्थिक शोषण और बुनियादी ढांचे के ढहने का जिक्र करते हुए, उन्होंने सरकारी हिंसा को खत्म करने और पाकिस्तान से 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' के चार्टर को स्वीकार करने की अपील की। कश्मीरी ने कहा, 'हमारे लोग बेरोजगारी, उत्पीड़न और हिरासत का सामना कर रहे हैं। अस्पतालों का बुनियादी ढांचा लगभग ठप हो चुका है। इसलिए आज का प्रदर्शन असल में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की बर्बरता के खिलाफ था। पाकिस्तान को अपनी सोच बदलनी चाहिए और 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' की मांग को स्वीकार करना चाहिए।'
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यूकेपीएनपी ने क्यों किया प्रदर्शन?
प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए। इसके साथ ही पीओजेके में लगातार हो रहे दमन, राजनीतिक पाबंदियों और बुनियादी अधिकारों के उल्लंघन की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचा।
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इस प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा पीओजेके में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर 5 जून को हुई गोलीबारी थी। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें कई आम नागरिक मारे गए और दर्जनों अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
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प्रदर्शनकारियों ने क्या मांग की?
प्रदर्शनकारियों ने घटना की निष्पक्ष जांच और नागरिकों के खिलाफ कथित तौर पर बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की। यूकेपीएनपी ने इस क्षेत्र में आतंकवाद को लगातार बढ़ावा दिए जाने और उसे पनपने देने पर भी चिंता जताई। संगठन ने आरोप लगाया कि पीओजेके का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए एक अड्डे के तौर पर किया गया है।
सभा को संबोधित करते हुए, यूकेपीएनपी के प्रतिनिधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और यूएन के मानवाधिकार तंत्र से पीओजेके के हालात पर ध्यान देने और वहां के लोगों के अधिकारों और आजादी की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।
यूकेपीएनपी के चेयरमैन ने क्या आरोप लगाए?
समाचार एजेंसी से बात करते हुए, यूकेपीएनपी के चेयरमैन सरदार शौकत अली कश्मीरी ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन और विरोध-प्रदर्शनों को बेरहमी से दबाने का आरोप लगाया।
चेयरमैन ने कहा 'स्थानीय लोग बुनियादी अधिकारों और निष्पक्ष प्रशासन की मांग करने के कारण सरकार के कड़े दमन का सामना कर रहे हैं। आज हम पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में काम कर रही पाकिस्तानी सेना के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। लोग अपने बुनियादी अधिकारों के लिए विरोध कर रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्य से, पाकिस्तान सरकार उनकी तत्काल मांगों को मानने को तैयार नहीं है।'
'न्यायपालिका पूरी तरह से समझौता कर चुकी है'
उन्होंने बुनियादी अधिकारों और स्थानीय संसाधनों पर नियंत्रण की शांतिपूर्ण मांगों को नजरअंदाज करने के लिए इस्लामाबाद की आलोचना की। उन्होंने कहा, '100 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। 600 से ज्यादा लोगों को जबरदस्ती गायब कर दिया गया है। लगभग 1,500 लोगों को हिरासत में लिया गया है।' उन्होंने संस्थागत ढांचे के पतन की चेतावनी देते हुए कहा, 'न्यायपालिका पूरी तरह से समझौता कर चुकी है और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कश्मीरियों की तकलीफों के बारे में आवाज उठाने की किसी को भी इजाजत नहीं है।'
इस इलाके में आर्थिक शोषण और बुनियादी ढांचे के ढहने का जिक्र करते हुए, उन्होंने सरकारी हिंसा को खत्म करने और पाकिस्तान से 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' के चार्टर को स्वीकार करने की अपील की। कश्मीरी ने कहा, 'हमारे लोग बेरोजगारी, उत्पीड़न और हिरासत का सामना कर रहे हैं। अस्पतालों का बुनियादी ढांचा लगभग ठप हो चुका है। इसलिए आज का प्रदर्शन असल में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की बर्बरता के खिलाफ था। पाकिस्तान को अपनी सोच बदलनी चाहिए और 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' की मांग को स्वीकार करना चाहिए।'