Sri Lanka: श्रीलंका की सड़कों पर फिर दिखेगा विशाल विरोध प्रदर्शनों का नजारा?
Sri Lanka: राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने पिछले हफ्ते संसद को संबोधित करते हुए कहा था कि सरकार गिराने के मकसद से होने वाले किसी आंदोलन को रोक दिया जाएगा। इसके लिए जरूरत पड़ी सरकारी बलों और आपातकालीन प्रावधानों का भी इस्तेमाल किया जाएगा...
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श्रीलंका की सड़कों पर फिर से सरकार विरोधी बड़े जन प्रदर्शनों का नजारा देखने को मिल सकता है। प्रमुख विपक्षी नेता सजित प्रेमदासा के सरकार विरोधी मुहिम छेड़ने के एलान के बाद ये संभावना बनी है। प्रेमदासा ने राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के एक विवादित बयान के खिलाफ लाखों लोगों को सड़कों पर ले आने का इरादा जताया है। विक्रमसिंघे ने कहा था कि अब अगर देश में जन आंदोलन हुआ, तो वे उसे दबाने के लिए सेना का सहारा लेंगे।
समगी जना बालावेगया (एसजेबी) पार्टी के नेता प्रेमदासा ने अपनी पार्टी के एक कार्यक्रम में घोषणा की कि सभी विरोध प्रदर्शनों को कुचलने की राष्ट्रपति की मंशा को एसजेबी नाकाम कर देगी। उन्होंने कहा- ‘राष्ट्रपति और सत्ताधारी गुट ये बात संसद में कह रहे हैं कि अगर लोग संघर्ष पर उतरे, तो वे सेना के जरिए उनका दमन कर देंगे। जनता के संघर्ष को दबाने के लिए सरकार आतंकवाद निरोधक अधिनियम (पीटीए) का सहारा लिया जाएगा। लेकिन हम कायर बनने को तैयार नहीं हैं।’
प्रेमदासा ने कहा- ‘हम से कहा जा रहा है कि अगर राजनीतिक जलसा करना है, तो पहले इजाजत लेनी होगी। अगर यह एक चुनौती है, तो एसजेबी और उसके सहयोगी दल इसे स्वीकार करते हैं। हम लाखों लोगों के साथ सड़कों पर उतरने को तैयार हैं। जनता के खिलाफ ताकत के इस्तेमाल की सरकार की खोखली धमकी को हम परास्त कर देंगे।’
प्रेमदासा के इस भाषण की खबर मीडिया में आने के बाद श्रीलंका में सियासी माहौल गरमा गया है। विक्रमसिंघे के समर्थकों ने आरोप लगाया है कि एसजेबी अरगलया (इस वर्ष गोटाबया राजपक्षे सरकार के खिलाफ हुआ जन आंदोलन) का इस्तेमाल अपने राजनीतिक स्वार्थ साधने के लिए कर रही है। सत्ता पक्ष ने प्रेमदासा को पिछले नौ मई को हुई उस घटना की याद दिलाई है, जिसमें अरगलया में शामिल लोगों ने उन पर हमला बोल दिया था। सत्ताधारी गठबंधन के सूत्रों ने मीडिया से कहा है कि उस बात को भूल कर प्रेमदासा अब राष्ट्रपति को चुनौती दे रहे हैं।
उधर मीडिया टीकाकारों ने लाखों लोगों को जुटाने की एसजेबी की क्षमता पर सवाल खड़ा किया है। लेकिन एसजेबी ने कहा है कि वह अपनी ताकत दिखाने को तैयार है। उसने कहा है कि पार्टी सड़कों और अगले चुनाव दोनों में अपनी लोकप्रियता साबित कर देगी।
राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने पिछले हफ्ते संसद को संबोधित करते हुए कहा था कि सरकार गिराने के मकसद से होने वाले किसी आंदोलन को रोक दिया जाएगा। इसके लिए जरूरत पड़ी सरकारी बलों और आपातकालीन प्रावधानों का भी इस्तेमाल किया जाएगा। लेकिन उन्होंने कहा था कि इजाजत लेकर होने वाले शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को इजाजत दी जाएगी।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक विक्रमसिंघे राष्ट्रपति बनने के बाद से सख्त नेता की अपनी छवि बनाने में जुटे रहे हैं। सबसे पहले उन्होंने अरगलया को खत्म कराने के लिए दमन का सहारा लिया। इसकी देश के अंतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कड़ी आलोचना हुई थी। इसी सिलसिले में पिछले हफ्ते उन्होंने विवादास्पद बयान दिया। विश्लेषकों का कहना है कि इससे प्रेमदासा को राष्ट्रपति के खिलाफ जनता को गोलबंद करने का एक मौका मिल गया है।