S Jaishankar: पेरिस में वीमर फॉर्मेट की पहली बैठक में शामिल हुए जयशंकर, यूक्रेन समेत इन मुद्दों पर हुई चर्चा
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पेरिस में वीमर प्रारूप की पहली बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में पोलैंड फ्रांस और जर्मनी के विदेश मंत्री शामिल हुए। भारत यूरोपीय संघ संबंध इंडो पैसिफिक और यूक्रेन संकट पर चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि यह नया फॉर्मेट भारत और यूरोप के बीच सहयोग को मजबूत करेगा और बदलती वैश्विक परिस्थितियों में नियमित संवाद को बढ़ावा देगा।
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पेरिस में भारत वीमर प्रारूप के पहले बैठक में हिस्सा लिया। इस बैठक में भारत के साथ पोलैंड, फ्रांस और जर्मनी के विदेश मंत्री भी शामिल हुए। पोलैंड की ओर से उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की, फ्रांस के विदेश मंत्री जीन नोएल बैरोट और जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वेडफुल मौजूद थे। इस बैठक में तीन अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें पहला भारत और यूरोपीय संघ के रिश्ते। दूसरा इंडो पैसिफिक क्षेत्र की स्थिति और तीसरा यूक्रेन से जुड़ा संघर्ष का मुद्दा।
इस बैठक के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि यह नया फॉर्मेट भारत और यूरोप के बीच जुड़ाव को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि भारत का यूरोप के साथ रिश्ता सिर्फ ब्रसेल्स तक सीमित नहीं है बल्कि यूरोपीय संघ के अलग अलग देशों के साथ भी लगातार आगे बढ़ रहा है। ऐसे में छोटे समूहों में बातचीत करना भी जरूरी हो जाता है और यही इस बैठक का मकसद है।
पहली बार इस वीमर से शामिल हुआ भारत- जयशंकर
जयशंकर ने बताया कि बैठक में बातचीत खुलकर और गंभीर तरीके से हुई। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब भारत इस वीमर फॉर्मेट में शामिल हुआ है। उन्होंने बताया कि चर्चा भारत यूरोपीय संघ के संबंधों इंडो पैसिफिक और यूक्रेन के हालात पर केंद्रित रही। जयशंकर ने यह भी कहा कि दुनिया इस समय बड़े बदलावों से गुजर रही है। जयशंकर ने कहा कि इंडो पैसिफिक क्षेत्र में कई वर्षों से उथल पुथल चल रही है। वहीं यूरोप भी कई मुश्किल हालात का सामना कर रहा है जिनका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। इसके अलावा कुछ ऐसे वैश्विक बदलाव भी हो रहे हैं जो भविष्य की विश्व व्यवस्था को बदल सकते हैं।
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भारत-यूरोप के रिश्ते पर क्या बोले जयशंकर?
उन्होंने कहा कि अलग अलग हिस्सों में होने के बावजूद एक दूसरे से विचार और आकलन साझा करना बहुत जरूरी है। इस दौरान जयशंकर ने भरोसा जताया कि भारत और यूरोप के रिश्तों को आगे बढ़ाने की बहुत बड़ी गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि भारत के बड़े अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में यूरोपीय संघ और यूरोप के देशों के साथ संबंधों में सबसे ज्यादा संभावनाएं हैं।
जयशंकर ने और क्या-क्या कहा?
जयशंकर ने कहा कि अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है और कई नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस बैठक में शामिल तीनों यूरोपीय देश भारत यूरोप रिश्तों को नई ऊंचाई तक ले जाने में सहयोग करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया धीरे धीरे बहुध्रुवीय बन रही है। ऐसे समय में अनिश्चितता और अस्थिरता बढ़ रही है। इसी वजह से समान सोच वाले देशों के बीच सहयोग और भी जरूरी हो गया है। यही सोच इन चारों देशों को एक साथ लाई है।
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फ्रांस के विदेश मंत्री से भी की थी मुलाकात
गौरतलब है कि इससे पहले जयशंकर ने फ्रांस के विदेश मंत्री जीन नोएल बैरोट से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत और फ्रांस के बीच सहयोग बढ़ाने भारत यूरोपीय संघ संबंधों को आगे ले जाने और मौजूदा वैश्विक मुद्दों पर विचार साझा किए। जयशंकर ने कहा कि द्विपक्षीय सहयोग की बैठक में होराइजन दो हजार सैंतालीस रोडमैप को लागू करने पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा विदेश मंत्री ने लक्जमबर्ग के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जेवियर बेटेल और ग्रैंड ड्यूक गिलौम से भी मुलाकात की। उन्होंने लक्जमबर्ग में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी बातचीत की।
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