फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Serbia Election Results Students List Victory after 2 years of Protests President Aleksandar Vučić explainer

एक्सप्लेनर: रेलवे स्टेशन की छत गिरने की घटना ने कैसे छीनी सर्बिया के राष्ट्रपति की कुर्सी, कितनी बदली राजनीति?

Mon, 26 Oct 2026 05:39 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 26 Oct 2026 05:39 PM IST
सार

सर्बिया के संसदीय चुनाव में छात्र आंदोलन 'स्टूडेंट लिस्ट' ने बहुमत हासिल कर इतिहास रच दिया है। जानिए कैसे 2 साल के आंदोलन और नोवी साद हादसे ने एलेक्जेंडर वुसिच के 12 साल के शासन का अंत किया।

विज्ञापन
Serbia Election Results Students List Victory after 2 years of Protests President Aleksandar Vučić explainer
सर्बिया में चुनाव नतीजे। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सर्बिया में हुए आम चुनाव के नतीजे आने जारी हैं। अब तक जो परिणाम सामने आए हैं, उसके मुताबिक सत्तासीन- सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (एसएनएस) दूसरे स्थान पर खिसकती दिख रही है। वहीं, हाल ही में सर्बिया के छात्रों की तरफ से गठित नई पार्टी- स्टूडेंट्स लिस्ट के आसान बहुमत हासिल करने का अनुमान है। अभी पूर्ण परिणाम घोषित होने बाकी हैं, हालांकि इससे पहले ही 14 साल तक सर्बिया पर शासन करने वाले राष्ट्रपति एलेक्जेंडर वुसिच ने अपनी हार मान ली है। सर्बिया के लिए यह ऐतिहासिक घटनाक्रम है, क्योंकि इस चुनावी बदलाव के पीछे कोई सियासी तौर पर अनुभवी दल या नेता नहीं, बल्कि दो साल पहले शुरू हुआ छात्रों का प्रदर्शन है। 
विज्ञापन


ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर सर्बिया में अब तक आए चुनाव नतीजे क्या रहे हैं? कैसे दो साल पहले रेलवे स्टेशन पर हुई एक घटना ने पूरे देश में प्रदर्शनों की एक बयार छेड़ दी? किस तरह लगातार दो साल तक सर्बिया के अलग-अलग कोनों में छात्र लगातार विरोध में जुटे रहे? इन छात्र संगठनों के चुनाव में उतरने और सीधा राष्ट्रपति को चुनौती देने का क्या घटनाक्रम रहा? अब छात्रों की पार्टी- स्टूडेंट्स लिस्ट के जीतने के बाद सर्बिया को कौन और कैसे चलाएगा? इनका एजेंडा क्या रहने वाला है? आइये जानते हैं...
विज्ञापन
Trending Videos

पहले जानें- सर्बिया में अब तक क्या चुनाव नतीजे आए हैं?

सर्बिया के संसदीय चुनाव में छात्र आंदोलन की ओर से संचालित स्टूडेंट लिस्ट ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है। इस प्रदर्शन को देखते हुए 12 वर्षों से सत्ता में रहे एलेक्जेंडर वुसिच ने अपनी हार स्वीकार कर ली है। चुनाव नतीजों के स्पष्ट होते ही राजधानी बेलग्रेड और अन्य प्रमुख शहरों की सड़कों पर जश्न का माहौल बन गया।

सर्बिया में हुए इस चुनाव की सबसे खास बात यह रही कि यहां 67.6% मतदान दर्ज किया गया, जो 1992 में यूगोस्लाविया के विघटन के बाद से अब तक का सबसे अधिक मतदान रहा।
विज्ञापन

Serbia Election Results Students List Victory after 2 years of Protests President Aleksandar Vučić explainer
सर्बिया में चुनाव नतीजे। - फोटो : अमर उजाला

किस घटना के बाद सरकार के खिलाफ सड़कों पर आए छात्र?


1. रेलवे स्टेशन में गिरी छत तो भड़का लोगों का गुस्सा
छात्रों का यह राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन 1 नवंबर 2024 को सर्बिया के दूसरे सबसे बड़े शहर नोवी साद के रेलवे स्टेशन पर कॉन्क्रीट की छत (कैनोपी) ढहने की दुर्घटना के बाद शुरू हुआ था। दरअसल, इस हादसे में 16 लोगों की जान चली गई। इस घटना को सर्बिया में फैले भ्रष्टाचार के प्रतीक के रूप में देखा गया। इसकी एक वजह यह थी कि इस पुराने स्टेशन का पुनर्निर्माण कराया गया था और राष्ट्रपति वुसिच इस प्रोजेक्ट से खुद को जोड़ते रहे थे। 

2. अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई भी नहीं
हालंकि, जब रेलवे स्टेशन में कैनोपी गिरने की घटना हुई तो इसने देश में धोखाधड़ी, लापरवाही और व्यापक सरकारी भ्रष्टाचार के मुद्दे को फिर हवा दे दी। लोगों और खासकर युवाओं के गुस्से का एक कारण यह रहा कि इस बड़े हादसे के बावजूद किसी भी जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
विज्ञापन

3. सत्तासीन पार्टी के समर्थकों के हमले ने दिया आंदोलन को जन्म
हादसे के तीन हफ्ते बाद जब बेलग्रेड के छात्रों ने पीड़ितों की याद में श्रद्धांजलि दी और नाराजगी में सड़क जाम करने की कोशिश की तो सत्ताधारी पार्टी एसएनएस से जुड़े तत्वों ने उन पर हमला कर दिया। इस घटना ने आग में घी का काम किया और विरोध प्रदर्शन पूरे देश में एक जन-आंदोलन के रूप में फैल गया। यही घटना दो वर्ष से चल रहे छात्र आंदोलन की मुख्य वजह बनी, जिसने आगे चलकर चुनावों के जरिए वुसिच के 12 साल पुराने शासन का अंत कर दिया।
 

कैसे दो साल लगातार सर्बिया के अलग-अलग कोनों में छात्र विरोध में जुटे रहे? 

सर्बिया के छात्रों ने बिना किसी पारंपरिक राजनीतिक दल या स्थापित नेता के दो वर्षों तक पूरे देश में आंदोलन को न केवल जीवित रखा, बल्कि उसे एक सफल राजनीतिक बदलाव तक की दिशा दिखाई। 

बिना चेहरे वाले ढांचे से मिला हर वर्ग का समर्थन
  • नवंबर 2024 में आंदोलन के शुरू होने के बाद से ही इसके साथ एक खास बात जुड़ी रही। छात्रों ने आंदोलन में जानबूझकर किसी एक व्यक्ति को अपना मुख्य चेहरा या नेता नहीं बनाया। 
  • छात्रों ने देशभर में विश्वविद्यालयों में प्लेनम (छात्र सभाओं) के जरिए सभी निर्णय लोकतांत्रिक तरीके से लिए। इस गैर-पारंपरिक ढांचे के चलते सरकारी मीडिया और सत्ताधारी पार्टी के लिए आंदोलन को निशाना बनाना या बदनाम करना कठिन हो गया।

समाज के सभी वर्गों को साथ जोड़ने की कवायद 
यह विरोध प्रदर्शन केवल विश्वविद्यालय परिसरों तक सीमित नहीं रहा। बेलग्रेड, नोवी साद और नीश जैसे प्रमुख शहरों से शुरू होकर यह पूरे देश में फैल गया। छात्रों ने अपने साथ किसानों, डॉक्टरों, कलाकारों, जजों और आम नागरिकों को एक साझा मंच पर एकत्रित किया। धीरे-धीरे आंदोलन को मजदूरों से लेकर बुद्धिजीवी वर्ग तक का समर्थन मिलता चला गया। 

Serbia Election Results Students List Victory after 2 years of Protests President Aleksandar Vučić explainer
सर्बिया में चुनाव नतीजे। - फोटो : अमर उजाला
डोर-टू-डोर और गांव से गांव तक चला जनसंपर्क 
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सर्बियाई टेलीविजन और राष्ट्रीय मीडिया पर सत्ताधारी एसएनएस पार्टी का लगभग 69% नियंत्रण है। इस मीडिया घेराबंदी को तोड़ने के लिए छात्रों ने डिजिटल एप्स और मैपिंग तकनीक के जरिए बेलग्रेड के उपनगरों से लेकर दूर-दराज के गांवों तक घर-घर जाकर सीधे लोगों से संवाद किया।

स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों को साथ उठाकर बढ़ा आंदोलन
छात्रों ने भ्रष्टाचार और संस्थागत पतन के राष्ट्रीय मुद्दों को उठाया। इस दौरान कुछ नारे भी प्रचलित हुए। इनमें सबसे मशहूर नारा था- 'सर्बिया या माफिया?' इसके साथ-साथ आम जनता की रोजाना की समस्याओं, जैसे- खराब सड़कें, जलजमाव और सीवेज प्रणाली पर सीधे बात की गई।


भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन चुनाव में उतरने तक कैसे पहुंचा?

  • सर्बिया का छात्र आंदोलन जब दो महीने पूरा करके लगातार बढ़ता जा रहा था और इससे जुड़ने और इसे समर्थन करने वालों की संख्या बढ़ने लगी तो इससे राष्ट्रपति एलेक्जेंडर वुसिच की पार्टी में तनाव बढ़ गया। 
  • छात्रों ने इस दौरान प्रदर्शन को व्यापक बनाया और गांवों तक संपर्क स्थापित किया। इस आंदोलन को बढ़ता देख जनवरी 2025 में प्रधानमंत्री माइलोस वुसेविच ने इस्तीफा दे दिया, ताकि छात्रों के गुस्से को कम किया जा सके।
  • हालांकि, छात्र संगठनों ने पीएम के इस्तीफे को जवाबदेही तय करने की जगह गुस्सा शांत करने के कदम के तौर पर देखा। इसके बाद मार्च 2025 में बेलग्रेड में सर्बिया का सबसे बड़ा सरकार-विरोधी प्रदर्शन हुआ। 

बताया जाता है कि इस आंदोलन से लगातार लोगों के जुड़ने और इसके आगामी चुनाव पर बढ़ते प्रभाव को देखते हुए राष्ट्रपति वुसिच ने सितंबर में पद से इस्तीफा देते हुए अक्तूबर में ही मध्यावधि चुनाव का एलान कर दिया, ताकि छात्रों को सियासत को प्रभावित करने का मौका न मिले और वे चुनाव से दूर हो जाएं। हालांकि, छात्र संगठनों ने इस आंदोलन के दौरान ही सियासी चुनौती के लिए खुद को तैयार कर लिया था।


क्या रही छात्रों की चुनाव में उतरने की रणनीति और वुसिच को हराने की योजना?

1. खुद चुनाव न लड़ने का फैसला
सर्बिया में छात्र आंदोलन ने 12 वर्षों से कायम सत्ताधारी एलेक्जेंडर वुसिच के शासन को उखाड़ फेंकने के लिए एक बेहद अनोखी और रणनीतिक योजना तैयार की थी। जहां वुसिच का इरादा तत्काल चुनाव कराकर छात्र संगठनों को असंगठित स्थिति में घेरने का था, तो वहीं छात्रों ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इस आंदोलन को स्टूडेंट लिस्ट नाम के राजनीतिक गठबंधन के रूप में संगठित कर लिया।

छात्रों ने रणनीति बनाई कि वे खुद चुनाव मैदान में नहीं उतरेंगे, क्योंकि अनुभव की कमी की वजह से मतदाता युवाओं को वोट देने में हिचकिचा सकते थे। इसके बजाय उन्होंने विश्वविद्यालय संकायों से नामित 250 उम्मीदवारों की सूची बनाई। इसे छात्र सभाओं (प्लेनम) में लोकतांत्रिक तरीके से मंजूरी भी दिलाई गई।

उम्मीदवार सूची में 160 से ज्यादा प्रोफेसर और डॉक्टरेट धारक शामिल किए गए। कुछ चर्चित नामों में  कार्डियोलॉजिस्ट इलिजा स्रदानोविच, बास्केटबॉल स्टार देजान बोडिरोगा, अभिनेता तिहोमिर स्टैनिक, पूर्व केंद्रीय बैंक गवर्नर देजान सोकिक शामिल रहे। चुनाव लड़ने वालों में एक बड़ा तबका किसानों का भी रहा। 

2. विवादास्पद मुद्दों से परहेज और 11-सूत्रीय एजेंडा
  • छात्रों ने चुनाव प्रचार के दौरान संवेदनशील मुद्दों, जैसे- यूरोपीय संघ (ईयू) की सदस्यता या विदेश नीति को दरकिनार कर दिया, क्योंकि यह मतदाताओं को विभाजित कर सकते थे। 
  • इसके बजाय उन्होंने छात्र सभाओं की ओर से तय किए गए 11-सूत्रीय कार्यक्रम पर ध्यान केंद्रित किया। इसमें भ्रष्टाचार का खात्मा, मीडिया की आजादी और सरकारी संस्थाओं की स्वतंत्रता प्रमुख थी।

3. पोलिंग बूथों की मजबूत निगरानी
चुनावी धांधली, वोट खरीदने और फर्जी मतदान की आशंका को देखते हुए छात्रों ने अभूतपूर्व स्तर पर रणनीति बनाई। उन्होंने देश भर के पोलिंग बूथों पर अपने स्वतंत्र पर्यवेक्षकों का एक बड़ा नेटवर्क तैनात किया ताकि वोटों की निष्पक्ष गिनती सुनिश्चित की जा सके।
 

छात्रों की संगठन के जीतने के बाद सर्बिया को कौन और कैसे चलाएगा? 

'स्टूडेंट लिस्ट' की जीत के बाद सर्बिया का शासन छात्रों ने खुद न चलाने का फैसला किया है। इसके बजाय सरकार का संचालन उनकी ओर से नामित विशेषज्ञ, पेशेवरों और शिक्षाविदों की एक टीम की ओर से किया जाएगा।

Serbia Election Results Students List Victory after 2 years of Protests President Aleksandar Vučić explainer
सर्बिया में चुनाव नतीजे। - फोटो : अमर उजाला

1. सरकार कौन संभालेगा?

  • नेशनल बैंक ऑफ सर्बिया के पूर्व गवर्नर देजान शोशकिच का नाम प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार के रूप में सामने आ रहा है। 
  • चुनावी सूची में सबसे शीर्ष पर रहे कार्डियोलॉजी प्रोफेसर इलिजा स्रदानोविच के भी सरकार में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
  • पूर्व बास्केटबॉल स्टार देजान बोडिरोगा, लोकप्रिय अभिनेता तिहोमिर स्टैनिक और ओपेरा गायक निकोला मिकिच भी नए शासन का हिस्सा बन सकते हैं।

2. सरकार कैसे चलाई जाएगी? 
  • नवनिर्वाचित सरकार छात्र सभाओं की ओर से स्वीकृत 11-सूत्रीय कार्यक्रम के आधार पर देश का संचालन करेगी।
  • भ्रष्टाचार के आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए एक समर्पित विशेष पुलिस इकाई का गठन तय किया गया है।
  • गृह मंत्रालय से उन अधिकारियों को बर्खास्त किया जाएगा जो प्रदर्शनकारियों के दमन या संगठित अपराध से जुड़े रहे।

ये भी पढ़ें: सर्बिया में छात्रों ने पलटी बाजी: वुसिच की सत्ता खत्म, राष्ट्रपति ने खुद मानी हार; 2017 में संभाली थी कमान

  • सार्वजनिक प्रसारक- आरटीएस को राजनीतिक नियंत्रण से पूरी तरह मुक्त करने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे।
  • सरकारी कंपनियों और संस्थानों के शीर्ष पदों पर पार्टी वफादारों की नियुक्तियों पर रोक लगाई जाएगी।
  • यूरोपीय संघ में शामिल होने जैसे अहम राष्ट्रीय मुद्दों पर फैसला जनमत संग्रह के जरिए जनता पर छोड़ा जाएगा।

छात्र आंदोलन का कहना है कि वे खुद संसद या मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं होंगे, लेकिन वे एक नागरिक निगरानी समूह के तौर पर काम करते रहेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि निर्वाचित विशेषज्ञ अपने वादों से न भटकें और बेहतर ढंग से काम करें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed