{"_id":"6a94deb2c7a6ddc5d0050f11","slug":"seven-year-old-jivyan-reddy-gcse-maths-exam-uk-2026-08-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"गणित में बाल-प्रतिभा का लोहा: 16 साल के बच्चों वाली परीक्षा पास की, सात साल की उम्र में कैसे किया कमाल?","category":{"title":"Education","title_hn":"शिक्षा","slug":"education"}}
गणित में बाल-प्रतिभा का लोहा: 16 साल के बच्चों वाली परीक्षा पास की, सात साल की उम्र में कैसे किया कमाल?
Mon, 31 Aug 2026 07:24 AM IST
निर्मल कांत
एजेंसी, लंदन।
एजेंसी, लंदन।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 31 Aug 2026 07:24 AM IST
सार
ब्रिटेन में सात साल के जिव्यान रेड्डी ने 16 साल के बच्चों की जीसीएसई गणित परीक्षा पास की है। उन्होंने 240 में से 196 अंक हासिल कर ग्रेड 8 पाया। अब वह ए-लेवल गणित पढ़ना चाहते हैं और बड़े होकर रोबोट व तकनीक से लोगों की मदद करने का सपना देखते हैं। आखिर इतनी कम उम्र में कैसे किया ये कमाल? पढ़िए रिपोर्ट
विज्ञापन
जिव्यांश रेड्डी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ब्रिटेन में सात साल के भारतवंशी बच्चे ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए समय से करीब एक दशक पहले गणित की कठिन परीक्षा पास कर ली है।
आंध्र प्रदेश मूल के जिव्यान रेड्डी ने पियर्सन एडएक्सेल जीसीएसई हायर गणित परीक्षा में 240 में से 196 अंक हासिल किए हैं। इस परीक्षा में आमतौर पर 16 वर्ष की आयु के छात्र बैठते हैं। जीसीएसई गणित परीक्षा ब्रिटेन की एक मुख्य माध्यमिक शिक्षा परीक्षा है। इसका पूरा नाम जनरल सर्टिफिकेट ऑफ सेकेंडरी एजुकेश है। एजेंसी
रोबोट के जरिये लोगों की मदद करना चाहते हैं
अब जिव्यान की योजना ए-लेवल गणित पढ़ने की है और बड़े होकर रोबोट व तकनीक के जरिये इंसानों की मदद करना उनका सपना है। शुरुआती असाधारण प्रतिभा को देखते हुए उनके माता-पिता ने फरवरी में उन्हें स्कूल से हटाकर घर पर शिक्षा (होम-स्कूलिंग) देना शुरू किया ताकि वह अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सकें।
ये भी पढ़ें: फास्ट फैशन से दूरी: अमेरिका में खुद फ्लेक्स उगाकर कपड़े बना रहीं ईव ओग्डेन शब, क्यों चुना पुराना तरीका?
विज्ञापन
मई में दी थी परीक्षा
जिव्यान ने इसी साल मई में जीसीएसई की परीक्षा दी थी। इसके परिणाम पिछले हफ्ते आए। अपनी उपलब्धि पर जिव्यान बेहद खुश हैं। परिणाम देखकर उनके माता-पिता भी गौरवान्वित हैं। हालांकि, वह ग्रेड 9 हासिल करना चाहते थे, लेकिन ग्रेड 8 मिलने पर भी वे संतुष्ट हैं। उन्हें कठिन समस्याओं को हल करना और उत्तर ढूंढने के नए तरीके तलाशना पसंद है।
पढ़ाई के लिए एआई की मदद टेनिस और फुटबॉल में है रुचि
जिव्यान के पिता ध्रुवा कुमार रेड्डी कट्टा और मां ऐश्वर्या देवी ध्रुवा मिलकर उन्हें पढ़ाते हैं। इसके लिए वे आधुनिक तकनीक और एआई का भी भरपूर उपयोग करते हैं। जिव्यानके माता-पिता ने कहा, हमारा बेटा फुटबॉल, टेनिस और शतरंज जैसे खेल भी खेलता है, ताकि उसका बचपन भी सामान्य बना रहे। माता-पिता का कहना है कि वे इस सफलता से बेहद गर्व महसूस कर रहे हैं।
विज्ञापन
आंध्र प्रदेश मूल के जिव्यान रेड्डी ने पियर्सन एडएक्सेल जीसीएसई हायर गणित परीक्षा में 240 में से 196 अंक हासिल किए हैं। इस परीक्षा में आमतौर पर 16 वर्ष की आयु के छात्र बैठते हैं। जीसीएसई गणित परीक्षा ब्रिटेन की एक मुख्य माध्यमिक शिक्षा परीक्षा है। इसका पूरा नाम जनरल सर्टिफिकेट ऑफ सेकेंडरी एजुकेश है। एजेंसी
रोबोट के जरिये लोगों की मदद करना चाहते हैं
अब जिव्यान की योजना ए-लेवल गणित पढ़ने की है और बड़े होकर रोबोट व तकनीक के जरिये इंसानों की मदद करना उनका सपना है। शुरुआती असाधारण प्रतिभा को देखते हुए उनके माता-पिता ने फरवरी में उन्हें स्कूल से हटाकर घर पर शिक्षा (होम-स्कूलिंग) देना शुरू किया ताकि वह अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सकें।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: फास्ट फैशन से दूरी: अमेरिका में खुद फ्लेक्स उगाकर कपड़े बना रहीं ईव ओग्डेन शब, क्यों चुना पुराना तरीका?
विज्ञापन
मई में दी थी परीक्षा
जिव्यान ने इसी साल मई में जीसीएसई की परीक्षा दी थी। इसके परिणाम पिछले हफ्ते आए। अपनी उपलब्धि पर जिव्यान बेहद खुश हैं। परिणाम देखकर उनके माता-पिता भी गौरवान्वित हैं। हालांकि, वह ग्रेड 9 हासिल करना चाहते थे, लेकिन ग्रेड 8 मिलने पर भी वे संतुष्ट हैं। उन्हें कठिन समस्याओं को हल करना और उत्तर ढूंढने के नए तरीके तलाशना पसंद है।
पढ़ाई के लिए एआई की मदद टेनिस और फुटबॉल में है रुचि
जिव्यान के पिता ध्रुवा कुमार रेड्डी कट्टा और मां ऐश्वर्या देवी ध्रुवा मिलकर उन्हें पढ़ाते हैं। इसके लिए वे आधुनिक तकनीक और एआई का भी भरपूर उपयोग करते हैं। जिव्यानके माता-पिता ने कहा, हमारा बेटा फुटबॉल, टेनिस और शतरंज जैसे खेल भी खेलता है, ताकि उसका बचपन भी सामान्य बना रहे। माता-पिता का कहना है कि वे इस सफलता से बेहद गर्व महसूस कर रहे हैं।
कमेंट
कमेंट X