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Gotabaya Rajapaksa: श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति को भ्रष्टाचार मामले में बड़ी राहत, ₹1.7 करोड़ बरामद हुए थे
Thu, 19 Oct 2023 06:00 PM IST
ज्योति भास्कर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Thu, 19 Oct 2023 06:00 PM IST
सार
श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को भ्रष्टाचार के मुकदमे में बड़ी राहत मिली है। राष्ट्रपति भवन के पास कैश बरामद होने के मामले में श्रीलंका की भ्रष्टाचार विरोधी निकाय ने गोटाबया के पक्ष में फैसला सुनाया है।
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श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे
- फोटो : Social Media
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विस्तार
श्रीलंका के भ्रष्टाचार विरोधी आयोग से राष्ट्रपति आवास नकदी मामले में गोटाबाया राजपक्षे को बड़ी राहत मिली है। पूर्व राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप हटाने का फैसला सुनाया है। सबूतों की कमी का हवाला देते हुए, आयोग ने पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के खिलाफ मामला हटा दिया। जुलाई 2022 में श्रीलंका के राष्ट्रपति भवन के पास प्रदर्शनकारियों ने 17 मिलियन रुपये (करीब 1.7 करोड़) से अधिक की राशि बरामद होने का दावा किया था।
आयोग ने कोर्ट से कहा- कानूनी कार्यवाही नहीं कर सकते
रिश्वत या भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने वाले आयोग (सीआईएबीओसी) ने बुधवार को कोलंबो फोर्ट मजिस्ट्रेट की अदालत को रिपोर्ट दी। इसमें कहा गया कि सबूतों की कमी के कारण 74 वर्षीय राजनेता के खिलाफ आगे कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है। समाचार एजेंसी पीटीआई ने बताया, डेली मिरर ऑनलाइन की गुरुवार की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने अदालत को सूचित किया कि सबूत पर्याप्त नहीं है। ऐसे में आगे की कानूनी कार्यवाही नहीं की जाएगी।
15 महीने पहले की घटना
गौरतलब है कि राजपक्षे के खिलाफ श्रीलंका में बड़ा विद्रोह हुआ था। जनता के आक्रोश के बीच पिछले साल 9 जुलाई को राजपक्षे राष्ट्रपति भवन से भाग गए थे। इसके बाद फोर्ट कोलंबो में राष्ट्रपति भवन में 17 मिलियन रुपये से अधिक नकदी बरामद होने की खबरें सामने आई थीं।
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प्रदर्शनकारियों ने बरामद किए पैसे, पुलिस को दिया
पिछले साल जुलाई में हजारों प्रदर्शनकारियों ने गोटाबाया राजपक्षे के इस्तीफे की मांग करते हुए राजधानी- कोलंबो के राष्ट्रपति भवन पर धावा बोल दिया था। सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने 17.85 मिलियन रुपये से अधिक नकदी बरामद करने का दावा किया और उन्हें कोलंबो फोर्ट पुलिस को सौंप दिया।
तीन घंटे तक चली थी गवाही
बाद में राजपक्षे ने नकदी वापस करने के लिए अदालत में आवेदन किया था। हालांकि, कोलंबो फोर्ट मजिस्ट्रेट की अदालत ने याचिका खारिज कर दी। इस साल की शुरुआत में उनसे इस मामले में श्रीलंका पुलिस ने भी पूछताछ की थी। एक पुलिस प्रवक्ता ने कहा था कि अदालत के निर्देशानुसार उनके निजी घर पर तीन घंटे का बयान दर्ज किया गया था।
1.7 करोड़ रुपये पर राजपक्षे का बयान
अदालत के समक्ष दर्ज बयान में राजपक्षे ने कहा है कि राष्ट्रपति कार्यालय में मिला पैसा उनका है, लेकिन जनाक्रोश और व्यापक विरोध-प्रदर्शन के समय सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण वे पैसों की देखभाल नहीं कर सके। डेली मिरर पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार, गोटाबाया ने पुलिस को बताया कि पैसा उनका ही है और इसे उन लोगों के बीच बांटा जाना था जिनके घर प्रदर्शनकारियों ने बर्बाद कर दिए थे।
जनता के गुस्से से डरे राजपक्षे श्रीलंका छोड़कर भागे
बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति पिछले साल 13 जुलाई को श्रीलंका से भागकर मालदीव चले गए थे। मालदीव के बाद गोटाबाया सिंगापुर गए। उन्होंने 14 जुलाई को अपना इस्तीफा भेज दिया। इसके बाद रानिल विक्रमसिंघे के राष्ट्रपति बनने का रास्ता साफ हो गया। फिलहाल, रानिल ही श्रीलंका के राष्ट्रपति हैं। इस्तीफे के बाद राजपक्षे ने थाईलैंड के लिए उड़ान भरी थी। जनता का गुस्सा शांत होने के बाद गोटाबाया 2 सितंबर को श्रीलंका लौटे थे।
गलत काम के आरोप, श्रीलंका में दशकों से दबदबा
रिपोर्ट्स के मुताबिक राजपक्षे और उनके परिवार पर 2015 और 2019 के बीच गलत काम करने के कई आरोप लगे। बता दें कि श्रीलंका की सियासत में बेहद शक्तिशाली राजपक्षे परिवार का श्रीलंका की राजनीति पर दो दशकों से अधिक समय से दबदबा रहा है।
सियासत में राजपक्षे परिवार का दमखम
राजपक्षे परिवार के 77 वर्षीय मुखिया महिंदा राजपक्षे देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री रह चुके हैं। पिछले साल देश में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच उन्हें भी प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
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आयोग ने कोर्ट से कहा- कानूनी कार्यवाही नहीं कर सकते
रिश्वत या भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने वाले आयोग (सीआईएबीओसी) ने बुधवार को कोलंबो फोर्ट मजिस्ट्रेट की अदालत को रिपोर्ट दी। इसमें कहा गया कि सबूतों की कमी के कारण 74 वर्षीय राजनेता के खिलाफ आगे कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है। समाचार एजेंसी पीटीआई ने बताया, डेली मिरर ऑनलाइन की गुरुवार की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने अदालत को सूचित किया कि सबूत पर्याप्त नहीं है। ऐसे में आगे की कानूनी कार्यवाही नहीं की जाएगी।
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15 महीने पहले की घटना
गौरतलब है कि राजपक्षे के खिलाफ श्रीलंका में बड़ा विद्रोह हुआ था। जनता के आक्रोश के बीच पिछले साल 9 जुलाई को राजपक्षे राष्ट्रपति भवन से भाग गए थे। इसके बाद फोर्ट कोलंबो में राष्ट्रपति भवन में 17 मिलियन रुपये से अधिक नकदी बरामद होने की खबरें सामने आई थीं।
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प्रदर्शनकारियों ने बरामद किए पैसे, पुलिस को दिया
पिछले साल जुलाई में हजारों प्रदर्शनकारियों ने गोटाबाया राजपक्षे के इस्तीफे की मांग करते हुए राजधानी- कोलंबो के राष्ट्रपति भवन पर धावा बोल दिया था। सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने 17.85 मिलियन रुपये से अधिक नकदी बरामद करने का दावा किया और उन्हें कोलंबो फोर्ट पुलिस को सौंप दिया।
तीन घंटे तक चली थी गवाही
बाद में राजपक्षे ने नकदी वापस करने के लिए अदालत में आवेदन किया था। हालांकि, कोलंबो फोर्ट मजिस्ट्रेट की अदालत ने याचिका खारिज कर दी। इस साल की शुरुआत में उनसे इस मामले में श्रीलंका पुलिस ने भी पूछताछ की थी। एक पुलिस प्रवक्ता ने कहा था कि अदालत के निर्देशानुसार उनके निजी घर पर तीन घंटे का बयान दर्ज किया गया था।
1.7 करोड़ रुपये पर राजपक्षे का बयान
अदालत के समक्ष दर्ज बयान में राजपक्षे ने कहा है कि राष्ट्रपति कार्यालय में मिला पैसा उनका है, लेकिन जनाक्रोश और व्यापक विरोध-प्रदर्शन के समय सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण वे पैसों की देखभाल नहीं कर सके। डेली मिरर पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार, गोटाबाया ने पुलिस को बताया कि पैसा उनका ही है और इसे उन लोगों के बीच बांटा जाना था जिनके घर प्रदर्शनकारियों ने बर्बाद कर दिए थे।
जनता के गुस्से से डरे राजपक्षे श्रीलंका छोड़कर भागे
बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति पिछले साल 13 जुलाई को श्रीलंका से भागकर मालदीव चले गए थे। मालदीव के बाद गोटाबाया सिंगापुर गए। उन्होंने 14 जुलाई को अपना इस्तीफा भेज दिया। इसके बाद रानिल विक्रमसिंघे के राष्ट्रपति बनने का रास्ता साफ हो गया। फिलहाल, रानिल ही श्रीलंका के राष्ट्रपति हैं। इस्तीफे के बाद राजपक्षे ने थाईलैंड के लिए उड़ान भरी थी। जनता का गुस्सा शांत होने के बाद गोटाबाया 2 सितंबर को श्रीलंका लौटे थे।
गलत काम के आरोप, श्रीलंका में दशकों से दबदबा
रिपोर्ट्स के मुताबिक राजपक्षे और उनके परिवार पर 2015 और 2019 के बीच गलत काम करने के कई आरोप लगे। बता दें कि श्रीलंका की सियासत में बेहद शक्तिशाली राजपक्षे परिवार का श्रीलंका की राजनीति पर दो दशकों से अधिक समय से दबदबा रहा है।
सियासत में राजपक्षे परिवार का दमखम
राजपक्षे परिवार के 77 वर्षीय मुखिया महिंदा राजपक्षे देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री रह चुके हैं। पिछले साल देश में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच उन्हें भी प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा था।