Sri Lanka: राजपक्षे की कैद में हैं विक्रमसिंघे, इस इल्जाम पर अब राष्ट्रपति दे रहे हैं सफाई
Sri Lanka: राजपक्षे की पार्टी श्रीलंका पोडुजुना पेरामुना (एसएलपीपी) ने एक सार्वजनिक रैली आयोजित की थी। उसे अन्य वक्ताओं के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने भी संबोधित किया। इसमें उन नेताओं ने कहा कि विक्रमसिंघे देश को सही दिशा में ले जा रहे हैं...
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श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे को इस आरोप पर स्पष्टीकरण देना पड़ा है कि वे पूर्व राष्ट्रपति गोटाबया राजपक्षे के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। विक्रमसिंघे की यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) की एक अधिकारी ने सार्वजनिक बयान जारी कर इसका भी खंडन किया है कि विक्रमसिंघे पूर्व राष्ट्रपति को संरक्षण दे रहे हैं। ये मामला यहां बियरे झील के पास विरोध प्रदर्शन की हुई एक घटना के बाद गरमाया है। इस घटना में कई लोग अंडरवियर में झील से बाहर आकर खड़े हुए और विक्रमसिंघे को राजपक्षे का मोहरा बताया।
इसके पहले राजपक्षे की पार्टी श्रीलंका पोडुजुना पेरामुना (एसएलपीपी) ने एक सार्वजनिक रैली आयोजित की थी। उसे अन्य वक्ताओं के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने भी संबोधित किया। इसमें उन नेताओं ने कहा कि विक्रमसिंघे देश को सही दिशा में ले जा रहे हैं। इस टिप्पणी से देश के एक बड़े तबके में गुस्सा भड़क उठा है।
यूएनपी के महासचिव पलिता रानागे बंडारा ने इस मामले में राष्ट्रपति विक्रमसिंघे को लपेटे जाने की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि जो नेता आज राष्ट्रपति पर राजपक्षे परिवार को संरक्षण देने का आरोप लगा रहे हैं, उन्हें ये बात याद रखनी चाहिए कि विक्रमसिंघे ने उनका पुनर्वास किया है। वरना, ऐसे नेताओं का यह हाल हो गया था कि वे अपने घर से भी बाहर नहीं निकल सकते थे। बंडारा ने कहा- लोग बियरे झील पर अंडरवियर में आए। उधर नेताओं को इसके लिए रानिल विक्रमसिंघे का शुक्रगुजार होना चाहिए कि आज वे सुरक्षित अपने वाहनों में बैठ कर संसद पहुंचते हैं या रैलियों को संबोधित करने चले जाते हैं।
हाल में कई विपक्षी नेताओं ने ये बात कही है कि विक्रमसिंघे को राजपक्षे परिवार ने कैद कर रखा है। जन विद्रोह के बाद गोटाबया राजपक्षे ने राष्ट्रपति पद छोड़ दिया था। उसके बाद श्रीलंका की संसद ने विक्रमसिंघे को राष्ट्रपति चुना। उन्हें एसएलपीपी के समर्थन निर्वाचित किया गया। पर्यवेक्षको के मुताबिक इसलिए ये धारणा देश में बनी रही है कि राजपक्षे परिवार ने उन्हें राष्ट्रपति बनवाया और इसके बदले विक्रमसिंघे राजपक्षे परिवार को संरक्षण दे रहे हैं।
विश्लेषकों के मुताबिक आर्थिक मोर्चे पर विक्रमसिंघे की लगातार बढ़ रही नाकामियों के कारण देश में माहौल उनके खिलाफ होता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की शर्तें पूरी करने में उनकी सरकार की नाकामी के कारण मंजूर हुआ 2.9 बिलियन डॉलर का कर्ज भी देश को अभी तक नहीं मिल सका है। इस बीच विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि श्रीलंका का मुद्रा संकट पहले की तरह कायम है, जिससे निकलने के लिए उसे बुनियादी सुधार करने होंगे और अपने शासन तंत्र को बेहतर बनाना होगा।
विश्व बैंक ने अपने ताजा आकलन में कहा है कि श्रीलंका के जीडीपी में इस वर्ष 9.2 फीसदी की गिरावट आएगी। उसने इसके लिए पूर्व राजपक्षे सरकार की टैक्स में कटौती और उस वजह से राजकोष में आई कमी की भरपाई के लिए नोटों की अनियंत्रित छपाई करने की नीति को जिम्मेदार ठहराया है।