फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Sri Lanka's top court rules against Gender Equality Bill

Sri Lanka: शीर्ष अदालत का लैंगिक समानता विधेयक के खिलाफ फैसला, राष्ट्रपति ने रखा चयन समिति के गठन का प्रस्ताव

Tue, 18 Jun 2024 05:29 PM IST
मिथिलेश नौटियाल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: मिथिलेश नौटियाल Updated Tue, 18 Jun 2024 05:29 PM IST
सार

Sri Lanka: श्रीलंका की शीर्ष अदालत ने 'लैंगिक समानता' विधेयक के खिलाफ फैसला सुनाया है। उधर राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने अदालत के फैसले पर गौर करने के लिए चयन समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा है।

विज्ञापन
Sri Lanka's top court rules against Gender Equality Bill
कोर्ट फैसला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्रीलंका की सुप्रीम कोर्ट ने लैंगिक समानता विधेयक के खिलाफ फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि 'लैंगिक समानता' विधेयक की व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 12 के साथ मेल नहीं खाती। इसके बाद श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने फैसले पर गौर करने के लिए एक चयन समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा है। लैंगिक समानता विधेयक का उद्देश्य श्रीलंका में सभी के लिए समान अवसर प्रदान करना है।

विज्ञापन


शीर्ष अदालत ने क्या कहा?
अदालत में लैंगिक समानता विधेयक के खिलाफ याचिकाएं दायर की गईं थीं। इनमें तर्क दिया गया था कि अगर विधेयक पारित हो जाता है तो विभिन्न समुदायों की सांस्कृतिक संवेदनशीलता को नुकसान पहुंच सकता है। याचिकाकर्ताओं ने यह दलील भी दी कि यह विधेयक समलैंगिक विवाह की अनुमति देगा। इसके बाद शीर्ष अदालत ने भी माना कि देश में समलैंगिक विवाह की अनुमति देना संवैधानिक और सांस्कृतिक रूप से गलत होगा।
विज्ञापन

अदालत ने फैसला सुनाया है कि इस विधेयक को अपनाने के लिए संसद के दो-तिहाई सदस्यों की स्वीकृति जरूरी है। इसके अलावा अदालत ने जनमत संग्रह का भी सुझाव दिया है। शीर्ष अदालत ने लैंगिक समानता विधेयक की एक धारा को खारिज करते हुए इसके खिलाफ फैसला सुनाया। इसके साथ ही इस विधेयक को लेकर निचली अदालतों द्वारा लिए गए सभी फैसले भी रद्द हो गए हैं। हाल ही में श्रीलंका में महिला अधिकारियों को लेकर दस न्यायाधीशों की एक पीठ ने लैंगिक समानता विधेयक के पक्ष में फैसला सुनाया था। 
विज्ञापन
विज्ञापन


चयन समिति का हो गठन- विक्रमसिंघे
राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने संसद में अदालत के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि सदन शीर्ष अदालत के फैसले से सहमत नहीं है। न्यायालय ने दंड संहिता में संशोधन को भी नजरअंदाज कर दिया है। विक्रमसिंघे ने विशेषाधिकार का मुद्दा उठाते हुए संसद में कहा कि अदालत का यह फैसला निजी शिक्षा विधेयक को भी चुनौती देता है। उन्होंने संसद में अदालत के फैसले पर गौर करने के लिए एक चयन समिति को गठित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि चयन समिति में अधिकांश महिला सदस्यों को नियुक्त किया जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed