Sri Lanka tax hike: टैक्स में इजाफे के बाद बचाव की मुद्रा में श्रीलंका सरकार, दिखाए भविष्य के लिए सब्जबाग
Sri Lanka tax hike: श्रीलंका में रानिल विक्रमसिंघे सरकार ने नए टैक्स ढांचे का जो गजट जारी किया है, उसके मुताबिक नई दरें एक अक्तूबर से लागू हो गई हैं। इससे 2019 में तत्कालीन राष्ट्रपति गोटाबया राजपक्षे ने जो टैक्स छूट दी थी, वह समाप्त हो गई है...
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पुरानी टैक्स दरों को वापस लाने का राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे सरकार के फैसले पर श्रीलंका में विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। बेलगाम महंगाई के बीच लोगों को टैक्स का बोझ बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति विक्रमसिंघे की देश भर में आलोचना हुई है। उद्योग और कारोबार जगत से जुड़े लोगों ने तो इसे बेहद हानिकारक फैसला बताया है और कहा है कि इसकी वजह से कुशल कर्मी देश से बाहर जाने को मजबूर हो जाएंगे।
इन आलोचनाओं के बीच अब श्रीलंका सरकार ने अपना पक्ष रखा है। उसने दावा किया है कि इस कदम की वजह से लंबी अवधि में श्रीलंका में ब्याज दर घटाने के लिए अनुकूल स्थिति बनेगी। सरकार ने कहा है कि टैक्स दरें बढ़ने से राजकोष में अधिक राजस्व आएगा, इसलिए ट्रेजरी बिल और बॉन्ड जारी कर पैसा जुटाने की सरकार की मजबूरी खत्म हो जाएगी। पर्यवेक्षकों के मुताबिक सरकार ने ये दलील साफ तौर पर कारोबारियों को लुभाने के मकसद से दी है।
श्रीलंका सरकार के ट्रेजरी बिल को बाजार जिस ब्याज दर पर खरीदता है, यहां आम तौर पर उसे ही वास्तविक ब्याज दर माना जाता है। यानी सेंट्रल बैंक जो ब्याज दर घोषित करता है, उसकी साख खत्म हो गई है। ये आम चलन है कि सरकार ट्रेजरी बिल और बॉन्ड जारी कर जितना अधिक कर्ज उगाहती है, उन पर ब्याज दरें उतनी ज्यादा बढ़ जाती हैं। फिलहाल श्रीलंका के बॉन्ड्स पर ब्याज दर बेहद ऊंची है। ये दर औसतन 30 फीसदी के आसपास बनी हुई है।
श्रीलंका में रानिल विक्रमसिंघे सरकार ने नए टैक्स ढांचे का जो गजट जारी किया है, उसके मुताबिक नई दरें एक अक्तूबर से लागू हो गई हैं। इससे 2019 में तत्कालीन राष्ट्रपति गोटाबया राजपक्षे ने जो टैक्स छूट दी थी, वह समाप्त हो गई है। राजपक्षे के उस फैसले के समय जो टैक्स दरें थीं, अब उन्हें बहाल कर दिया गया है। तब दी गई टैक्स छूट को श्रीलंका में पैदा हुए आर्थिक संकट का एक प्रमुख कारण माना गया है।
नई दरों के मुताबिक अब सालाना 12 लाख रुपये आमदनी वाले लोग टैक्स दायरे में आएंगे। कॉरपोरेट टैक्स को 24 से बढ़ा कर 30 फीसदी कर दिया गया है। निवेशित संपत्तियों पर पूंजीगत लाभ कर (कैपिटल गेन्स टैक्स) की दर 10 से बढ़ा कर 30 फीसदी की गई है।
सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि इस बढ़ोतरी से सरकार की आमदनी बढ़ेगी, जिससे लंबी अवधि में ब्याज दरें घट जाएंगी। लेकिन न्होंने कहा- ‘ऐसा रातों-रात नहीं होगा। अभी नई टैक्स दरों को कानूनी दर्जा देने के लिए इसी महीने संसद में बिल पारित कराया जाएगा। उसके बाद नई दर पर टैक्स की वसूली शुरू होगी।’
विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि श्रीलंका के बॉन्ड या ट्रेजरी बिल में विदेशी निवेश बिल्कुल ठहर गया है। बीते अप्रैल में सरकार के डिफॉल्ट कर देने के बाद बॉन्ड और टी-बिल में निवेश सिर्फ देशी निवेशक ही कर रहे हैं। वे भी 30 फीसदी जैसी ऊंची ब्याज दर पर ही इनमें अपना पैसा लगा रहे हैं।
श्रीलंका भारतीय क्रेडिट लाइन का उपयोग करेगा
बिजली की ऊंची दरों को लेकर विरोध का सामना कर रही श्रीलंका सरकार ने शनिवार को घोषणा की कि वह राज्य की इमारतों और धार्मिक संस्थानों में छत पर लगे सौर पैनलों के भुगतान के लिए भारतीय 10 करोड़ डॉलर की ऋण सुविधा का इस्तेमाल करेगी। अगस्त में श्रीलंका ने नौ वर्षों के बाद बिजली की दरों में औसतन 75 प्रतिशत की वृद्धि की थी। सरकार ने राज्य बिजली इकाई सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (सीईबी) के नुकसान को कम करने के लिए बिजली शुल्क बढ़ाया था। ऊर्जा मंत्री कंचना विजेसेकारा ने शनिवार को एक बयान में कहा कि रूफटॉप सोलर के लिए भारत द्वारा दी गई 100 मिलियन अमरीकी डॉलर की क्रेडिट लाइन का इस्तेमाल स्कूलों, विश्वविद्यालयों, शिक्षा संस्थानों, अस्पतालों, सरकारी भवनों और धार्मिक संस्थानों को लैस करने के लिए किया जाएगा।