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Sri Lanka: श्रीलंकाई तमिल पार्टियां मिलकर लड़ेंगीं राष्ट्रपति चुनाव, बनी सहमति, जानें कौन होगा चेहरा

Mon, 22 Jul 2024 04:28 PM IST
बशु जैन वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: बशु जैन Updated Mon, 22 Jul 2024 04:28 PM IST
सार

पिछले सप्ताह चुनाव आयोग ने कहा था कि देश में राष्ट्रपति चुनाव की घोषणा इसी महीने के अंत तक हो जाएगी। आयेाग ने 17 सितंबर से 16 अक्तूबर के बीच चुनाव कराने के संकेत दिए थे। चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने तैयारी तेज कर दी है।

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Sri Lankan Tamil parties field common candidate for presidential election
श्रीलंका का राष्ट्रीय ध्वज। - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

श्रीलंका में इस साल के अंत में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने तैयारी शुरू कर दी है। श्रीलंकाई तमिल पार्टियों ने प्रमुख तमिल दल ITAK का साथ छोड़ दिया। इसके अलावा श्रीलंकाई तमिल पार्टियों ने एक चुनाव में मिलकर एक उम्मीदवार उतारने का फैसला लिया है। इसे लेकर पार्टियों ने सोमवार को एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। 

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पिछले सप्ताह चुनाव आयोग ने कहा था कि देश में राष्ट्रपति चुनाव की घोषणा इसी महीने के अंत तक हो जाएगी। आयेाग ने 17 सितंबर से 16 अक्तूबर के बीच चुनाव कराने के संकेत दिए थे। चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने तैयारी तेज कर दी है। सोमवार को जाफना में तमिल ईलम मुक्ति संगठन (टीईएलओ), पीपुल्स लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन ऑफ तमिल ईलम (पीएलओटीई), तमिल प्रोग्रेसिव अलायंस (टीपीए), तमिल नेशनल पीपुल्स फ्रंट (टीएनपीएफ), और ईलम पीपुल्स रिवोल्यूशनरी लिबरेशन फ्रंट (ईपीआरएलएफ) और तमिल पीपुल्स कांग्रेस एसोसिएशन (टीपीसीए) के नेताओं ने चुनाव लड़ने के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। इसमें तय किया गया कि श्रीलंकाई तमिल दल चुनाव में मिलकर एक आम उम्मीदवार उतारेंगे। समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले दलों में पूर्व उत्तरी मुख्यमंत्री सीवी विग्नेश्वरन की टीपीए भी शामिल है।
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वहीं तमिल नेशनल अलायंस में शामिल मुख्य तमिल पार्टी इलंकाई तमिल अरासु कच्छी (आईटीएके) ने समझौते में हिस्सा नहीं लिया। वहीं चुनाव को लेकर राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने अब तक अपनी उम्मीदवारी की घोषणा नहीं की है। वहीं विपक्षी नेता साजिथ प्रेमदासा और मार्क्सवादी जेवीपी के नेता अनुरा कुमारा दिसानायके ने चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है। 
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सुप्रीम कोर्ट में चुनाव स्थगित करने के लिए दायर की गई थी याचिका
श्रीलंका सुप्रीम कोर्ट में पिछले दिनों चुनाव स्थगित करने को लेकर याचिका दायर की गई थी। मुख्य न्यायाधीश जयंत जयसूर्या की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने पेशे से याचिका खारिज करते हुए वकील याचिकाकर्ता पर भी जुर्माना लगाया था। वकील ने याचिका में दावा किया कि साल 2015 में किया गया 19वां संविधान संशोधन तय प्रक्रिया के तहत नहीं हुआ क्योंकि इसे अंगीकार करने के लिए कोई जनमत संग्रह नहीं कराया गया था। बता दें कि यह दूसरी याचिका है जो 17 से 16 अक्टूबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के खिलाफ दायर की गई।


राष्ट्रपति विक्रमसिंघे पर विपक्षी दलों ने लगाया आरोप 
देश में विपक्षी दलों का आरोप था कि ये याचिकाएं मौजूद राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की ओर से दायर कराई गईं थीं। ताकि राष्ट्रपति चुनाव में देरी हो और वह बिना चुनाव के राष्ट्रपति बने रहें। विपक्ष का आरोप था कि रानिल विक्रमसिंघे चुनाव का सामना करने से डर रहे हैं। हालांकि, रानिल विक्रमसिंघे ने भरोसा दिलाया था कि निष्पक्ष निर्वाचन आयोग की देखरेख में समय पर चुनाव होंगे। 

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