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Thane: 14 साल की छात्रा, दुष्कर्म का आरोप और बरी हुआ कोच; आखिर कोर्ट ने किन आधारों पर दिया फैसला?

Sun, 12 Jul 2026 12:12 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, पुणे
पीटीआई, पुणे Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sun, 12 Jul 2026 12:12 PM IST
सार

ठाणे की विशेष पॉक्सो अदालत ने 14 वर्षीय छात्रा से दुष्कर्म और गर्भवती करने के आरोपी टेनिस कोच को सबूतों की कमी, पीड़िता के घटना के बाद के व्यवहार, डीएनए रिपोर्ट के निष्कर्षहीन रहने और जांच में कई खामियों का हवाला देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि केवल आरोपों की गंभीरता के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। 

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Thane court acquits tennis coach of  Exploitation minor girl cites her continued training with him
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

ठाणे की एक अदालत ने 14 वर्षीय छात्रा से दुष्कर्म और उसे गर्भवती करने के आरोपी एक टेनिस कोच को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि घटना के बाद पीड़िता का व्यवहार और बिना किसी शिकायत के उसी कोच से लगातार प्रशिक्षण लेना आरोपी के खिलाफ कानून में मौजूद दोष मानने की धारणा को कमजोर करता है। अदालत के अनुसार, पीड़िता के घटना के बाद के व्यवहार ने उसकी गवाही की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

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घटना के बाद पीड़िता के व्यवहार पर कोर्ट ने क्या कहा?
पॉक्सो मामलों की विशेष अदालत के न्यायाधीश प्रेमल एस विठलानी ने 10 जुलाई को दिए अपने फैसले में कहा कि घटना के बाद पीड़िता का व्यवहार उसकी गवाही की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा करता है। अदालत ने कहा कि पीड़िता ने कथित घटना के बाद भी बिना किसी शिकायत के आरोपी कोच से प्रशिक्षण जारी रखा। ऐसे में केवल उसकी गवाही के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराना सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
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आरोपी पर कौन-कौन से आरोप लगे थे?
अदालत ने 40 वर्षीय आरोपी, जो नवी मुंबई का रहने वाला है, को भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो एक्ट के तहत लगाए गए सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपने आरोपों के समर्थन में ठोस और भरोसेमंद साक्ष्य पेश करने में असफल रहा। मामले में कई महत्वपूर्ण विरोधाभास सामने आए और आरोपों की पुष्टि करने वाला पर्याप्त साक्ष्य भी नहीं मिला।
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अभियोजन पक्ष ने क्या दावा किया था?
अभियोजन के अनुसार, नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा ने आरोप लगाया था कि अगस्त और सितंबर 2023 में ठाणे की एक आवासीय सोसाइटी स्थित टेनिस कोर्ट के पास आरोपी कोच ने उसके साथ दो बार जबरन दुष्कर्म किया। यह मामला अक्टूबर 2023 में तब सामने आया, जब छात्रा ने पेट दर्द की शिकायत की। मेडिकल जांच में पता चला कि वह सात सप्ताह की गर्भवती थी। इसके बाद चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत उसका गर्भ समापन कराया गया।

पॉक्सो एक्ट की कानूनी धारणा पर कोर्ट ने क्या टिप्पणी की?
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपने मामले की मजबूत बुनियाद स्थापित करने में नाकाम रहा। फैसले में कहा गया कि किसी भी कानूनी धारणा को पूर्ण और अंतिम नहीं माना जा सकता। पॉक्सो एक्ट की धारा 29 के तहत मिलने वाली कानूनी धारणा भी तभी लागू होती है, जब अभियोजन पहले ऐसे तथ्य स्थापित करे, जो उस धारणा को लागू करने के लिए आवश्यक आधार तैयार करें।

पीड़िता की पढ़ाई और व्यवहार को लेकर अदालत ने क्या कहा?
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि पीड़िता एक अंतरराष्ट्रीय स्कूल में पढ़ती थी, जहां उसे यौन उत्पीड़न की शिकायत कैसे करनी है, इस बारे में जागरूकता और यौन शिक्षा दी गई थी। इसके बावजूद वह कथित घटनाओं के बाद भी सामान्य तरीके से आरोपी के संपर्क में रही और उससे प्रशिक्षण लेती रही। न्यायाधीश ने कहा कि घटना के बाद पीड़िता के व्यवहार को देखते हुए उसकी गवाही पूरी तरह भरोसेमंद और विश्वसनीय नहीं मानी जा सकती। इसलिए केवल उसकी गवाही के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

जांच में किन कमियों की ओर अदालत ने ध्यान दिलाया?
अदालत ने कहा कि पुलिस ने उन दोस्तों के बयान दर्ज नहीं किए, जो कथित घटनाओं से पहले पीड़िता के साथ टेनिस प्रशिक्षण ले रहे थे। इसके अलावा गर्भ समापन के बाद भ्रूण की कराई गई फोरेंसिक डीएनए जांच किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। अदालत ने यह भी कहा कि आवासीय सोसाइटी के सीसीटीवी फुटेज में कोच और छात्रा के सामान्य समय पर अंदर आने और बाहर जाने के अलावा कोई आपत्तिजनक गतिविधि दिखाई नहीं दी।


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फैसले के अंत में अदालत ने क्या कहा?
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि वह इस बात से पूरी तरह अवगत है कि मामले में एक नाबालिग के साथ दो बार दुष्कर्म जैसे बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। लेकिन केवल आरोपों की गंभीरता के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में दोष सिद्ध करने के लिए ठोस, विश्वसनीय और पर्याप्त साक्ष्य आवश्यक होते हैं।

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