Trump MMR Vaccine Order: क्या ट्रंप बच्चों का जीवन खतरे में डाल रहे? टीकाकरण पर लिया बड़ा फैसला, विरोध भी शुरू
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बच्चों के टीकाकरण की व्यवस्था बदलने वाले आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें खसरा, गलसुआ और रूबेला से बचाने वाले एमएमआर टीके को अलग-अलग देने और बच्चों के टीके अलग-अलग समय पर लगाने की बात कही गई है। ट्रंप इसे अभिभावकों के अधिकार और विज्ञान की जीत बता रहे हैं। क्या ट्रंप का फैसला स्वास्थ्य व्यवस्था में नई बहस छेड़ेगा? क्या सच में ये फैसला बच्चों के जीवन को खतरे में डाल सकता है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बच्चों के टीकाकरण को लेकर बड़ा कार्यकारी आदेश जारी किया है। इस आदेश में बचपन में लगाए जाने वाले टीकों की सिफारिशों को नए तरीके से तैयार करने की बात कही गई है। ट्रंप लंबे समय से इस विचार का समर्थन करते रहे हैं कि बच्चों को एक साथ कई टीके देने के बजाय उन्हें अलग-अलग चिकित्सकीय दौरों में लगाया जाना चाहिए। इसी सोच के तहत अब खसरा, गलसुआ और रूबेला यानी एमएमआर के टीके को भी तीन अलग-अलग टीकों के रूप में देने की योजना बनाने का निर्देश दिया गया है। इस फैसले को लेकर अमेरिका में स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासन के बीच बहस तेज हो गई है।
ट्रंप के आदेश में आखिर क्या बदलेगा?
ट्रंप के आदेश में कहा गया है कि बच्चों को लगने वाले टीकों को जहां संभव हो, अलग-अलग चिकित्सकीय मुलाकातों में दिया जाए। एमएमआर टीके को तीन अलग-अलग टीकों में बांटने की योजना बनाने का भी निर्देश दिया गया है। अमेरिका में फिलहाल खसरा, गलसुआ और रूबेला के लिए अलग-अलग टीका उपलब्ध नहीं है। आदेश में अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग को टीकों पर शोध बेहतर करने और अलग-अलग एमएमआर टीके उपलब्ध कराने की योजना तैयार करने को कहा गया है। ट्रंप ने इसे अभिभावकों के अधिकार, धार्मिक और संवैधानिक अधिकार तथा विज्ञान की जीत बताया है।
विशेषज्ञों को बच्चों के संक्रमण का डर क्यों है?
सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि टीकों के बीच ज्यादा अंतर रखने से बच्चों के संक्रमण की चपेट में आने का खतरा बढ़ सकता है। उनका तर्क है कि अगर किसी बच्चे को एक बीमारी से बचाने वाला टीका मिल गया, लेकिन दूसरे टीके के लिए अगली मुलाकात तक इंतजार करना पड़ा, तो वह उस दौरान ऐसी बीमारी से संक्रमित हो सकता है, जिससे टीका बचाव कर सकता है। बच्चों के टीकों और उन्हें किस उम्र में तथा किस संयोजन में देना है, इनका लंबे समय तक अध्ययन किया जाता है और इस्तेमाल के बाद भी उनकी सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जाती है।
क्या ट्रंप ने वैक्सीन और ऑटिज्म को फिर जोड़ा?
ट्रंप ने आदेश की घोषणा के दौरान वैक्सीन की संख्या और उन्हें देने के समय को अमेरिका में बढ़ रहे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से जोड़ने की बात कही। हालांकि, इनपुट के अनुसार वैज्ञानिक सहमति और दशकों के अध्ययनों ने वैक्सीन और ऑटिज्म के बीच किसी संबंध को खारिज किया है। ट्रंप प्रशासन के इस रुख का विरोध भी सामने आया है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष डॉ. एंड्रयू रेसिन ने कहा कि इस फैसले से ऐसी स्थिति में अनिश्चितता, डर और भ्रम पैदा हो रहा है, जहां इसकी जरूरत नहीं है।
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वैक्सीन नीति पर अंतिम अधिकार किसका होगा?
अमेरिका में स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए टीकाकरण अनिवार्य करने का अधिकार राज्यों के पास है, संघीय सरकार के पास नहीं। ट्रंप के आदेश में उन राज्यों से अपनी नीतियों में बदलाव पर विचार करने को कहा गया है, जहां स्कूलों में टीकाकरण अनिवार्य है। इससे पहले भी ट्रंप प्रशासन का स्वास्थ्य विभाग बच्चों के टीकाकरण की सिफारिशों में बदलाव की कोशिश कर चुका है, लेकिन उस बदलाव को संघीय अदालत ने रोक दिया था। नई संघीय सिफारिशों में बदलाव के लिए आम तौर पर रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के निदेशक की मंजूरी की जरूरत होती है।
ट्रंप के फैसले का विरोध कहां से हुआ?
ट्रंप के फैसले पर उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी के भीतर से भी सवाल उठे हैं। सीनेट की स्वास्थ्य समिति के रिपब्लिकन अध्यक्ष और डॉक्टर बिल कैसिडी ने कहा कि टीके सुरक्षित हैं और ऑटिज्म का कारण नहीं बनते। उन्होंने कार्यकारी आदेश को गलत बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति के पास ऐसे बदलाव करने की विशेषज्ञता नहीं है। दूसरी ओर, ट्रंप के प्रवक्ता ने कहा कि राष्ट्रपति उन कई अभिभावकों में शामिल हैं, जिन्होंने संयुक्त एमएमआर टीके को लेकर सवाल और चिंताएं उठाई हैं।
क्या ट्रंप प्रशासन पहले भी टीका नीति बदल चुका है?
बच्चों के टीकाकरण को लेकर यह ट्रंप प्रशासन का पहला बड़ा कदम नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर ने प्रशासन के पहले साल में टीकाकरण संबंधी दिशा-निर्देशों में बड़े बदलाव की कोशिश की थी। उन्होंने 17 सदस्यों वाली पूरी वैक्सीन सलाहकार समिति को हटा दिया था और उसकी जगह ऐसे सदस्यों को नियुक्त किया था, जिन्होंने ज्यादा प्रतिबंध वाली सिफारिशें दीं। बाद में इन सिफारिशों को भी संघीय अदालत ने रोक दिया था। अब नए कार्यकारी आदेश के बाद अमेरिका में बच्चों के टीकाकरण की नीति को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।