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UN Reforms: राजदूत पी हरीश बोले- दो-स्तरीय स्थायी सदस्यता गलत, भारत 'वीटो के अधिकार पर जी4 के प्रस्ताव' के साथ

वर्ल्ड डेस्क Published by: अमन तिवारी Updated Wed, 15 Apr 2026 09:52 AM IST
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सार

भारत ने UNSC में भेदभावपूर्ण सदस्यता का विरोध करते हुए जी4 के 15 साल तक वीटो टालने के प्रस्ताव का समर्थन किया है। भारत का मानना है कि स्थायी श्रेणी में विस्तार के बिना सुधार अधूरा है और इससे मौजूदा वैश्विक असंतुलन और असमानता बनी रहेगी।

UNSC Reforms India Opposes Discriminatory Membership Supports G4 Proposal to Defer Veto Power for 15 Years
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों की मांग को लेकर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। भारत ने सुरक्षा परिषद में किसी भी तरह की भेदभावपूर्ण दो-स्तरीय स्थायी सदस्यता का विरोध किया है। हालांकि, भारत जी4 के उस प्रस्ताव पर सहमत हो गया है, जिसमें नए स्थायी सदस्यों के लिए वीटो पावर के इस्तेमाल को 15 वर्षों तक टालने की बात कही गई है।
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वास्तविक सुधार के लिए वीटो जरूरी
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) की बैठक में कहा कि वीटो के साथ स्थायी श्रेणी का विस्तार सुरक्षा परिषद के वास्तविक सुधार के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि UNSC सुधार के ढांचे के तहत वीटो के साथ या बिना वीटो की एक नई श्रेणी बनाना पहले से चल रही उस चर्चा को और जटिल बना देगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भारत जी4 के उस रुख से सहमत है जिसे ब्राजील के उप स्थायी प्रतिनिधि नॉर्बर्टो मोरेटी ने उनकी ओर से पेश किया था।
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जी4 का लचीला प्रस्ताव
भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान के समूह जी4 की ओर से ब्राजील के उप स्थायी प्रतिनिधि नॉर्बर्टो मोरेटी ने यह प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा कि बातचीत को रचनात्मक बनाने और लचीलापन दिखाने के लिए जी4 का प्रस्ताव है कि नए स्थायी सदस्य तब तक वीटो का उपयोग नहीं करेंगे, जब तक कि 15 साल की समीक्षा के दौरान इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं ले लिया जाता। मोरेटी ने तर्क दिया कि वीटो के मुद्दे को सुरक्षा परिषद की पुरानी संरचना को बनाए रखने का बहाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, नए स्थायी सदस्यों के आने से परिषद अधिक लोकतांत्रिक बनेगी।

ये भी पढे़ं: US-Iran Talks: 'गहरा अविश्वास रातों-रात दूर नहीं हो सकता', अमेरिका-ईरान विवाद पर बोले उपराष्ट्रपति जेडी वेंस

ऐतिहासिक असंतुलन का हवाला
पी हरीश ने 1965 के सुधारों का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय केवल चार गैर-स्थायी सदस्य जोड़े गए थे, जिससे वीटो रखने वाले पांच स्थायी सदस्यों को सापेक्ष लाभ मिला। इससे स्थायी और गैर-स्थायी सदस्यों का अनुपात 5:6 से बदलकर 5:10 हो गया था। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अब स्थायी सदस्यों को जोड़े बिना सुधार किए गए, तो यह अनुपात और भी बिगड़ जाएगा और मौजूदा असमानता हमेशा के लिए बनी रहेगी।

विरोध और अन्य देशों की मांग
दूसरी ओर, इटली और पाकिस्तान जैसे देशों ने स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने का विरोध किया है। उनका दावा है कि अधिक देशों के पास वीटो पावर होने से परिषद की कार्यक्षमता कम हो जाएगी। वहीं, अफ्रीका समूह ने ऐतिहासिक अन्याय को खत्म करने के लिए नए सदस्यों के लिए तुरंत वीटो पावर की मांग की है। उनका तर्क है कि संयुक्त राष्ट्र के गठन के समय अधिकांश अफ्रीकी देश उपनिवेशवाद के शिकार थे और उन्हें स्थायी सदस्यता से बाहर रखा गया था।

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