US: अमेरिका में हिंदू मंदिरों को खतरों से बचाने की तैयारी, कांग्रेस ने पेश किया बड़ा बिल; कैसे होगी सुरक्षा?
अमेरिका में बीते कुछ समय से आस्था के स्थान खुद असुरक्षा की जद में आ गए हैं। हिंदू मंदिरों से लेकर यहूदी प्रार्थना स्थल, मस्जिदें और चर्च तक कई बार हो चुके हमले और धमकियों की घटनाओं ने पूरे अमेरिका में गंभीर बहस छेड़ दी है। इसी उथल-पुथल के बीच अमेरिकी कांग्रेस में एक सख्त और ऐतिहासिक प्रस्ताव पेश किया गया है। आइए इसके बारे में जानते हैं।
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अमेरिका में अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों पर हो रहे लगातार हमलों के बीच अमेरिकी कांग्रेस में एक नया प्रस्ताव रखा गया है। इसका उद्देश्य हिंदू मंदिरों और अन्य पूजा स्थलों को उत्पीड़न से बचाना है। लॉमेकर्स का कहना है कि अलग-अलग धर्मों के लोगों के लिए खतरे बढ़ रहे हैं। इस प्रस्ताव का नाम 'सेफगार्डिंग एक्सेस टू कांग्रेगेशन्स एंड रिलीजियस एस्टैब्लिशमेंट्स फ्रॉम डिसरप्शन' (सेक्रेड एक्ट) है। इसके तहत किसी भी पूजा स्थल के 100 फीट के दायरे में लोगों को डराना, रास्ता रोकना या परेशान करना संघीय अपराध माना जाएगा।
इस प्रस्ताव को टॉम सुओजी ने पेश किया था और मैक्स मिलर ने इसमें उनका साथ दिया। सुओजी ने कहा कि किसी को भी परेशान होने या डराए-धमकाए जाने का हकदार नहीं होना चाहिए, खासकर तब जब वे अपने पूजा स्थल की ओर जा रहे हों। वहीं, मिलर ने कहा कि हर अमेरिकी को बिना किसी डर, धमकी या उत्पीड़न के अपने धर्म का पालन करने का हक है।
अमेरिका में धार्मिक जगहों पर बढ़ते हमले
बता दें अमेरिकी कांग्रेस का यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब धार्मिक स्थलों के आसपास हमलों और डराने-धमकाने की घटनाओं को लेकर चिंता बढ़ रही है। समर्थकों का कहना है कि हिंदू मंदिर, यहूदी प्रार्थना स्थल, मस्जिद और चर्च- सभी इस तरह की घटनाओं का सामना कर रहे हैं। 'हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन' ने कहा कि पूरे अमेरिका में हिंदू मंदिरों को निशाना बनाने और उन्हें अपवित्र करने की घटनाओं में चिंताजनक बढ़ोतरी हुई है, जिससे श्रद्धालुओं में असुरक्षा की भावना पैदा हुई है।
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इस कानून में क्या-क्या होगा?
ऐसे में इस कानून के तहत अगर कोई पहली बार दोषी पाया जाता है, तो उसे जुर्माना या एक साल तक की जेल हो सकती है। अगर वही व्यक्ति दोबारा ऐसा करता है, तो सजा और सख्त हो सकती है, जिसमें तीन साल तक की जेल भी शामिल है। यह बिल पीड़ितों को दीवानी (सिविल) मामले दर्ज करने का अधिकार भी देता है। इसके अलावा अमेरिका के अटॉर्नी जनरल समेत अधिकारी ऐसे मामलों में रोक लगाने और मुआवजा दिलाने के लिए कदम उठा सकते हैं।
बिल को मिला कई संगठनों का समर्थन
गौरतलब है कि इस बिल को कई संगठनों का समर्थन मिला है, जिनमें 'एंटी-डेफेमेशन लीग', 'अमेरिकन ज्यूइश कमेटी' और 'इस्लामिक सोसाइटी ऑफ नॉर्थ अमेरिका' शामिल हैं। एंटी-डिफेमेशन लीग के अनुसार, यहूदियों के खिलाफ नफरत की घटनाएं बढ़ रही हैं। साल 2024 में ऐसी 9,354 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 1,702 घटनाएं यहूदी संस्थानों में हुईं। अमेरिकन ज्यूइश कमेटी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 55 प्रतिशत यहूदियों ने डर के कारण अपनी दिनचर्या में बदलाव किया है।
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शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन पर छूट बरकरार
दूसरी ओर इस मामले में समर्थकों का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई खास संघीय कानून नहीं है जो पूजा स्थलों के बाहर लोगों को परेशान किए जाने से बचाए। हालांकि इस बिल में यह भी साफ किया गया है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार बना रहेगा, जो अमेरिका के संविधान के पहले संशोधन के तहत सुरक्षित है। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका में घृणा अपराध बढ़े हैं। हिंदू, यहूदी, मुस्लिम और सिख जैसे धार्मिक समुदायों ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। कानून बनाने वाले नेताओं का कहना है कि यह प्रस्ताव लोगों की सुरक्षा और उनके संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है, क्योंकि देश और दुनिया से जुड़े मुद्दों का असर समाज पर पड़ रहा है।
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