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क्या है ऑपरेशन सुपरचार्ज?: चीन की चुनौती को मिलकर जवाब देंगे अमेरिका-जापान, बनाएंगे ये घातक मिसाइलें
Thu, 29 Oct 2026 08:54 AM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, सेबू
पीटीआई, सेबू
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Thu, 29 Oct 2026 08:54 AM IST
सार
अमेरिका और जापान ने एशिया में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच अपनी सैन्य साझेदारी को मजबूत करने के लिए जापान में अत्याधुनिक हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के संयुक्त उत्पादन पर सहमति जताई है। ऑपरेशन सुपरचार्ज नाम की इस परियोजना के तहत बनने वाली मिसाइलें एफ-35 लड़ाकू विमानों के लिए महत्वपूर्ण होंगी।
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एशिया में चीन की चुनौती का जवाब देने की तैयारी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
अमेरिका और जापान ने उन्नत मध्यम दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के संयुक्त उत्पादन के लिए जापान में एक विनिर्माण केंद्र स्थापित करने पर सहमति जताई है। जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने बुधवार रात इसकी घोषणा की। एशिया में चीन की बढ़ती आक्रामक गतिविधियों को लेकर चिंता के बीच दोनों देशों का यह कदम रक्षा सहयोग मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
कोइजुमी ने फिलीपींस के सेबू प्रांत में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। वह दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के रक्षा मंत्रियों और उनके प्रमुख एशियाई व पश्चिमी साझेदारों की वार्षिक बैठक से इतर अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से मिले थे।
एफ-35 लड़ाकू विमानों के लिए अहम हैं मिसाइलें
कोइजुमी ने बताया कि ‘ऑपरेशन सुपरचार्ज’ के तहत बनाई जाने वाली मिसाइलें एफ-35 लड़ाकू विमानों के लिए जरूरी हैं। हालांकि, उन्होंने प्रस्तावित उत्पादन केंद्र और समझौते से जुड़ी अन्य विस्तृत जानकारी साझा नहीं की। अमेरिका में निर्मित एफ-35 दुनिया के उन्नत लड़ाकू विमानों में शामिल हैं। जापानी सेना भी इन विमानों का इस्तेमाल करती है।
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अमेरिका-जापान गठबंधन की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर सहमति
पीट हेगसेथ के साथ मुलाकात के बाद कोइजुमी ने कहा कि दोनों पक्षों ने क्षेत्र में बिगड़ते सुरक्षा हालात को लेकर चिंता साझा की। उन्होंने बताया कि अमेरिका और जापान अपने गठबंधन की प्रतिरोधक क्षमता और जवाब देने की क्षमता को पहले से अधिक तेजी और मजबूती से बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।
कोइजुमी ने कहा कि दोनों देशों ने कानून के शासन पर आधारित स्वतंत्र और खुले अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के महत्व को दोहराया। उन्होंने ऐसी किसी भी कोशिश का विरोध किया, जिसमें बल, दबाव या दूसरे तरीकों से एकतरफा यथास्थिति बदलने का प्रयास किया जाए। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी बातचीत किसी खास देश को निशाना बनाकर नहीं की गई।
हेगसेथ ने भी क्षेत्रीय सुरक्षा पर दिया जोर
अमेरिकी रक्षा मंत्री हेगसेथ ने बुधवार को आसियान देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ बैठक में क्षेत्र में आक्रामकता को रोकने के लिए अमेरिकी प्रतिबद्धता दोहराई। इस बैठक की मेजबानी फिलीपींस के रक्षा सचिव गिल्बर्टो टेओडोरो जूनियर ने की। हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका का दृष्टिकोण मजबूत, शांत और स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य इतना मजबूत रहना है कि दबाव और आक्रामकता को रोका जा सके, लेकिन अनावश्यक तनाव या सार्वजनिक टकराव से बचा जाए।
उन्होंने कहा कि अमेरिका के मित्र देशों, साझेदारों और संभावित विरोधियों को स्पष्ट रूप से पता होना चाहिए कि अमेरिका कहां खड़ा है और वह अपने हितों तथा सहयोगी देशों के हितों की रक्षा करेगा।
दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव पर अमेरिका की नजर
अमेरिका ने फिलीपींस को भरोसा दिलाया है कि वह दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती आक्रामक गतिविधियों को रोकने के लिए मजबूत प्रतिरोधक व्यवस्था विकसित करेगा। फिलीपींस एशिया में अमेरिका का सबसे पुराना संधि सहयोगी है। दक्षिण चीन सागर वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। चीन इस समुद्री क्षेत्र के लगभग पूरे हिस्से पर अपना दावा करता है। फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया और ब्रुनेई के साथ-साथ ताइवान के भी इस क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर दावे हैं।
विवादित समुद्री क्षेत्रों और दूरस्थ चट्टानी द्वीपों के आसपास चीनी और फिलीपीनी तटरक्षक बलों तथा नौसेनाओं के बीच टकराव बढ़े हैं। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि यदि दक्षिण चीन सागर सहित किसी क्षेत्र में फिलीपींस की सेना, जहाजों या विमानों पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसकी रक्षा करना अमेरिकी प्रतिबद्धता का हिस्सा होगा।
पूर्वी चीन सागर में भी विवाद
चीन और जापान के बीच पूर्वी चीन सागर में जापान के नियंत्रण वाले छोटे द्वीपों को लेकर अलग विवाद है। दोनों देश अक्सर एक-दूसरे पर अपने समुद्री क्षेत्र में दखल देने का आरोप लगाते हैं। अमेरिका और जापान का मिसाइल उत्पादन समझौता ऐसे समय हुआ है, जब क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग और सैन्य प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
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कोइजुमी ने फिलीपींस के सेबू प्रांत में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। वह दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के रक्षा मंत्रियों और उनके प्रमुख एशियाई व पश्चिमी साझेदारों की वार्षिक बैठक से इतर अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से मिले थे।
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एफ-35 लड़ाकू विमानों के लिए अहम हैं मिसाइलें
कोइजुमी ने बताया कि ‘ऑपरेशन सुपरचार्ज’ के तहत बनाई जाने वाली मिसाइलें एफ-35 लड़ाकू विमानों के लिए जरूरी हैं। हालांकि, उन्होंने प्रस्तावित उत्पादन केंद्र और समझौते से जुड़ी अन्य विस्तृत जानकारी साझा नहीं की। अमेरिका में निर्मित एफ-35 दुनिया के उन्नत लड़ाकू विमानों में शामिल हैं। जापानी सेना भी इन विमानों का इस्तेमाल करती है।
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अमेरिका-जापान गठबंधन की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर सहमति
पीट हेगसेथ के साथ मुलाकात के बाद कोइजुमी ने कहा कि दोनों पक्षों ने क्षेत्र में बिगड़ते सुरक्षा हालात को लेकर चिंता साझा की। उन्होंने बताया कि अमेरिका और जापान अपने गठबंधन की प्रतिरोधक क्षमता और जवाब देने की क्षमता को पहले से अधिक तेजी और मजबूती से बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।
कोइजुमी ने कहा कि दोनों देशों ने कानून के शासन पर आधारित स्वतंत्र और खुले अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के महत्व को दोहराया। उन्होंने ऐसी किसी भी कोशिश का विरोध किया, जिसमें बल, दबाव या दूसरे तरीकों से एकतरफा यथास्थिति बदलने का प्रयास किया जाए। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी बातचीत किसी खास देश को निशाना बनाकर नहीं की गई।
हेगसेथ ने भी क्षेत्रीय सुरक्षा पर दिया जोर
अमेरिकी रक्षा मंत्री हेगसेथ ने बुधवार को आसियान देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ बैठक में क्षेत्र में आक्रामकता को रोकने के लिए अमेरिकी प्रतिबद्धता दोहराई। इस बैठक की मेजबानी फिलीपींस के रक्षा सचिव गिल्बर्टो टेओडोरो जूनियर ने की। हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका का दृष्टिकोण मजबूत, शांत और स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य इतना मजबूत रहना है कि दबाव और आक्रामकता को रोका जा सके, लेकिन अनावश्यक तनाव या सार्वजनिक टकराव से बचा जाए।
उन्होंने कहा कि अमेरिका के मित्र देशों, साझेदारों और संभावित विरोधियों को स्पष्ट रूप से पता होना चाहिए कि अमेरिका कहां खड़ा है और वह अपने हितों तथा सहयोगी देशों के हितों की रक्षा करेगा।
दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव पर अमेरिका की नजर
अमेरिका ने फिलीपींस को भरोसा दिलाया है कि वह दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती आक्रामक गतिविधियों को रोकने के लिए मजबूत प्रतिरोधक व्यवस्था विकसित करेगा। फिलीपींस एशिया में अमेरिका का सबसे पुराना संधि सहयोगी है। दक्षिण चीन सागर वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। चीन इस समुद्री क्षेत्र के लगभग पूरे हिस्से पर अपना दावा करता है। फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया और ब्रुनेई के साथ-साथ ताइवान के भी इस क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर दावे हैं।
विवादित समुद्री क्षेत्रों और दूरस्थ चट्टानी द्वीपों के आसपास चीनी और फिलीपीनी तटरक्षक बलों तथा नौसेनाओं के बीच टकराव बढ़े हैं। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि यदि दक्षिण चीन सागर सहित किसी क्षेत्र में फिलीपींस की सेना, जहाजों या विमानों पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसकी रक्षा करना अमेरिकी प्रतिबद्धता का हिस्सा होगा।
पूर्वी चीन सागर में भी विवाद
चीन और जापान के बीच पूर्वी चीन सागर में जापान के नियंत्रण वाले छोटे द्वीपों को लेकर अलग विवाद है। दोनों देश अक्सर एक-दूसरे पर अपने समुद्री क्षेत्र में दखल देने का आरोप लगाते हैं। अमेरिका और जापान का मिसाइल उत्पादन समझौता ऐसे समय हुआ है, जब क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग और सैन्य प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।